Bihar Chunav 2025: पूर्णिया से भोजपुर तक बदले समीकरण, बिहार में किसकी बन सकती है सरकार, ताज़ा सर्वे से जानिए
Bihar Chunav 2025: बिहार में साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों ने सियासी तापमान को पहले ही उबाल पर ला दिया है। राज्य की 243 सीटों पर होने वाले इस मुकाबले में एनडीए (NDA) और महागठबंधन के बीच सीधी लड़ाई है, लेकिन इस बार समीकरण उतने सीधे नहीं हैं। हाल में सामने आए दो बड़े प्री-पोल सर्वे, लोक पोल और एस इंडिया ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की जनता अगले पांच साल की सत्ता किसे सौंपेगी, इसका फैसला बेहद करीबी होगा।
सर्वे की बड़ी तस्वीर
लोक पोल सर्वे के मुताबिक महागठबंधन 118-126 सीटों के दायरे में दिख रहा है, जबकि एनडीए 105-114 सीटें हासिल कर सकता है। बहुमत के लिए 122 सीटें जरूरी हैं, यानी महागठबंधन बहुमत की दहलीज पर नजर आ रहा है। वोट शेयर के स्तर पर भी दोनों गठबंधनों के बीच मामूली अंतर है।

महागठबंधन को 39-42% और एनडीए को 38-41% वोट मिलने का अनुमान है। दूसरी ओर, एस इंडिया सर्वे ने क्षेत्रवार आंकड़े दिए हैं। कई इलाकों में तस्वीर लोक पोल से उलट दिख रही है, जो मुकाबले को और रोमांचक बनाती है।
क्षेत्रवार समीकरण: कौन कहां मजबूत
पूर्णिया की 24 सीटें: मुस्लिम आबादी का बड़ा असर है। यहां महागठबंधन को बढ़त मिलने की संभावना जताई गई है।
मगध की 26 सीटें: एनडीए का प्रदर्शन पिछली बार से बेहतर रहने का अनुमान है, महागठबंधन को यहां झटका लग सकता है।
भोजपुर की 22 सीटें: एनडीए मजबूत स्थिति में है और अपने पुराने गढ़ को और पुख्ता कर सकता है।
भागलपुर की 12 सीटें: दोनों बड़े गठबंधनों को लाभ की संभावना है, लेकिन प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी यहां धीरे-धीरे पकड़ बना रही है।
ये आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग पार्टियों की पकड़ है। यानी हर क्षेत्र का लोकल समीकरण अंतिम नतीजों पर भारी पड़ेगा।
प्रशांत किशोर की जन सुराज: छोटा खिलाड़ी, बड़ा असर
बिहार की राजनीति में नया तत्व है प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी। अब तक किसी विधानसभा चुनाव में परखा न गया यह संगठन जमीनी स्तर पर लगातार सक्रिय है। भले ही सीटों की संख्या 5-7 से ज्यादा न हो, लेकिन जन सुराज का वोट शेयर कई सीटों पर बड़े दलों की जीत-हार तय कर सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां मुकाबला दो दलों के बीच बेहद नजदीकी है, वहां जन सुराज की उपस्थिति बड़े गठबंधनों की रणनीति को चुनौती दे सकती है।
क्यों टक्कर और भी कठिन है
जातीय समीकरण: बिहार में अब भी चुनावी गणित जातीय आधार पर गहराई से जुड़ा है। यादव-मुस्लिम वोट बैंक महागठबंधन की ताकत है, जबकि एनडीए को सवर्ण, अति पिछड़ा और महिला वोटरों पर भरोसा है।
विकास बनाम पहचान की राजनीति: एनडीए 'विकास और कानून-व्यवस्था' का मुद्दा उछाल रहा है, जबकि महागठबंधन महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार को घेर रहा है।
छोटे दलों की भूमिका: वीआईपी, एआईएमआईएम और अब जन सुराज जैसे दल 5-10 सीटों पर भी अगर प्रभाव डालते हैं, तो सरकार बनाने का समीकरण बदल सकता है।
संभावित परिदृश्य
अगर महागठबंधन 122 का आंकड़ा पार कर लेता है तो नीतीश कुमार-तेजस्वी यादव की जोड़ी सत्ता में बनी रह सकती है। एनडीए अगर 110 से ज्यादा सीटों पर रुकता है, तो निर्दलीय और छोटे दलों का समर्थन उसे सत्ता तक पहुंचा सकता है। त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति में कुछ सीटों पर बेहद कम अंतर से नतीजे आ सकते हैं, जहां 2-3% वोट भी खेल पलट सकते हैं।
बिहार चुनाव बेहद नजदीकी और अप्रत्याशित
दोनों सर्वे एक ही बात कह रहे हैं-2025 का बिहार चुनाव बेहद नजदीकी और अप्रत्याशित होगा। महागठबंधन फिलहाल थोड़ी बढ़त पर दिख रहा है, लेकिन मगध, भोजपुर और भागलपुर जैसे क्षेत्रों में एनडीए की वापसी का अंदेशा है। जन सुराज जैसी नई ताकत और अन्य छोटे दल सत्ता की चाबी अपने हाथ में रख सकते हैं।
मतलब साफ है कि बिहार की 243 सीटों में से हर एक सीट इस बार निर्णायक होगी। अंतिम नतीजा 122 के जादुई आंकड़े से कुछ सीट ऊपर-नीचे हुआ तो बिहार की सियासत में नए समीकरण बनेंगे और सरकार बनाने की प्रक्रिया दिलचस्प मोड़ ले सकती है।
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