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Lok Sabha Election: बिहार एनडीए में सीटों के बंटवारे से कौन फायदे में, किसे हुआ ज्यादा नुकसान? पूरी बात समझिए

Bihar Lok Sabha Chuvav 2024: बिहार में एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर जो बातें खबरों के माध्यम से कई दिनों से सामने आ रही थी, वह सच साबित हो गई है।

सीटों के बंटवारे से यह भी साफ हो गया है कि बिहार में एनडीए में अब बीजेपी पूरी तरह से ड्राइविंग सीट पर आ चुकी है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनका जदयू किसी भी तरह से इस कुनबे पर कंट्रोल की स्थिति में नहीं दिख रहा है।

bihar nda seat sharing

बिहार एनडीए में हुआ सीटों का बंटवारा
बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर एनडीए में जो बंटवारा हुआ है, उसके मुताबिक बीजेपी 2019 की तरह 17 सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी। वहीं जेडीयू 16 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। चिराग पासवान की अगुवाई वाली एलजेपी (पासवान) को 5 सीटें मिली हैं।

इनके अलावा महागठबंधन से अबकी बार एनडीए का हिस्सा बनी जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चो के लिए 1-1 सीट एडजस्ट की गई है।

बिहार में बीजेपी किन 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी?
1) पश्चिम चंपारण
2) पूर्वी चंपारण
3) औरंगाबाद
4) मधुबनी
5) अररिया
6) दरभंगा
7) मुजफ्फरपुर
8) महाराजगंज
9) सारण
10) उजियारपुर
11) बेगूसराय
12) नवादा
13) पटना साहिब
14) पाटलिपुत्र
15) आरा
16) बक्सर
17) सासाराम

जेडीयू को मिली 16 सीटें कौन हैं?
18) वाल्मीकि नगर
19) सीतामढ़ी
20) झंझारपुर
21) सुपौल
22) किशनगंज
23) कटिहार
24) पूर्णिया
25) मधेपुरा
26) गोपालगंज
27) सीवान
28) भागलपुर
29) बांका
30) मुंगेर
31) नालंदा
32) जहानाबाद
33) शिवहर

एलजेपी (रामविलास) को मिलीं 5 सीटें
34) वैशाली
35) हाजीपुर
36) समस्तीपुर
37) खगड़िया
38) जमुई

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को 1 सीट
39) गया

राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी 1 सीट
40) काराकाट

जेडीयू-एलजेपी को एक-एक सीटों का नुकसान
अगर 2019 के हिसाब से देखें तो इस बंटवारे में दो नए सहयोगियों को फिट करने के लिए जेडीयू और एलजेपी को अपनी एक-एक सीटें गंवानी पड़ी हैं। गया और काराकाट दोनों लोकसभा सीट पर पिछली बार जेडीयू जीता था। लेकिन, अब ये सीटें उसके हाथ से निकल गई है।

जेडीयू कोटे से निकली गया और काराकाट सीट
गया (सुरक्षित) सीट से पिछली बार जेडीयू के विजय कुमार 49% वोट लाकर जीते थे। वहीं काराकाट में पार्टी के महाबली सिंह को 46% वोट आए थे और उनकी जीत हुई थी।

तब यहां उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन के साझा उम्मीदवार थे और उनकी पार्टी बीएलएसपी को महज 36% वोट आए थे और वह चुनाव हार गए थे।

भाजपा ने शिवहर सीट जेडीयू के लिए छोड़ी
भाजपा ने इन दोनों सीटों के बदले जेडीयू को एक नई सीट शिवहर दी है, जहां पिछली बार भाजपा की रमा देवी को करीब 61% वोट मिले थे। वहीं जेडीयू के खाते में ही किशनगंज सीट भी रह गई है, जिस एकमात्र सीट से महागठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस प्रत्याशी को जीत मिली थी।

बीजेपी को हाथ लगी एलजेपी की नवादा सीट
बीजेपी ने शिवहर सीट के बदले एलजेपी की नवादा सीट से अपना कोटा पूरा किया है। नवादा में एलजेपी उम्मीदवार चंदन सिंह को 2019 में 52% से अधिक वोट मिले थे। भाजपा पिछली बार भी 17 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और सभी सीटें जीत गई थी।

पशुपति पारस रह गए खाली हाथ
एनडीए में सीट बंटवारे में सबसे बड़ा नुकसान चिराग पासवान के चाचा पशुपति की अगुवाई वाली एलजेपी के गुट को हुआ है। पिछली बार एलजेपी जो 6 सीटें जीती थी, उनमें से जमुई छोड़कर बाकी पर उन्हीं के गुट के सांसद थे।

लेकिन, वो सारी सीटें हाजीपुर (हाजीपुर से पशुपति पारस अभी सांसद हैं) समेत चिराग के गुट को मिल गई हैं। वहीं बिहार बीजेपी के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि पशुपति पास के साथ अभी भी बातचीत चल रही है।

जिस तरह से बीजेपी ने चाचा पारस की जगह भतीजे चिराग को गठबंधन में तरजीह दी है, वह भी इशारा है कि नीतीश अब एनडीए में उस भूमिका में नहीं रह गए हैं, जो पिछली बार गठबंधन तोड़ने से पहले हुआ करते थे।

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