Motivational Story: आर्थिक तंगी से जूझ रही थी ज़िंदगी, उत्तम के एक फैसले ने बदली तस्वीर

Motivational Story: इंसान की ज़िंदगी में परेशानियों का सिलसिला लगा रहता है, लेकिन जो इन चुनौतियों से जूझते हुए आगे निकलता है, कामयाब ज़रूर होता है। कुछ इसी तरह की संघर्ष भरी कहानी उत्तम कुमार की है।

Motivational Story Nalanda Uttam Kumar Animal And Bird Firm Bussiness Story

Motivational Story: इंसान की जिंदगी में परेशानियां लगी रहती हैं, लेकिन जो इनसे मुकाबला करना सीख लेता है। वह कामयाब ज़रूर होता है। कुछ इसी तरह की कहानी पटना जिला के बेलछी गांव के रहने वाले उत्तम कुमार की है। उत्तम कुमार ने के माता-पिता ने बचपन में ही उन्हें पढ़ाई के सिलसिले में नालंदा जिला हरनौत में रखवा दिया था। अब उत्त्म अपनी एक अलग पहचान बनाने में जुट गए हैं। उत्तम कुमार ने ना सिर्फ मेहनत के बल पर खुद की बेरोजगारी दूर की, बल्कि अपने परिवार के लोगों को भी रोज़गार दिया। उन्होंने मज़दूरी कर रहे अपने पिता और बड़े भाई को भी अपने साथ रोज़गार दिया है।

आर्थिक तंगी से जूझ रहा था परिवार

आर्थिक तंगी से जूझ रहा था परिवार

उत्तम कुमार के पिता मनोज कुमार सिंह खुद परिवार का गुज़ारा करने के लिए दिल्ली में मज़दूरी करते थे। उनका बड़ा बेटा संदीप भी उन्हीं के साथ रहकर, काम में हाथ बंटाता था। उत्तम के परिवार के पास जमा-पूंजी के नाम पर बेलछी (पटना) में सिर्फ मकान है। परिवार की की माली हालत खराब होने की वजह से उत्तम को तालीम हासिल करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। घर के सबसे छोटे बेटे उत्तम ने आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए साइकिल मरम्मत की दुकान खोली पड़ी। इसी से जुटाए रुपयों से उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की।

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    मेहनत कर अपनी अलग पहचान बना रहे उत्तम
    कोरोना काल में रोज़गार पर लगा ग्रहण

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    प्लस टू करने के बाद उन्होंने कल्याण बिगहा इंडोर शूटिंग रेंज में ट्रेनिंग हासिल की, प्रैक्टिस के लिए एयर पिस्टल खरीदी। वहीं चेरन में रहकर बच्चों को निशानेबाजी भी सिखाने लगे। रोजगार की खोज में उत्तम ने कृषि विज्ञान केंद्र के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ संजीव रंजन से मुलाक़ात की। डॉ. संजीव रंजन ने पशु और पक्षी पालन की ट्रेनिंग में उत्तम कुमार में को शामिल किया। वहां से ट्रेनिंग लेने के बाद उत्तम ने चेरन में छोटे स्तर पर बकरी और मुर्गी पालन शुरू किया। सब कुछ ठीक ही चल रहा था कि कोरोना महामारी ने की वजह से रोजगार के साधनों पर ग्रहण लग गया। उत्तम कुमार ने हिम्मत नहीं हारी, हालात नॉर्मल होने का इंतज़ार किया। इसके बाद उन्होंने सबनहुआ-बबनबीघा के पास कल्याण बिगहा में कुछ जमीन किराये पर लेकर पशु-पक्षी पालन शुरू किया।

    किराये पर ज़मीन लेकर की शुरुआत

    किराये पर ज़मीन लेकर की शुरुआत

    उत्तम की लगन देखकर केविके के ज़रिए उन्हें वैज्ञानिक ने मुर्गीपालन के लिए शेड और चुजे दिलवाये। इसके बाद उन्होंने कामयाबी की सीढीयों पर चढ़ना शुरू कर दिया। आज की तारीख में उनके फर्म में एक हजार के करीब मुर्गियां हैं, लगभग उतने ही बत्तख, बटेर, हंस, कबूतर, बकरी और खरगोश हैं। दस कट्ठे फर्म के अलावा पांच कट्ठे में पशुओं को खिलाने के लिए चारा उपजाते हैं। उत्तम कुमार ने पचास हज़ार रुपये सालाना किराए पर फर्म की जमीन ली है। फर्म की देखरेख में लोगों की जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपने माता-पिता और बड़े भाई को यही बुला लिया। सभी लोग फर्म में ही रहकर पशु-पक्षियों की देखरेख करते हैं। इसी के ज़रिए जमीन का किराया और परिवार का पालन-पोषण का खर्च जुट रहा है।

    उत्तम के फर्म की हो रही तारीफ

    उत्तम के फर्म की हो रही तारीफ

    उत्तम ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र से शेड और चूजों के अलावा किसी प्रकार की सहायता सरकार या किसी विभाग से नहीं मिली। चूजा उत्पादन के लिए मशीन भी लगा रखी है। फर्म से पशु-पक्षियों के मल-मूत्र के रुप में निकले अवशिष्ट का खेती में इस्तेमाल करते हैं। इसके उपयोग से खाद या कीटनाशी की जरुरत नहीं होती है। वहीं किसानों के अतिरिक्त अवशिष्ट की डिमांड भी पूरी करते हैं। इसके अलावा तालाब में बत्तखों के अवशिष्ट से मछलियों को भोजन मिल जाता है। तालाब का पानी गंदा होने पर उस पानी से खेत की सिंचाई करते बैं। इससे मिट्टी भी उपजाऊ होती है। डॉ संजीव रंजन (पशु चिकित्सा विशेषज्ञ) ने उत्तम कुमार के फर्म को समन्वित कृषि प्रणाली का बेहतरीन नमूना बताया है।

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