नीतीश पर बरसे प्रशांत किशोर, बोले- वो बिना सुरक्षा वह गांव में पैदल नहीं चल सकते, लोग उन्हें गाली देते हैं
Nitish Kumar Prashant Kishor: बिहार में नीतीश कुमार के खिलाफ प्रशांत किशोर लगातार हमलावर हैं। बिहार में प्रशांत किशोर जन सुराज पदयात्रा निकल रहे हैं और लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। इस बीच पीके ने नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नीतीश कुमार से लोग बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं, उन्हें उल्टा-सीधा बोलते हैं। यही नहीं लोग नीतीश कुमार के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार बिना सुरक्षा के, बिना सरकारी अमले के गांव में पैदल नहीं चल सकते हैं।

अफसरशाही, भ्रष्टाचार चरम पर
नीतीश पर हमला बोलते हुए पीके ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है, अफसरशाही सिर पर सवार है। अगर 2014 की बात करें तो उसके बाद से 2017 के नीतीश कुमार में बहुत बड़ा फर्क आ गया है। यह अंतर जमीन-आसमान का है जो नजर भी आ रहा है। लोकसभा चुनाव हारने के बाद तो लोग नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देते हैं, लेकिन 2020 में चुनाव हारने के बाद भी वह कुर्सी पर बने रहे। जब वह भारतीय जनता पार्टी के साथ होते हैं तो उन्हें बिहार के विशेष राज्य के दर्जे की याद नहीं आती है, लेकिन जैसे ही भाजपा से अलग होते हैं बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करते हैं।

बड़े स्तर पर हो रहा पलायन
बिहार की बदहाली पर प्रशांत किशोर ने कहा कि जिन गांव और पंचायत में मुझे जाने का मौका मिला, वहां पर पलायन काफी बड़े स्तर पर हुआ है और यह एक बड़ी समस्या है। गांव से तकरीबन 60 फीसदी युवा बाहर जा चुके हैं। नीतीश कुमार की विफलता इससे बड़ी क्या हो सकती है कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। बिहार में गरीबी और बेरोजगारी की बड़ी वजह बड़ी संख्या में लोगों का भूमिविहीन होना है। आंकड़े बताते हैं कि 58 फीसदी लोगों के पास भूमि ही नहीं है, वहीं देश के आंकड़े की बात करें तो यह 38 फीसदी है।

लालू-नीतीश राज में कोई अंतर नहीं
इससे पहले प्रशांत किशोर ने कहा था कि लालू और नीतीश के राज में कोई फर्क नहीं है। पीछे के दरवाजे से सएक बार फिर से जंगल राज घुस रहा है। इसे रोकना होगा। लालू और नीतीश पिछले 35 साल से प्रदेश में शासन कर रहे हैं, इन लोगों ने मिलकर बिहार की हालत खराब कर दी है। बिहार में बिना भ्रष्टाचार कोई काम नहीं होता है। नीतीश राज में अधिकारियों का जंगल राज है, इसे हर हाल में दूर करने की जरूरत है।












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