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Motivational Story: ‘25 की उम्र,2 बार मुखिया’, बिहार की बेटी पूजा की गांव की गलियों से 'दिल्ली दरबार' तक उड़ान

Motivational Story: कहते हैं अगर जज़्बा हो, तो मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है। यह कहानी है बिहार के गया जिले की एक साधारण सी लड़की की, जिसने अपने हौसले से असाधारण इतिहास रच दिया। उम्र महज 25 साल और पहचान गांव की बेटी पूजा कुमारी। उपलब्धि देश की सबसे युवा, दो बार निर्वाचित मुखिया, जिनकी चमक दिल्ली के लाल किले तक पहुंच चुकी है।

गांव की पगडंडियों से नेतृत्व की ऊंचाइयों तक
पूजा का जीवन किसी प्रेरणादायक फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है। गया जिले के कोंच प्रखंड के छोटे से गांव गरारी की रहने वाली पूजा ने कभी बड़े सपने नहीं देखे लेकिन उनका इरादा बड़ा था, और सोच उससे भी बड़ी। जहां लोग मानते हैं कि बदलाव सत्ता से आता है, पूजा ने सिखाया कि बदलाव सोच से आता है।

Motivational Story

जब वह पहली बार मुखिया बनीं, तो लोग कहते थे, "इतनी छोटी उम्र... कैसे संभालेंगी पंचायत?" लेकिन पूजा ने मुस्कुरा कर कहती थी- "मैंने मां दुर्गा की तरह हर ज़िम्मेदारी को निभाना सीखा है। मुझे किसी 'मुखिया पति' की नहीं, अपने आत्मविश्वास की जरूरत है।"

जहां महिलाएं थीं खामोश, वहां अब वे हैं बदलाव की आवाज़
गरारी पंचायत की महिलाएं कभी अपने हक़ के लिए बोलना नहीं जानती थीं। लेकिन पूजा ने मनरेगा, जीविका समूह और महिला जागरूकता अभियानों के ज़रिए उन्हें न सिर्फ आवाज़ दी, बल्कि आत्मनिर्भरता की राह भी दिखाई। उन्होंने सिर्फ विकास नहीं किया, उन्होंने सोच बदली, माहौल बदला, और परंपरा तोड़ी।

बिहार के इतिहास में पहली बार किसी पंचायत में "महिला आमसभा" हुई और ये पहल भी पूजा की थी। अब पंचायत के फैसलों में महिलाओं की भागीदारी है। अब वे सिर्फ रसोई नहीं, पंचायत की योजनाएं भी संभाल रही हैं।

शिक्षा, संस्कार और संरचना, तीनों को संवारा
स्कूलों की टूटी दीवारें अब मजबूत हैं। हर बच्चे के हाथ में किताब है। स्कूलों में अब पोषणयुक्त भोजन बन रहा है। पंचायत में बाल सभा चलती है, जहां बच्चे सीखते हैं कि नशा नहीं, ज्ञान ज़रूरी है। पूजा ने उन युवाओं के घर भी दस्तक दी, जो नशे में उलझ चुके थे। "ये लड़के हमारे गांव का भविष्य हैं," कहकर उन्होंने उन्हें नशा मुक्ति केंद्र तक पहुंचाया।

सम्मान नहीं, विश्वास की जीत है यह
आज जब देश स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले पर गर्व से तिरंगा लहराएगा, उस समारोह में पूजा कुमारी विशेष अतिथि होंगी। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर मिला है। लेकिन पूजा कहती हैं, "ये सिर्फ मेरा सम्मान नहीं, मेरे गांव का, मेरी पंचायत की हर महिला का, और उस हर बेटी का है जो सपने देखती है।"

अगर सोच बदल गई, तो सूरत बदलने में देर नहीं लगती
पूजा कुमारी की कहानी हमें यह सिखाती है कि नेतृत्व उम्र से नहीं, नीयत और नीति से आता है। अगर गांव की एक बेटी अपने हौसलों से पंचायत की तस्वीर बदल सकती है, तो देश की बेटियां हर मोर्चे पर कमाल कर सकती हैं। वे सिर्फ मुखिया नहीं हैं, वो एक सोच हैं, एक आंदोलन हैं, और हर उस लड़की की उम्मीद हैं जो कहती है, "मुझे भी कुछ करना है।" याद रखिए "सपने देखने वालों की नहीं, उन्हें पूरा करने वालों की दुनिया बदलती है।"

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