किस जाति से हैं मनीष कश्यप? चनपटिया से लड़ रहे हैं चुनाव, इंजीनियर से पत्रकार बनने वाले यूट्यूबर की कहानी
Bihar Election 2025 Manish Kashyap: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है। इस बार सुर्खियों में हैं यूट्यूबर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट मनीष कश्यप, जो अब चनपटिया सीट से चुनावी मैदान में हैं। कभी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाने वाले मनीष, अब प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज के उम्मीदवार बन चुके हैं।
18 अक्टूबर को उन्होंने पश्चिम चंपारण की चनपटिया सीट से अपना नामांकन दाखिल किया, जहां भारी संख्या में समर्थक मौजूद थे। नामांकन के बाद मनीष ने जोश में कहा, "विधायक बनते ही सात दिन में अंचल ब्लॉक से भ्रष्टाचार मिटा दूंगा, बंद चीनी मिलों को चालू कराऊंगा, स्टील प्लांट फिर से शुरू होगा और पांच साल में नया चनपटिया बन जाएगा।" वनइंडिया हिंदी की खास सीरिज "जाति की पाति" में आज हम मनीष कश्यप की जाति के बारे में जानेंगे, साथ में उनके घर-परिवार और करियर के बारे में जानेंगे।

🔹मनीष कश्यप की जाति और पारिवारिक पृष्ठभूमि (Manish Kashyap caste)
मनीष कश्यप का असली नाम त्रिपुरारी कुमार तिवारी है। उनका जन्म पश्चिमी चंपारण जिले के डूमरी महनवा गांव में हुआ। उनके पिता उदित कुमार तिवारी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। मनीष की जाति को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते हैं, कुछ रिपोर्टें उन्हें भूमिहार बताती हैं, तो कुछ उन्हें ब्राह्मण कहती हैं। हालांकि खुद मनीष ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे श्रीकृष्ण के वंशज हैं, जिससे उनकी जाति को लेकर रहस्य और गहरा हो गया। हालांकि ज्यादातर रिपोर्ट में मनीष कश्यप की जाति भूमिहार बताई गई है। इतना तो तय है कि वो भूमिहार या ब्राह्मण से ही किसी एक जाति से हैं।
🔹 इंजीनियरिंग से जन पत्रकारिता की राह
मनीष कश्यप ने महाराष्ट्र के पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। पढ़ाई खत्म करने के बाद जब उनके साथियों ने नौकरी के रास्ते चुने, तब उन्होंने गांव लौटकर पत्रकारिता की राह पकड़ी। यहीं से शुरू हुआ "Manish Kashyap Son of Bihar" नामक यूट्यूब चैनल, जो आज करोड़ों सब्सक्राइबर्स तक पहुंच चुका है।
मनीष का अंदाज़ आम पत्रकारों से बिल्कुल अलग था। वह भ्रष्टाचार, सरकारी उदासीनता और जनता की समस्याओं को अपनी कैमरा रिपोर्टिंग के ज़रिए सीधे सरकार तक पहुंचाने लगे। उनके वीडियो वायरल हुए, और धीरे-धीरे वह 'सोन ऑफ बिहार' के नाम से मशहूर हो गए।
🔹 विवादों में भी घिर चुके हैं मनीष कश्यप
साल 2019 में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में लगी किंग एडवर्ड-VII की प्रतिमा तोड़ने के आरोप में मनीष सुर्खियों में आए। कई बार उनकी रिपोर्टिंग को लेकर विवाद हुए, लेकिन उन्होंने जनता के मुद्दों से कभी पीछे नहीं हटे। सोशल मीडिया पर मनीष के यूट्यूब, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर करोड़ों फॉलोअर्स हैं।
🔹 BJP से जन सुराज तक का सफर
2024 लोकसभा चुनाव से पहले मनीष कश्यप भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए थे, लेकिन पीएमसीएच विवाद के दौरान पार्टी से नाराज़ होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। जुलाई 2025 में वे प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी से जुड़ गए और अब उसी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं।
पार्टी के टिकट बंटवारे के वक्त चनपटिया सीट पर काफी चर्चा रही, और आखिरकार प्रशांत किशोर ने मनीष पर भरोसा जताया। उनका मुकाबला बीजेपी विधायक उमाकांत सिंह और कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक रंजन से होगा।
🔹 जनता के बीच अपील और राजनीतिक संदेश
नामांकन के दौरान मनीष कश्यप ने कहा - "यह सिर्फ़ चुनाव नहीं, यह जनता की आवाज़ को विधान भवन तक पहुंचाने की लड़ाई है।" उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि "आपका प्यार और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।"
उनकी छवि एक ऐसे युवा नेता की बन रही है, जो न भ्रष्टाचार से डरता है, न सियासत की चालों से। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या सोशल मीडिया की लोकप्रियता को वोटों में बदला जा सकेगा?
🔹 2020 की हार और 2025 की उम्मीदें
2020 में मनीष कश्यप ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चनपटिया से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इस बार जन सुराज के टिकट पर उनकी तैयारी पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि "सोन ऑफ बिहार" के नाम से प्रसिद्ध यह चेहरा, 2025 में क्या बिहार विधानसभा तक पहुंच पाता है या नहीं।












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