Lalu Yadav और आंबेडकर फोटो विवाद बिहार में दलित समीकरण साध रही BJP के लिए बना मौका, समझें कैसे

Lalu Yadav Ambedkar photo controversy: बिहार की राजनीति में दलित वोट बैंक चुनावी जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भी इस समुदाय के वोट अहम भागीदारी निभाने वाले हैं। कई दशकों तक दलितों का वोट पारंपरिक तौर पर कांग्रेस को मिलता रहा था। इसके बाद 90 के दशक में यह आरजेडी (RJD) की ओर शिफ्ट हो गया। हालांकि, नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद अति पिछड़ा वोट नीतीश कुमार के साथ जुड़ गया है। अब आंबेडकर फोटो विवाद से एक बार फिर दलित वोट बैंक को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। बीजेपी ने इसे अपने लिए मौका समझते हुए अपने समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं।

Lalu Yadav Ambedkar photo controversy पूरा मामला

दरअसल, लालू यादव के जन्मदिन के मौके पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें आरजेडी प्रमुख को एक कार्यकर्ता ने तोहफे में आंबेडकर की फोटो दी थी। फोटो को लालू ने हाथ में नहीं लिया और उनके पैरों के पास ही तस्वीर थी और फिर उसे कोने में रख दिया है। इस घटना को भाजपा ने मुद्दा बनाकर आरजेडी पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि लालू यादव और उनकी पार्टी की सोच दलित विरोधी है और यह उनका असली चेहरा उजागर करता है।

Lalu Yadav

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राजद की ओर से सफाई दी गई कि कार्यक्रम के मंच पर जगह कम थी। बहुत से लोग लगातार तोहफे और फूल लेकर आ रहे थे इसलिए तस्वीर को हटाया गया। इसमें किसी प्रकार का अनादर नहीं था। हालांकि, आरजेडी की सफाई के बावजूद ऐसा लग रहा है कि भाजपा इस घटना को दलित सम्मान और आंबेडकर विरासत से जोड़कर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में सफल रही है। पटना में एक पोस्टर भी लगाया गया है जिसमें लालू यादव से माफी की मांग की गई है।

बीजेपी दलित समुदाय पर मजबूत पकड़ बनाने में जुटी

पिछले एक साल में भाजपा ने बिहार में पासवान समुदाय, महादलित वर्ग, और अन्य दलित समूहों को साधने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। इसमें पासवान समुदाय से आने वाले चिराग पासवान को सक्रिय रूप से साथ लेने से लेकर अंबेडकर जयंती जैसे कार्यक्रमों को जोरशोर से मनाना शामिल है। साथ ही, दलित युवाओं को संगठित कर भाजपा ने दलित राजनीति की एक नई धारा खड़ी की है। बीजेपी के कदमों को देखते हुए कांग्रेस ने भी दलित समुदाय से आने वाले राजेश कुमार को अध्यक्ष बनाया है। आरजेडी ने भी मंगनी लाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।

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इसके उलट आरजेडी को लेकर दलितों में एक असमंजस की स्थिति बनती दिख रही है। नीतीश कुमार के NDA में लौटने के बाद जेडीयू और बीजेपी के बीच एक सामाजिक समीकरण आधारित गठजोड़ दिखाई देने लगा है। इसमें दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को खास संदेश देने की कोशिश कर रहा है। अभी के हालात में ऐसा लग रहा है कि लालू यादव और अंबेडकर की तस्वीर को लेकर उपजा विवाद सिर्फ एक प्रतीक भर नहीं है। आरजेडी की सफाई काफी नहीं है और बीजेपी इस मुद्दे को लपकने में बिल्कुल नहीं चूकी है।

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