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Nalanda Stampede: नालंदा मंदिर में मौत का तांडव, कौन थे वो श्रद्धालु जिन्होंने भगदड़ में गंवाई जान?

Nalanda Stampede: बिहार के नालंदा जिले में चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया है। बिहारशरीफ के नजदीक मघड़ा गांव स्थित शीतला माता मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान अचानक मची भगदड़ में 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। मरने वालों में 8 महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं।

शीतला अष्टमी और चैत्र मास के अंतिम मंगलवार के विशेष संयोग के कारण मंदिर में करीब 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। मंदिर परिसर की क्षमता कम होने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण स्थिति बेकाबू हो गई। दर्शन की होड़ में मची धक्का-मुक्की ने देखते ही देखते मौत का तांडव मचा दिया, जिससे चारों ओर चीख-पुकार मच गई।

Nalanda Stampede

नहीं हो पाई है सभी मरने वालों की पहचान

इस भीषण हादसे में अब तक 9 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। घटनास्थल पर दम घुटने और दबने से 8 महिलाओं की मौत हुई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल पुरुष ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों में से 7 की पहचान कर ली गई है:

  • देवंती देवी (48 वर्ष)
  • मालो देवी (36 वर्ष)
  • कृंता देवी (48 वर्ष)
  • रीता देवी (45 वर्ष)
  • कांती देवी (45 वर्ष)
  • आशा देवी (65 वर्ष)
  • रेखा देवी (55 वर्ष)

शेष तीन मृतकों में एक महिला नवादा की और एक पटना की रहने वाली बताई जा रही है, जबकि एक मृतक पुरुष की शिनाख्त अभी की जानी बाकी है।

Nalanda Stampede List

इंतजामों की पोल खुली, 40 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि मंदिर में हर साल इस दिन भारी भीड़ जुटती है, इसके बावजूद प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग या पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था नहीं की थी। हादसे के बाद भी लापरवाही का आलम यह रहा कि पहली एम्बुलेंस पहुंचने में करीब 40 मिनट का समय लगा। इस दौरान स्थानीय लोगों और कुछ ही तैनात पुलिसकर्मियों ने मिलकर घायलों को संभाला और अस्पताल पहुंचाया।

राष्ट्रपति के दौरे में व्यस्त रहा प्रशासन, मंदिर पड़ा खाली

हादसे के समय नालंदा जिले का पूरा प्रशासनिक अमला नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के आगमन की तैयारियों में व्यस्त था। वहां सुरक्षा के लिए 2500 जवानों की तैनाती थी, लेकिन महज 5 किलोमीटर दूर मघड़ा मंदिर में हजारों की भीड़ को संभालने के लिए पुलिस बल नगण्य था।

पीएम-सीएम राहत कोष से मुआवजे का ऐलान

घटना के बाद मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और लापरवाही बरतने के आरोप में दीपनगर थाना प्रभारी (SHO) राजमणि को निलंबित कर दिया गया है। पटना कमिश्नर को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है।

राज्य सरकार: मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपये का मुआवजा।

केंद्र सरकार: प्रधानमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये की सहायता राशि।

क्यों उमड़ी थी इतनी भीड़?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र मास के आखिरी मंगलवार और शीतला अष्टमी पर माता को बासी (ठंडा) भोजन अर्पित करने की परंपरा है। इसी 'बसौड़ा' पूजा के लिए आसपास के कई जिलों से लोग मघड़ा गांव पहुंचे थे। मंदिर का छोटा परिसर इतनी भीड़ का दबाव नहीं झेल सका और एक छोटी सी धक्का-मुक्की बड़े हादसे में बदल गई।

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