E20 Petrol पर क्या छुपा रही सरकार? गाड़ी का माइलेज बना 'गोपनीय'! RTI से उठे बड़े सवाल
E20 Petrol Row: देशभर में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विवाद का केंद्र E20 नहीं, बल्कि उससे जुड़ी रिसर्च रिपोर्टें हैं, जिन्हें सरकार और संबंधित संस्थान सार्वजनिक करने से इनकार कर रहे हैं। मामला तब चर्चा में आया जब मुंबई के बैंकर नचिकेत देशपांडे ने RTI के जरिए उन अध्ययनों की जानकारी मांगी।
जिनका हवाला देकर केंद्र सरकार ने कहा था कि E20 के प्रभावों का व्यापक परीक्षण किया जा चुका है। लेकिन जवाब में Automotive Research Association of India ने रिपोर्टों को 'गोपनीय' बताते हुए देने से इनकार कर दिया, यहीं से सवाल उठने लगे कि आखिर गाड़ी के माइलेज, इंजन के घिसाव और फ्यूल सिस्टम पर असर जैसी जानकारी को गोपनीय क्यों रखा जा रहा है?

दरअसल 2023 से पहले की गाड़ियों (जो E5 या E10 जैसे कम इथेनॉल वाले मिश्रण के लिए बनी थीं) के मालिकों को चिंता है कि इथेनॉल के खराब करने वाले गुण और कम एनर्जी डेंसिटी की वजह से फ्यूल होज में जंग लग सकती है, इंजेक्टर खराब हो सकते हैं और माइलेज (फ्यूल एफिशिएंसी) में 5-7% की कमी आ सकती है।
सरकार के दावे क्या गलत?
पारदर्शिता की मांग करते हुए, मुंबई के बैंकर नचिकेत देशपांडे ने RTI के ज़रिए मंत्रालय द्वारा बताई गई रिपोर्ट की मांग की। उन्होंने टेस्ट की गई गाड़ियों के मॉडल, कितनी दूरी तक गाड़ी चलाई गई और नमी के कारण अलग होने (मॉइस्चर फेज़ सेपरेशन) और पार्ट्स में जंग लगने से जुड़ा डेटा मांगा लेकिन उन्हें कोई जानकारी दी गई नहीं।
ARAI ने नहीं सुनी नचिकेत देशपांडे की बात
नचिकेत देशपांडे का आरोप है कि मंत्रालय ने दो महीने तक उनकी अर्ज़ी पर कोई कार्रवाई नहीं की और फिर उसे ARAI के पास भेज दिया। उनका कहना है कि RTI एक्ट की धारा 8(1)(d) के तहत इस रिसर्च को सार्वजनिक करने से छूट मिली हुई है लेकिन ARAI ने अर्ज़ी खारिज कर दी, जिसके बाद । X (पहले ट्विटर) पर देशपांडे ने जवाबदेही की कमी पर सवाल उठाया, 'अगर सरकार ने E20 नियम को लागू करने के लिए अपनी प्रेस रिलीज़ में IOCL, ARAI और SIAM की स्टडीज़ का ज़िक्र किया था, तो अब वह डेटा सरकारी राज़ क्यों बन गया है?" उन्होंने सवाल किया कि माइलेज में कमी और इंजन के सामान्य घिसाव (wear) के बारे में क्या गोपनीय हो सकता है?
'गाड़ी मालिकों को गिनी पिग की तरह यूज कर रही सरकार'
नचिकेत देशपांडे को शक है कि इनकार का मतलब है कि मंत्रालय ने अपनी प्रेस रिलीज़ में झूठ बोला था और कोई असली रिसर्च नहीं की गई थी। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि 'वह बिना जांच-परख वाली पॉलिसी के लिए लाखों गाड़ी मालिकों को 'गिनी पिग' (प्रयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले जानवर) की तरह इस्तेमाल कर रही है। पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाने वाले ईंधन पर चलने के लिए मजबूर किया जा रहा है और पारदर्शी वैज्ञानिक जानकारी न होने के कारण ग्राहकों को गाड़ियों के जल्दी खराब होने (मैकेनिकल वियर) का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।'
E20 Petrol पर क्या छुपा रही सरकार? RTI से उठे बड़े सवाल
- अगर E20 पर व्यापक रिसर्च हुई थी, तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
- E20 से माइलेज में वास्तव में कितनी कमी आती है? ARAI इसे क्यो नहीं बता रहा है?
- क्या परीक्षण केवल नई E20-कम्प्लायंट गाड़ियों पर हुए या पुराने वाहनों को भी शामिल किया गया था?
- क्या फ्यूल पाइप, इंजेक्टर, सील, गैस्केट और अन्य पार्ट्स में अतिरिक्त घिसाव या क्षति देखी गई?
- क्या वाहन हजारों किलोमीटर तक चलाकर जांचे गए या केवल सीमित लैब परीक्षण किए गए?
- एथेनॉल नमी को आकर्षित करता है। क्या इससे जंग, फ्यूल क्वालिटी या इंजन पर असर पड़ता है?
- माइलेज, इंजन प्रदर्शन और वाहन परीक्षण से जुड़ा डेटा व्यापारिक रहस्य कैसे हो सकता है, जबकि इसका असर करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ता है?
- जब E20 नीति पूरे देश के वाहन मालिकों को प्रभावित करती है, तो क्या शोध रिपोर्टों को सार्वजनिक हित में जारी नहीं किया जाना चाहिए?
E20 पेट्रोल क्या है? माइलेज पर क्या पड़ता है प्रभाव?
E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20% एथेनॉल (Ethanol) और 80% पेट्रोल मिलाया जाता है। यहां "E" का मतलब Ethanol और "20" का मतलब 20% मिश्रण है। एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जो मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। एथेनॉल की ऊर्जा पेट्रोल से कम होती है। इसलिए समान मात्रा में E20 जलने पर वाहन को थोड़ी कम ऊर्जा मिलती है इसलिए विशेषज्ञ मानते है कि कारों में माइलेज 3% से 7% तक कम हो सकता है, ये देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम रोल निभाता है।
ARAI क्या है?
ARAI भारत की प्रमुख ऑटोमोबाइल अनुसंधान और परीक्षण संस्था है। कोई नई कार, बाइक, बस या ट्रक बाजार में आने से पहले उसके कई तकनीकी परीक्षण किए जाते हैं। ARAI ऐसे वाहनों का परीक्षण और सर्टिफिकेशन देती है। ARAI को भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) का समर्थन प्राप्त है और इसकी स्थापना 1966 में हुई थी और इसका मुख्यालय पुणे में है।














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