Nishant Kumar: नीतीश की विरासत, छवि निर्विवाद, बिहार चुनाव में इन 5 वजहों से महत्वपूर्ण होंगे निशांत
Nishant Kumar son of Nitish Kumar: बिहार की राजनीति इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार की वजह से गरमायी हुई है। वह सक्रिय राजनीति में आएंगे या नहीं, यह उनके और उनके पिता पर निर्भर है। लेकिन, इन दिनों जिस तरह से वो सियासी बातों में सक्रिय हुए हैं, उससे यह विश्लेषण का विषय जरूर हो गया है कि अगर वह पिता की सियासी विरासत संभालने का फैसला करते हैं तो इससे बिहार की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
निशांत कुमार के राजनीति में आने के लिए नीतीश की पार्टी जेडीयू और मुख्यमंत्री के नजदीकी रिश्तेदारों का काफी दबाव है। ऐसे में हाल के दिनों में निशांत जिस तरह से अपने पिता के लिए चुनावी बैटिंग करने लगे हैं, उससे लगता है कि देर सबेर वह भी सियासी एंट्री मार सकते हैं। हालांकि,जबतक नीतीश इसके लिए मन नहीं बनाते हैं, तबतक ऐसा होना मुमकिन नहीं लगता।

Nishant Kumar: एक) युवा नेताओं की जमात में अलग नजर आ सकते हैं नीतीश के बेटे निशांत
निशांत कुमार अभी मात्र 49 साल के हैं। इस हिसाब से अगर वे राजनीति में आते हैं तो वह प्रशांत किशोर, मुकेश सहनी, संतोष मांझी, चिराग पासवान और तेजस्वी यादव जैसे युवा नेताओं के बीच खड़े होंगे। इनमें से प्रशांत किशोर और मुकेश सहनी को छोड़ दें तो बाकी सारे नेता अपने पिता की सियासी विरासत ही आगे बढ़ा रहे हैं।
ऊपर जितने नेताओं की चर्चा की है, उनमें से चिराग ही एक हैं, जो अपने पिता के बाद भी उनकी राजनीति की गाड़ी को अपने दम पर आगे खींचने में सफल हुए हैं। बाकी के पीछे अभी भी उनके पिता का ही आशीर्वाद है। ऐसे में निशांत अगर सियासत में कदम रखते हैं तो यह इन सब में बिल्कुल नए होंगे, जिनके बारे में लोग जानना- समझना चाहेंगे। अभी तक नीतीश ने वंशवाद की राजनीति से दूरी बनाए रखी है, उससे वह यह संदेश दे सकते हैं कि जब पिता ने अपनी सियासत का पूरा किरदार निभा लिया, तब वह सक्रिय हो रहे हैं।
Nishant Kumar son of Nitish Kumar: दो) विवादों से नहीं रहा है कोई नाता
निशांत कुमार राजनीति की दुनिया से अबतक बहुत दूर रहे हैं; और अब तक किसी विवाद से भी उनका नाता नहीं रहा है। उनकी छवि उनके नाम की तरह ही शांत रही है और वह भी बिल्कुल साफ सुथरी। नीतीश के बेटे होने की वजह से उनकी तुलना सबसे पहले लालू यादव के दोनों बेटों तेजस्वी और तेज प्रताप यादव से होगी, जिनके साथ विवादों का नाता उनकी राजनीति से भी पुराना है।
Nishant Kumar: तीन) नीतीश कुमार की छवि का भी मिल सकता है लाभ
पिता नीतीश कुमार की तरह ही निशांत भी पेशे से इंजीनियर हैं और बीआईटी से सॉफ्टवेयर में इंजीनियरिंग करने की वजह से पढ़े-लिखे नेताओं में गिनती हो सकती है। इस मामले में वे बिहार के ज्यादातर युवा नेताओं से जनता की नजरों में बेहतर स्थान पर स्थापित हो सकते हैं।
दूसरी बात ये है कि व्यक्तिगत तौर पर नीतीश की छवि ईमानदार नेता की है, चाहे भले ही उनके शासन में भ्रष्टाचार के फलने-फूलने के आरोप लगते रहे हों। निशांत कुमार को पिता की इस सियासी कमाई का लाभ मिलने की उम्मीद है।
Nishant Kumar: चार) नीतीश कुमार की तरह ही जेडीयू में लोकप्रिय होने की संभावना
निशांत कुमार के बारे में कहा जाता है कि वह भले ही लाइमलाइट से दूर रहते आए हों, लेकिन उनमें नीतीश वाला अंदाज मौजूद है। मसलन, उनके बारे में कहा जाता है कि वह नीतीश के ही तरह जवाब देते हैं।
ऐसे में माना जाता है कि राजनीति में आते ही जेडीयू के नेता और कार्यकर्ता उनका नेतृत्व आसानी से स्वीकार कर सकते हैं। उनके समर्थन में पार्टी की ओर से लगा एक पोस्टर- 'बिहार की पुकार, आएं निशांत कुमार' भी इसी की ओर इशारा करता है।
Nishant Kumar son of Nitish Kumar: पांच) क्या निशांत को मिलेगा पिता नीतीश का आशीर्वाद?
बिहार की राजनीति में अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निशांत कुमार को राजनीति में आने देने के लिए नीतीश तैयार होंगे? क्योंकि, परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति का विरोध ही उनकी राजनीति का आधार रहा है।
अगर नीतीश ने इसके लिए हामी भर दी तो फिर आने वाले विधानसभा चुनाव में वह अपने पिता के साथ-साथ एनडीए के लिए भी एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं और इससे बिहार की राजनीति को एक नई दिशा भी मिलने की संभावना है।












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