Bihar News: कुख्यात इनामी नक्सली रमेश टुडू ढेर, 15 सालों से कर रहा था तांडव, जंगल में एनकाउंटर
Bihar News: कटोरिया के कलोथर जंगल में पुलिस और एसटीएफ के संयुक्त अभियान में कुख्यात नक्सली रमेश टुडू को मार गिराया गया। उसके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम था। रमेश बूढ़ीघाट गांव का रहने वाला था और करीब 15 साल से नक्सली गतिविधियों में शामिल था। उसके आपराधिक रिकॉर्ड में जमुई और देवघर जिलों में 11 गंभीर मामले शामिल हैं।
कानून व्यवस्था बनाए रखना चुनौती: हाल के वर्षों में, इस क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी एक लगातार मुद्दा रही है। कटोरिया, चांदन और आनंदपुर ओपी पुलिस स्टेशन क्षेत्रों के आसपास के घने जंगल इन समूहों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गए हैं। इलाके की प्राकृतिक आच्छादन ने कानून प्रवर्तन के लिए नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

हिंसा का इतिहास: इस इलाके में पिछले कुछ सालों में काफी हिंसा हुई है। 3 नवंबर 2005 को आनंदपुर ओपी के तत्कालीन प्रभारी भगवान सिंह की नक्सलियों ने बम से हत्या कर दी थी। इस घटना से जंगलों में नक्सलियों का प्रभाव बढ़ गया। नक्सलियों की गतिविधियों का डर आज भी लोगों में बना हुआ है। इलाके के लोग दहशत में ज़िदगी गुज़ारने को मजबूर हैं।
रमेश का आपराधिक इतिहास बहुत लंबा है। 30 नवंबर, 2011 को उस पर चंद्रमंडी पुलिस स्टेशन में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के आरोप लगे। 18 दिसंबर, 2015 को उस पर हत्या और साजिश रचने के आरोप लगे। पिछले कई सालों में उसके खिलाफ कई अन्य मामले दर्ज किए गए।
लगाम कसने के लिए चल रहे ऑपरेशन: रमेश की मौत के बाद अधिकारियों ने नक्सली ठिकानों पर अभियान तेज कर दिया है। डीएम अंशुल कुमार ने रमेश के पोस्टमार्टम के लिए कटोरिया बीडीओ विजय कुमार सौरभ को मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है। पुलिस और एसटीएफ द्वारा शेष खतरों को खत्म करने के लिए तलाशी अभियान जारी है।
पिछले मुठभेड़ों में कानून प्रवर्तन द्वारा महत्वपूर्ण बरामदगी देखी गई है। 26 फरवरी, 2011 को जयपुर थाना क्षेत्र के मांझीडीह में एक लंबी मुठभेड़ के दौरान छह नक्सली मारे गए थे। पुलिस ने इस अभियान के दौरान गिरफ्तार किए गए देवन टुडू से राइफल और पिस्तौल सहित लूटे गए हथियार बरामद किए।
नक्सली एक बार फिर संगठित: 20 फरवरी 2017 को सब-जोनल कमांडर मंटू खैरा की हत्या के बाद इस क्षेत्र में अस्थायी शांति आई थी। हालांकि, हाल की गतिविधियों से पता चलता है कि नक्सली एक बार फिर से संगठित होकर अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले एक दशक में कई मुठभेड़ें हुई हैं, जो मौजूदा तनाव को उजागर करती हैं।
सितंबर 2016 में हरदिया पडिया जंगल में एक मुठभेड़ हुई और उसके बाद उसी साल 27 नवंबर को करमाटांड में एक और मुठभेड़ हुई। इन अभियानों में अक्सर हथियार और विस्फोटक बरामद होते हैं। अधिकारी सतर्क बने हुए हैं तथा वे रणनीतिक अभियानों के माध्यम से इन क्षेत्रों में नक्सली प्रभाव को रोकने के लिए प्रयास जारी रखे हुए हैं, जिसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उनके नेटवर्क को ध्वस्त करना है।
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