अप्रैल में हुए शराबकांड फिर ताज़ा हुए 'ज़ख्म' याद, ज़हरीली शराब से गई 2 लोगों की जान, 3 के आंखों की रोशनी
Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िलें में हुए शराब कांड ने एक बार फिर से इस अप्रैल महीने हुए कांड की याद दिला दी। जिले में रविवार को कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से दो लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य की आंखों की रोशनी चली गई।
पुलिस की मानें तो संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों की सूचना मिलने के बाद, जांच के लिए एक टीम मौके पर पहुंची। संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। मुजफ्फरपुर के एसपी अभिषेक दीक्षित ने कहा कि मौत होनी की सूचना हमें सूचना मिली।

एसपी अभिषेक दीक्षित ने कहा कि अचानक तबीयत खराब होने से दो लोगों के मौत की सूचना मिली थी। शुरुआती जांच से पता चला है कि उन्होंने देशी शराब का सेवन किया था। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
आपको बता दें कि इस साल की शुरुआत (अप्रैल) में बिहार के मोतिहारी ज़िले में ज़हरीली शराब के सेवन से 27 लोगों की जान गई थी। मोतिहारी के एसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के मद्देनजर पांच स्टेशन हाउस अधिकारियों (एसएचओ), 2 शराब विरोधी टास्क फोर्स (एएलटीएफ) कर्मियों और 9 पुलिस चौकीदारों को निलंबित किया था।
शराब से हुई मौतों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की थी। वहीं शर्त थी कि प्रदेश में शराबबंदी नीति का पालन करने का लिखित वचन दें। सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि मौतें दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
हम प्रत्येक मृतक के परिवार को सीएम राहत कोष से 4-4 लाख रुपये देंगे। हालांकि, उन्हें हमें लिखित में यह आश्वासन भी देना चाहिए कि वे वर्तमान में लागू शराब प्रतिबंध के पक्ष में हैं।
आपको बता दें कि नीतीश कुमार की सरकार ने साल 2016 के बिहार निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत राज्य भर में शराब पर प्रतिबंध लगाया था।इस कांड के बाद ग्रामीणों में रोष है, ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की शराबबंदी नाकाम है, इससे अच्छे तो शराबबंदी ख़त्म कर दी जाए, कम से कम ज़हरीली शराब पीने से लोगों की जान तो नहीं जाएगी।












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