Nalanda Temple Stampede: लापरवाही की भेंट चढ़ी 9 श्रद्धालुओं की जान, 4 पुजारी गिरफ्तार-40 पर FIR
Nalanda Temple Stampede Row: बिहार के नालंदा जिले में आस्था के केंद्र मधड़ा शीतला मंदिर में हुआ हादसा प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की बड़ी लापरवाही का गवाह बना है। चैत्र माह के अंतिम मंगलवार को जब हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन की उम्मीद लिए मंदिर पहुंचे थे, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह दिन मातम में बदल जाएगा।
संकरे रास्तों और अप्रत्याशित भीड़ के बीच मची भगदड़ ने कई परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं। इस हादसे में 8 महिलाओं सहित 9 लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक चार पुजारियों को गिरफ्तार किया है। मंदिर कमेटी के प्रमुख पदाधिकारियों सहित 40 लोगों पर केस दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

सलाखों के पीछे पहुंचे भगदड़ के जिम्मेदार
दीपनगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदिर के चार पुजारियों- निरंजन कुमार, अनुज पांडेय, मिथिलेश पंडित और विवेकानंद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने लापरवाही और कुप्रबंधन को आधार बनाते हुए कुल 40 लोगों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। इसमें मंदिर कमेटी के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष सहित 20 नामजद आरोपी हैं, जबकि 20 अज्ञात लोगों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
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कुप्रबंधन और संकरे रास्तों ने ली 9 लोगों जान
हादसे के पीछे की मुख्य वजह भारी भीड़ और सुरक्षा इंतजामों का शून्य होना बताया जा रहा है। मंगलवार को करीब 25 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर में जमा थे। हादसे में 9 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है।
- संकरे मार्ग: मंदिर तक पहुंचने के रास्ते बेहद पतले थे, जो इतनी भीड़ का दबाव नहीं झेल सके।
- अव्यवस्था: आने-जाने के लिए अलग-अलग रास्ते न होने के कारण आमने-सामने की भिड़ंत हुई।
- हताहत: इस भगदड़ में 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है, जबकि 9 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है।
धार्मिक न्यास बोर्ड का हस्तक्षेप और निर्देश
हादसे के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर रनवीर नंदन ने मंदिर का दौरा किया। उन्होंने मौके पर स्थिति का निरीक्षण करने के बाद कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- पंजीकरण का अभाव: उन्होंने बताया कि यह मंदिर बोर्ड के पास रजिस्टर्ड नहीं है, लेकिन इसकी निगरानी अब अनिवार्य की जाएगी।
- आजीविका का सवाल: मंदिर पर करीब 400 पांडा परिवारों की रोजी-रोटी निर्भर है, इसलिए इसे बंद करने के बजाय व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया गया है।
- 6 महीने की डेडलाइन: पांडा कमेटी को व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है। साथ ही, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर महीने समीक्षा बैठक करने का निर्देश दिया गया है।
जनता में आक्रोश
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशासन को इतनी बड़ी भीड़ का अनुमान था, फिर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल पुजारियों की गिरफ्तारी ही काफी नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाने चाहिए।
With AI Inputs
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