Khamenei on US Iran MoU: 'डील के लिए ट्रंप बेताब थे, मेरी राय अलग थी', अमेरिका-ईरान समझौते पर बोले खामेनेई

Khamenei on US Iran MoU: अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस डील के लिए सबसे ज्यादा कोशिश अमेरिका की तरफ से की गई और अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे सफल बनाने के लिए हर तरह का दबाव बनाया।

खामेनेई ने साफ किया कि उनकी व्यक्तिगत राय इस समझौते को लेकर अलग थी, लेकिन उन्होंने देश के हितों को देखते हुए इसकी मंजूरी दी। इस बीच फ्रांस में जी-7 समिट के बाद हुए इस समझौते को मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

Khamenei on US Iran MoU

अमेरिका की ज्यादा थी जरूरत, ईरान का दावा

मुज्तबा खामेनेई ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस समझौते के पीछे ईरान नहीं बल्कि अमेरिका की ज्यादा जरूरत और बेचैनी थी। उनके मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए हर संभव तरीका अपनाया। खामेनेई ने दावा किया कि ईरानी टीम ने बातचीत में पूरी ईमानदारी दिखाई, लेकिन डील को आगे बढ़ाने के लिए लगातार पहल अमेरिकी पक्ष की तरफ से हुई। उन्होंने इसे अमेरिका की रणनीतिक जरूरत बताया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की कोशिश है।

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मेरी राय अलग थी, लेकिन देशहित में दी मंजूरी

खामेनेई ने माना कि इस समझौते को लेकर उनकी सोच पूरी तरह सकारात्मक नहीं थी। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक तौर पर उनकी राय अलग थी, लेकिन ईरान के राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि देश और उसके सहयोगियों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने इस डील को मंजूरी दी। खामेनेई ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका समझौते से बाहर जाकर नई शर्तें लगाने की कोशिश करता है तो ईरान किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

समझौते में क्या-क्या अहम बातें शामिल हैं

MoU में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। दोनों पक्षों ने क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां कम करने और तनाव घटाने पर सहमति जताई है। अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगे नौसैनिक प्रतिबंध हटाने की बात मानी है। इसके साथ समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को सामान्य स्तर पर लाने की योजना बनाई गई है। समझौते में यह भी तय हुआ है कि व्यापक डील होने के बाद अमेरिका अपनी कुछ सैन्य मौजूदगी कम करेगा जबकि ईरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

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जी-7 समिट के बाद बनी डील, मैक्रों ने निभाई भूमिका

यह समझौता फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद सामने आया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में आयोजित विशेष बैठक के दौरान इस MoU पर हस्ताक्षर किए गए। मैक्रों ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य स्थिति बहाल होगी और वैश्विक व्यापार को भी राहत मिलेगी। फ्रांस ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

अब 60 दिनों में होगी फाइनल डील पर बातचीत

MoU पर हस्ताक्षर के बाद अब दोनों देशों के पास 60 दिनों का समय है। इस दौरान अमेरिका और ईरान एक व्यापक और अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करेंगे। तेहरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले दो महीनों में बातचीत सफल रहती है तो यह डील मिडिल ईस्ट की राजनीति और सुरक्षा हालात में बड़ा बदलाव ला सकती है। साथ ही तेल और वैश्विक व्यापार पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

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