Bihar Politics: BJP छोड़कर जनता की अदालत में पहुंचे Manish Kashyap, क्या बदल सकता है बिहार का सियासी समीकरण?
Manish Kashyap Resigns From BJP: बिहार की राजनीति में एक बार फिर से संभावनाओं की सियासत को हवा मिल गई है। मशहूर युट्यूबर में से एक मनिष कश्यप ने अधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से इस्तीफा दे दिया है। मनीष कश्यप के इस्तीफ़ा देने के बाद से ही चुनावी प्रभाव को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया।वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य पर भी खुलकर चर्चा की। आइए जानते हैं क्या कुछ कहा?
वन इंडिया हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार इंज़माम वहीदी से ख़ास बातचीत में मनीष कश्यप ने भविष्य की सियासत पर बेबाकी से अपनी बात रखी। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले से ताल्लुक रखने वाले मनीष कश्यप ने सोशल मीडिया के ज़रिए "रियल रिपोर्टिंग" और "ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग" से अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने जनहित के कई ऐसे मुद्दों को उठाया है, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया ने कभी ध्यान ही नहीं दिया।

मनीष कश्यप ने बताया कि यह उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी कि, वह अपने चाहने वाले और बिहार की जनता से बिना पूछे भाजपा में शामिल हुए। अब उन्हें इस ग़लती का अहसास भी है और उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात के लिए अपने समर्थक और बिहार की जनता से माफी भी मांगी है।
मनीष कश्यप ने भाजपा में शामिल होने के पीछे की वजह भी बताई, उन्होंने सोचा बिहार की जनता को क्या चाहिए, उन्हें मूलभूत सुविधा (जैसे- स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार) मिले। अपनी सोशल मीडिया रिपोर्टिंग के ज़रिए इस बात को बेबाक अंदाज़ में उठाते रहे और ख़बर चलने पर थोड़ा बहुत व्यवस्था में सुधार भी हो जाता था। लेकिन मनीष ने सोचा की यह अस्थाई है, इसका स्थाई हल निकालना चाहिए।
सिस्टम को सुधारने के लिए उसका हिस्सा बनना ज़रूरी है, इसलिए सोचा की केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार है, इस पार्टी में शामिल होकर आसानी से व्यवस्था में परिवर्तन लाकर प्रदेश की नई तस्वीर बना सकता हूं, इसलिए भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुआ ताकि बिहार की जनता को मूलभूत सुविधाएं दिलवा सकूं।
मनीष ने कहा कि भाजपा में शामिल होने के बाद मैंने अपने स्तर से बिहार के हालात को सुधारने के कई प्रयास किए, लचर व्यवस्था की वजह से ही मेरे साथ PMCH में बदसलूकी हुई। मैं समझ गया कि सारा खेल सिर्फ़ वोट बैंक की सियासत के लिए है जनता के हित की बीजेपी में बात नहीं हो रही है। मुझे पद और पार्टी का लालच नहीं सिर्फ जनता के हित का सोचना है, इसलिए मैंने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया।
मनीष कश्यप ने कहा कि मैंने पूरा तरह से जनता की सेवा के लिए खुद को समर्पित कर दिया है। चाहने वालो के साथ चर्चा के बाद निष्कर्ष निकला की भाजपा में जाकर बहुत बड़ी गलती कर दी, अब पार्टी से इस्तीफ़ा दे दीजिए। इसलिए कमल से किनारा कर लिया। अब यह जनता ही तय करेगी कि मैं किसी बैनर तले चुनाव लड़ूं या फिर अपना संगठन बनाकर, या नहीं तो स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ूं। जनता के फ़ैसले को मैं मानूंगा, उनके बिना मशवरे के कोई भी राजनीतिक फ़ैसला नहीं लूंगा।
सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि युवा मतदाताओं में मौजूदा सरकार को लेकर काफी असंतोष है। मनीष कश्यप का सबसे बड़ा समर्थन का आधार बेरोजगार, शिक्षित युवा और मज़दूर हैं। सरकारी भर्तियों में देरी और पेपर लीक जैसी समस्याओं के कारण यह वर्ग पहले से ही बिहार की डबव इंजन सरकार से नाराज़ है। जो कि आगामी चुनाव में मौजूद सरकार के लिए ख़तरे की घंटी है।
रिपोर्टिंग की वजह से बिहार के लगभग सभी जिलों में मनीष के काफी समर्थक हैं। मनीष के भाजपा से इस्तीफ़ा देने के बाद इन क्षेत्रों में भाजपा के पारंपरिक मतदाता भी पार्टी से किनारा कर मनीष के साथ आ सकते हैं। मनीष एक स्वतंत्र डिजिटल चेहरा हैं, वह न तो किसी पार्टी से बंधे हैं और न ही किसी कॉर्पोरेट से। उनका सीधा संवाद जनता से जुड़ा है, जो किसी भी राजनीतिक दल के नैरेटिव को चुनौती दे सकता है।
मनीष कश्यप ने अपनी बात दोहराते कहा कि मेरी ताक़त बिहार की जनता है, उनके फ़ैसले से ही मैं कोई भी राजनीतिक क़दम उठाऊंगा। इस्तीफ़ा भी जनता के फ़ैसले पर दिया और अब आगे चुनाव किसी पार्टी से लड़ना है या स्वतंत्र लड़ना है यह भी जनता तय करेगी। जनता के बीच रोज़ाना जा रहे हैं, आने वाले कुछ दिनों में स्थिती साफ हो जाएगी की पार्टी या निर्दलीय चुनाव लड़ना है।












Click it and Unblock the Notifications