ना-ना करते शाहबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब हुए RJD में शामिल, किसे है किसकी ज्यादा जरूरत?
बिहार के सीवान जिले के पूर्व सांसद दिवंगत शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए हैं। यह महत्वपूर्ण कदम तेजस्वी यादव की मौजूदगी में पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया गया। यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे हुआ और इसमें लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव, ओसामा शहाब और उनकी मां हीना शहाब मौजूद थीं।
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ओसामा के पिता के निधन के बाद से ही उनके राजनीति में आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। आज, इन अफवाहों की पुष्टि तब हुई जब वे आरजेडी के सदस्य बन गए। उनके पिता शहाबुद्दीन भी आरजेडी के बैनर तले सांसद रह चुके हैं। उनके बाद ओसामा की मां हिना शहाब ने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया।
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लोकसभा चुनाव में RJD को चुनौती देती नजर आईं थी हीना शहाब
हीना के निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने के साथ ही लालू परिवार के सतह उनकी तल्कियां जगजाहिर हो गईं थी। हालांकि, अब ओसामा और हीना दोनों की ही घर वापसी हो चुकी है। अपने पिता के नक्शे कदमों पर चलते हुए ओसामा शहाब ने आरजेडी का दामन थाम लिया है। लोकसभा चुनाव के वक्त कहा जा रहा था कि अपनी छवि को सुधारने के लिए लालू परिवार हीना और ओसामा से दूरी बनाए हुए है।
ओसामा से ज्यादा RJD को शहाब परिवार की जरुरत!
ओसामा भी ना-ना करते अब आरजेडी में शामिल हो गए हैं। हालांकि, राजनीतिक जानकारों की माने तो शहाब परिवार और आरजेडी की करीबी से दोनों को ही फायदा होने की संभावना है। लेकिन मौजूदा वक्त में आरजेडी को बिहार में अपनी शाख बरकरार रखने के लिए ओसामा और हीना के समर्थन की ज्यादा जरुरत थी। हालांकि, हीना-ओसामा की नैया भी मजधार में ही फंसी नजर आ रही थी।
दोनों के अपने-अपने फायदे
आरजेडी से अलग दोनों ने निर्दलीय कई बार चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं हाथ लगी। अब आरजेडी के साथ आने के बाद जहां आरजेडी को सिवान क्षेत्र के मुस्लिम वोटर्स को साधने में आसानी होगी वहीं ओसामा-हीना के हिस्से भी एक-दो सीट आ सकती है। इस से पहले ओसामा का नाम अपराध में उछलने से आरजेडी उनसे किनारा किये हुए थी। आरजेडी से अलग चुनाव मैदान में उतरने से हीना को कुछ फायदा तो नहीं हुआ लेकिन आरजेडी के वोट जरूर कट गए थे। हीना के मन में भी मलाल था कि लालू परिवार उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। लेकिन अब दोनों को ही एक दूसरे की जरुरत है।
'MY' समीकरण को साधने की कोशिश
एक ओर जहां प्रशांत किशोर ने आरजेडी की मुश्किलें बढ़ाई हुई हैं वहीं बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर डालें तो जिस MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण का जिक्र तेजस्वी करते आएं हैं वो समीकरण उसके हाथ से निकलता नजर आ रहा है। ऐसे में आरजेडी को मुस्लिम वोट बनाये रखने के लिए ठोस कदम उठाना जरुरी था।
ओसामा की कानूनी चुनौतियां
ओसामा को कई कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और वह पहले बिहार के मोतिहारी फायरिंग मामले में जेल जा चुके हैं। इन समस्याओं के बावजूद, वह अब सीवान में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। उनकी मां ने उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेकर आरजेडी की सदस्यता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आगामी चुनाव
बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में ओसामा का आरजेडी से जुड़ना राजनीतिक परिदृश्य को काफी प्रभावित कर सकता है। आरजेडी के साथ परिवार के जुड़ने से क्षेत्रीय राजनीति में उल्लेखनीय बदलाव आने की उम्मीद है। ओसामा और उनके परिवार के लिए इस महत्वपूर्ण क्षण के दौरान लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव मौजूद थे।
ओसामा अब अपने पिता की जगह लेने और सीवान के निर्वाचन क्षेत्र में अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखने के लिए तैयार हैं। आरजेडी में शामिल होने के परिवार के फैसले को आगामी चुनावों से पहले एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो संभावित रूप से क्षेत्र में मतदाताओं की गतिशीलता को बदल सकता है।
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