Bihar Politics:‘सीट तय हो चुकी है,फॉर्मूला भी’, टिकट बंटवारे पर BJP के बयान से उठे सवाल, NDA गठबंधन में सब ठीक
Bihar Politics: 'बिहार में राजनीतिक दल आठ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए कमर कस रहे हैं। एनडीए गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर मांग उठ रही है, जिसमें हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी 20 सीटें मांग रहे हैं। इसने एनडीए के भीतर चर्चाओं को जन्म दे दिया है, क्योंकि मांझी की मांग पर भाजपा की प्रतिक्रिया से सीट बंटवारे पर समन्वय की कमी का संकेत मिलता है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि सीटों का बंटवारा हो चुका है, फॉर्मूला भी तय है। मांझी की मांग के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा कि फैसला पहले ही हो चुका है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इससे सवाल उठता है कि मांझी की मांग रणनीतिक कदम है या दबाव की राजनीति।

सीट शेयरिंग की गतिशीलता: 2020 के विधानसभा चुनाव में मांझी की पार्टी ने एनडीए के भीतर सात सीटों पर चुनाव लड़ा था और चार पर जीत हासिल की थी। हालांकि, इस बार चिराग पासवान एनडीए में शामिल हो गए हैं, जिससे सीटों का बंटवारा जटिल हो सकता है। 2020 में पासवान की एलजेपी ने 137 सीटों पर अलग से चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे सिर्फ एक जीत मिली थी।
सीट बंटवारे का समीकरण: चिराग पासवान की भागीदारी सीट बंटवारे के समीकरण को जटिल बनाती है। इससे पहले, उनकी पार्टी ने भाजपा के बागियों को मैदान में उतारा था, जिसका जेडीयू पर नकारात्मक असर पड़ा था। अब एनडीए के साथ गठबंधन होने के कारण यह अनिश्चित है कि पासवान मांझी से कम सीटें स्वीकार करेंगे या नहीं। मोदी मंत्रिमंडल में दलित प्रतिनिधियों के रूप में दोनों नेताओं का महत्वपूर्ण प्रभाव है।
पिछले चुनाव परिणाम: पिछले चुनावों में चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी ने लोकसभा और झारखंड विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था। इसके उलट पिछले विधानसभा चुनाव में मांझी की पार्टी ने चार सीटें जीतकर बढ़त हासिल की थी। पिछली सीट शेयरिंग के हिसाब से कुल 243 सीटों में से जेडीयू को 115 और बीजेपी को 112 सीटें दी गई थीं।
एनडीए में कौन हावी रहेगा: मौजूदा स्थिति में सवाल उठता है कि इस बार एनडीए में कौन हावी रहेगा। मांझी और पासवान दोनों ही गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। आगामी चुनावों की तैयारियों के चलते यह देखना बाकी है कि ये गतिशीलता कैसे सामने आती है और प्रत्येक पार्टी अपनी इच्छित स्थिति को सुरक्षित करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
बिहार में राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है क्योंकि गठबंधन चुनावी सफलता के लिए रणनीति बना रहे हैं। मांझी और पासवान जैसे प्रमुख खिलाड़ी एनडीए ढांचे के भीतर प्रभाव के लिए होड़ कर रहे हैं, इसलिए चुनाव से पहले आने वाले महीनों में सीट बंटवारे पर बातचीत तेज होने की संभावना है।












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