Matuknath: जूली संग इश्क लड़ाने वाले मटुकनाथ खोज रहे हैं जीवन संगिनी, FB पर लिखा-'आवश्यकता है बुढ़िया की'
Matuknath Choudhary Story: 'लव गुरु' मटुकनाथ एक बार फिर सच्चे प्रेम की तलाश में हैं। 71 वर्षीय मटुकनाथ (Matuknath Choudhary)को उम्र की इस दहलीज पर अकेलापन खाए जा रहा है, वो तन्हाई से इस कदर परेशान हैं कि उन्होंने अब जीवन संगिनी की तलाश शुरू कर दी है।
उन्होंने बकायदा इसके लिए एक सोशल मीडिया पोस्ट डाली है, जिसमें उन्होंने ये बताया कि 'उन्हें किस तरह की लाइफ पार्टनर चाहिए।' हिंदी के प्रोफेसर रहे मटुकनाथ ने फेसबुक पर अपनी पोस्ट में निम्नलिखित बात लिखी है...

आवश्यकता
'एक पढ़े-लिखे, समझदार इकहत्तर वर्षीय बूढ़े किसान को पढ़ी -लिखी, समझदार 50-60 के बीच की बुढ़िया चाहिए। बहुत पसंद आ जाने पर उमर में ढील दी जायेगी। शर्त एक ही है कि वासना रहित प्यार की लेन -देन में सक्षम हो। प्यार, पुस्तक और यात्रा में दिलचस्पी हो। पर निंदा से दूर रहे। जब भी किसी की चर्चा करे तो उसके गुणों की ही करे। सादा और स्वादिष्ट भोजन बनाने में निपुण हो। पुरुषों से सहयोग लेने की कला में पटु हो। ध्यान में दिलचस्पी हो तो कहना ही क्या ! हंसमुख हो। निरर्थक बातें न करती हो। धन -लोभी न हो। सज्जनों के प्रति प्रेम और दुर्जनों के प्रति क्रोध से भरी हो। बूढ़े ने बुढ़िया से इतने गुणों की अपेक्षा इसलिए की है, क्योंकि ये गुण उसमें भी विद्यमान हैं।'
सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई
मटुकनाथ की ये पोस्ट जैसे ही सामने आई सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई और एक बार फिर से मटुकनाथ और उनकी छात्रा जूली के प्यार की कहानी लोगों के जेहन में ताजा हो गईं। लोगों ने इस पोस्ट पर काफी मजे भी लिए हैं और कुछ लोग मटुकनाथ की आलोचना भी कर रहे हैं।
वानप्रस्थ की बेला में जीवन संगिनी की खोज?
एक यूजर ने लिखा है कि -'वानप्रस्थ की बेला में जीवन संगिनी की खोज? क्यों तलाशते हैं एक अतिरिक्त बोझ? जो जीवन के इतने वर्षों में न मिला जिसका अभाव अभी भी सालता है हे मित्र तूं ऐसी आकांक्षा क्यों पालता है ?'
'बूढ़े को अपने गुणों का बखान करना था'
तो एक यूजर ने लिखा कि 'अगर बुढ़िया के गुणों को देखा जाय तो हमे लगता है कि बूढ़े को बुढ़िया तो नहीं कतई नहीं चाहिए और यह कहानी इसीलिए गढ़ी गई है ताकि बूढ़े को अपने गुणों का बखान करना था 😅 और कहानी में ये भी देख पाया गया है कि बूढ़े को अभी भी अपने से 10 २० साल छोटी बुढ़िया ही चाहिए मतलब मिजाज अभी भी रसिक है जो आज से कई साल पहले था 🙂 गुस्ताखी माफ हो।'
छात्रा जूली को पढ़ाते-पढ़ाते प्यार करने लगे थे मटुकनाथ
दरअसल अपने आप को 'लव गुरु' कहने वाले मटुकनाथ चौधरी साल 2006 में उस वक्त नेशनल न्यूज बन गए थे, जब वो अपनी छात्रा जूली को पढ़ाते-पढ़ाते प्यार करने लगे थे और दोनों के रिश्तों की सच्चाई लोगों के सामने आई थी।
ना की परिवार की चिंता, ना ही समाज का लिहाज
जूली के प्रेम में दीवाने मटुकनाथ ने ना तो उस वक्त अपने परिवार की चिंता की और ना ही समाज का कोई लिहाज किया। मटुकनाथ और जूली दोनों की काफी बेइज्जती भी हुई लेकिन अपने प्रेम के लिए दोनों ने दुनिया से हर दुश्मनी मोल ले ली, मटुकनाथ ने खुले आम कहा था कि 'उनका और जूली का प्रेम राधा-कृष्ण वाला है, जिसमें कुछ भी गलत नहीं है।'
मटुकनाथ को लोग 'लव गुरु' कहने लग गए
दोनों ने खुले दिल से अपने रिश्ते को स्वीकारा और लोगों को प्रेम के टिप्स देने लग गए थे, इसी वजह से मटुकनाथ को लोग 'लव गुरु' कहने लग गए।'
मटुकनाथ और जूली दोनों ही लाइमलाइट से दूर हो गए
लेकिन कुछ वक्त बाद मटुकनाथ और जूली दोनों ही लाइमलाइट से दूर हो गए, दोनों के परिवारवालों ने इनको कभी नहीं स्वीकारा और सारे रिश्ते तोड़ लिए लेकिन मटुकनाथ-जूली को कोई फर्क नहीं पड़ा और ये दोनों एक साथ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते गए लेकिन साल 2020 में अचानक से जूली की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वो बहुत ज्यादा कमजोर दिख रही थीं।
साल 2015 से मटुकनाथ और जूली साथ नहीं है
जिसके बाद दोनों के बारे में पता चला कि 'जूली और मटुकनाथ अब साथ नहीं हैं, जूली वेस्टइंडीज में एक आध्यात्मिक गुरु के आश्रम में रहती हैं और साल 2015 से वो मटुकनाथ के साथ नहीं हैं।' जिसके बाद मटुकनाथ पर जूली को छोड़ने का आरोप लगा था।
'जूली को अब सांसरिक चीजों में रूचि नहीं है'
तब मटुकनाथ ने एक इंटरव्यू में अपने रिश्ते का सच बताया था। उन्होंने कहा था कि 'हम साथ में काफी खुश थे, साल 2014 से ही जूली का रूझान आध्यात्म की ओर हो गया था, सांसरिक चीजों में अब उसकी कोई रूचि नहीं है। वो साल 2015 में ही मुझे छोड़कर वेस्टइंडीज चली गई। मुझे पता चला कि वो वहां बीमार हैं तो मैं वहां गया भी और चार महीने रहकर भी आया लेकिन वो देश मेरा नहीं इसलिए मन नहीं लगा और मैं वापस अपने देश में आ गया, मैंने उसे नहीं छोड़ा और ना ही छोड़ सकता हूं।'
'मटुकनाथ और जूली साथ तो रहे लेकिन दोनों ने शादी नहीं की'
'मेरे परिवार वाले मेरा त्याग कर चुके हैं इसलिए घर भी नहीं जा सकता हूं और इस वक्त एकदम तन्हा हूं। मैं आज भी जूली के लिए कविताएं लिखता हूं।' आपको बता दें कि दुनिया से अपने प्यार के लिए दुश्मनी मोलने वाले मटुकनाथ और जूली साथ तो रहे लेकिन दोनों ने शादी नहीं की।
कोरचक्का गांव में ओशो इंटरनेशनल स्कूल चला रहे हैं मटुकनाथ
मटुकनाथ ने अक्टूबर 2018 में सेवानिवृत्ति ले ली थी, इन दिनों वो कोरचक्का गांव में ओशो इंटरनेशनल स्कूल चला रहे हैं। देखते हैं उम्र के इस पड़ाव पर मटुकनाथ को उनकी मनचाही जीवन संगिनी मिलती है या नहीं।'












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