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OI Exclusive: मुस्लिम युवक का कृष्ण प्रेम, धर्म परिवर्तन कर जावेद से बने शीबू कृष्णा दासी, कही ये बात

Sheebu Krishna Dasi Life Story: धर्म परिवर्तन की आपने कई खबरे पढ़ीं और देखी होंगी, लेकिन आज हम आपको धर्म परिवर्तन की ऐसी ख़बर से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे कि पन्नी (पॉलीथिन) में छपी कृष्णा की तस्वीर से प्रेम होने पर धर्म परिवर्तन होता है। आपको भी यकीन नहीं हो रहा होगा, लेकिन यह सच है, आइए जानते हैं जावेद से शीबू कृष्णा दासी बनने की कहानी

वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में जावेद से शीबू कृष्णा दासी ने बताया कि उन्होंने किस तरह से धर्म परिवर्तन किया। शीबू ने बताया कि उनका ताल्लुक दिल्ली से है, नानी का घर बिहार के बेतिया में था। इसलिए वह बेतिया रहते थे। नानी के गुज़र जाने के बाद मामा मामी उन्हें वापिस वह दिल्ली ले आये थे।

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साल 2012 में शीबू कृष्णा दासी (जावेद) कृष्ण भक्ति करते आ रहे हैं, उन्होंने बताया कि नानी से काफी लगाव था इसलिए वह 2007 से 2011 तक नानी के पास रहे। 2011 मई में नानी का देहांत हो गया था। नानी के जाने के बाद मामा-मामी दिल्ली लेकर चले आये। उस वक्त मेरी उम्र 11 साल थी।

11 साल की उम्र में पास में ही एक दुकान पर काम में लगा दिया गया था, चूंकि दिल्ली में बाल मज़दूरी अपराध है इसलिए घर में ही रहकर पैकिंग का काम करता था। इस दौरान 2 हज़ार रुपये हर महीने सैलरी मिलती थी। पैकिंग के लिए जो पन्नी आती थी, उसमें कृष्ण की छवि बनी होती थी।

शीबू ने बताया कि पन्नी में बनी तस्वीर को देखने पर लगता था कि कृष्ण जी मुझे देख रहे हैं। इससे कृष्ण प्रेम बढ़ता गया, फिर कृष्ण भक्ति में डूबते चले गए। इसके बाद शीबू ने मीट, मछली खाना छोड़ते हुए शाकाहारी बन गए।

शाकाहारी बनने के बाद ख़ुद को पूरी तरह से उनकी भक्ती में समर्पित कर दिया। धर्म परिवर्तन किया, मुस्लिम से हिन्दू बनते हुए जावेद से शीबू कृष्ण दासी बन गए। उन्होंने कहा कि हम लोग शुरू से ही हिंदू थे, धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है। अपने धर्म में ही वापसी की है।

शीबू कृष्ण दासी ने कहा कि कृष्ण भक्ति में डूबने के बाद बड़ी मुश्किलों का सामना कर पड़ा। घर वालों के साथ-साथ अन्य लोगों ने भी दबाव बनाया लेकिन कृष्ण भक्ति नहीं छोड़ी। घर वालो ने ढोंगी बाबा के पास झाड़-फूंक करवाया। वहां के बाद साइकेट्रिस्ट पास ले गए।

मनोचिकित्सक के पास ले जाने के बाद डिप्रेशन की दवाई दी जाने लगी, जबकि मैं डिप्रेशन का मरीज़ ही नहीं था। जबरन दवाई खिलाई जाने लगी। जबरदस्ती नमाज़ पढ़ने के लिए ले जाते थे। शीबू कृष्णा ने कहा कि धर्म परिवर्तन कर मौत का डर तो नहीं है, लेकिन यह ख्वाहिश ज़रूर है कि मौत आए तो वृंदावन में आए।

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