दावोस में महाराष्ट्र का बड़ा धमाका: 30 लाख करोड़ के निवेश से क्या बदलेगी राज्य की तकदीर?

महाराष्ट्र ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसे आर्थिक मोर्चे पर अब तक का सबसे बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में दावोस गए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के लिए एक 'सक्सेस स्टोरी' लिख दी है। महाराष्ट्र की झोली में करीब 360 अरब डॉलर (लगभग 30 लाख करोड़ रुपये) के निवेश वाले एमओयू (MoUs) आए हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

Maharashtra Secures USD 360B MoUs at WEF

इस ऐतिहासिक उपलब्धि की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जमकर तारीफ हो रही है। वर्ल्ड बैंक के सीनियर एडवाइजर एम. जमशेद ने वैश्विक मंच पर महाराष्ट्र के इस शानदार प्रदर्शन को सराहा है। उन्होंने कहा, "वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में महाराष्ट्र की भागीदारी एक बेहद सफल और दिलचस्प कहानी रही है। राज्य 360 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश समझौतों के साथ वापस लौटा है।" जमशेद ने राज्य में आने वाले निवेश के इस विशाल पैमाने को रेखांकित किया।

निवेश की इस सुनामी में सबसे बड़ी भूमिका दिग्गज उद्योगपति गौतम अदाणी के नेतृत्व वाले अदाणी ग्रुप की है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा इसी भारतीय ग्रुप के नाम है। अदाणी ग्रुप ने महाराष्ट्र में मेगा-प्रोजेक्ट्स के लिए 66 अरब डॉलर (करीब 6 लाख करोड़ रुपये) के निवेश का संकल्प लिया है।

अदाणी ग्रुप ने अगले सात से दस वर्षों के लिए एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। यह निवेश भविष्य की जरूरतों से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा। इसमें धारावी पुनर्विकास जैसा जटिल प्रोजेक्ट, 3,000 मेगावाट क्षमता वाले ग्रीन डेटा सेंटर पार्क, एक न्यूक्लियर पावर प्लांट, एडवांस सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब्रिकेशन यूनिट्स के साथ-साथ 8,700 मेगावाट के पंप-स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इस बड़े निवेश पर अदाणी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर प्रणव अदाणी ने कहा कि महाराष्ट्र की निवेश-अनुकूल नीतियां इसे बड़े और बदलाव लाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक नेचुरल हब बनाती हैं।

*रोजगार और ग्रीन इनोवेशन का बनेगा केंद्र*

दावोस 2026 से मिली यह कामयाबी महाराष्ट्र के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने वाली मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन निवेशों से अगले एक दशक में युवाओं के लिए 30 से 40 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है।

खास बात यह है कि घोषित निवेश का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के जरिए आएगा। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड सहित 18 से अधिक देशों की सक्रिय भागीदारी है। अदाणी ग्रुप के अलावा, इन समझौतों में कई बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए समर्पित 100 एकड़ की 'महाराष्ट्र इनोवेशन सिटी' और 1200 एकड़ में फैला 'रायगढ़ पेन ग्रोथ सेंटर' प्रमुख हैं। इसके अलावा क्वांटम कंप्यूटिंग, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इकोसिस्टम और एडवांस हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में भी भारी निवेश आ रहा है।

शुरुआती समझौतों को जमीन पर उतारने के मामले में महाराष्ट्र का ट्रैक रिकॉर्ड 75 प्रतिशत रहा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने वैश्विक और स्थानीय निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि जमीन आवंटन और अन्य मंजूरियां 'मिशन मोड' पर दी जाएंगी। इस बड़ी उपलब्धि ने महाराष्ट्र को दक्षिण एशिया के सबसे पसंदीदा निवेश डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित कर दिया है, जिससे राज्य अपनी मल्टी-ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य के और करीब पहुंच गया है।

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