बिहार: बाहुबली अनंत सिंह अब नहीं रहे विधायक, जानिए कैसे लगा सियासी सफर पर विराम ?
पवन कुमार (प्रभारी सचिव, बिहार विधानसभा) विधानसभा सदस्यता खत्म करने के बाबत आदेश जारी कर दिया है।
पटना, 15 जुलाई 2022। बिहार में बाहुबली नेताओं के फ़हरिस्त लंबी है, कई बाहुबली नेताओं का सियासी सफ़र सज़ायाफ़्ता होने के बाद थम गया है। वहीं अब पांच बार से विधायक रहे अनंत सिंह के सियासी सफर पर भी रुक गया है। एमपी एमएलए कोर्ट ने बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह को 10 साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने जिस दिन फ़ैसला सुनाया था उस दिन से ही अनंत सिंह की विधायकी ख़तरे में पड़ गई थी। विधानसभा सचिवालय ने एक आदेश जारी करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के नेता अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता खत्म कर दिया है।
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बाहुबली अनंत सिंह अब नहीं रहे विधायक
पवन कुमार (प्रभारी सचिव, बिहार विधानसभा) विधानसभा सदस्यता खत्म करने के बाबत आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि एमपी एमएलए कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद दोष साबित होने की तारीख से विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता ख़त्म की जाती है। ग़ौरतलब है कि बिहार विधानसभा सचिवालय की तरफ़ जारी आदेश साफ़ कर दिया गया है कि सदस्यों की सूची को संशोधित समझा जाए। आपको बता दें कि अनंत सिंह 42 सालों का राजनीतिक अनुभव रहा है। अनंत सिंह पहली बार 1980 में सुर्खियों में आए थे। जब उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार श्याम सुंदर धीरज को मोकामा विधानसभा सीट से जीत दर्ज करवाने में अहम किरदार निभाया था। अनंत सिंह पहली बार 2005 में विधायक बने थे।

अनंत सिंह का राजनीतिक कैरियर तबाह
अनंत सिंह के सियासी सफर पर ग्रहण किस तरह से लगा और कैसे एक क्लिप ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। आइए विस्तार से जानते हैं। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को घर में एके-47 और हैंड ग्रेनेड रखने के मामले में एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 10 साल की सज़ा सुनाई है। दोषी क़रार होने के साथ अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता भी ख़त्म हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की टिकट पर अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। सबकुछ तो ठीक ही चल रहा था लेकिन एक ऑडियो क्लिप ने अनंत सिंह के राजनीतिक कैरियर को ही तबाह कर दिया।

तीन साल पुराने मामले ने बढ़ा दी मुश्किलें
यह मामला क़रीब तीन साल पुराना है, बाढ़ अनुमंडल की पुलिस ने 14 जुलाई 2019 में तीन बदमाशों को पंडारक थाना क्षेत्र से अधमरे हालत में गिरफ्तार किया था। उनके पास से हथियार भी बरामद हुए थे। तफ़्तीश के दौरान एक बदमाश के पास से मोबाइल भी मिला जिसमे आडियो क्लिप थी। ऑडियो क्लिप में भोला सिंह और उसके भाई मुकेश सिंह की हत्या की साजिश रचते हुए अनंत सिंह की आवाज़ थी। ग़ौरतलब है कि उस वक्त अनंत सिंह जेल में बंद थे। अनंत सिंह पर पुटुस हत्याकांड और सरकारी आवास से मैगजीन मिलने का आरोप था। इस वजह से कोई ठोस सबूत नहीं मिल पा रहा था।

सियासी सफ़र पर लग गया ग्रहण
अनंत सिंह के आवाज की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई, जिसके बाद से ही पुलिस ने उनपर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। इस मामले मे तीन शूटर गोलू कुमार( बुद्धा कालोनी थाना क्षेत्र चकारम निवासी) छोटू (दुजरा निवासी) और छोटू उर्फ राजीव (मैनपुरा निवासी) को पुलिस ने गिरफ़्तार किया। इन सबके आलावा अनंत सिंह, लल्लू मुखिया, रणवीर यादव, विकास सिंह, उदय यादव और अन्य लोगों के ख़िलाफ 75/19 मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद से ही अनंत सिंह की मुश्किले बढ़ती चली गईं और अंजाम यह हुआ की उनका सियासी सफर रुक ही गया।
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