Bihar Chunav 2025: चुनावी साल में अंबेडकर के अपमान पर नोटिस! क्या लालू यादव को ले डूबेगा ये वीडियो?
Bihar Election 2025 (Lalu Yadav): बिहार की राजनीति इन दिनों फिर एक बार गरमा गई है। चुनावी माहौल के बीच राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने दलित समुदाय के बीच नाराजगी और राजनीतिक भूचाल ला दिया है। यह विवाद ऐसे वक्त में खड़ा हुआ है जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं और सभी दल दलित वोट बैंक को साधने में जुटे हैं।
11 जून को लालू यादव ने अपना 78वां जन्मदिन मनाया। इसी दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे कुर्सी पर बैठे हैं और अपने पैर सामने एक कुर्सी पर रखे हुए हैं। एक समर्थक डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लेकर आता है और लालू के करीब खड़ा होकर फोटो खिंचवाता है। वीडियो में यह दृश्य ऐसा प्रतीत होता है जैसे अंबेडकर की तस्वीर लालू यादव के पैरों के पास रखी गई हो। बस, यहीं से विवाद की चिंगारी भड़क उठी।

अनुसूचित जाति आयोग ने लालू यादव को भेजा नोटिस
इस वीडियो को लेकर बिहार अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया है और लालू प्रसाद यादव को नोटिस भेजा है। आयोग ने इसे अंबेडकर के अपमान की तरह देखा है और लालू यादव को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है। जवाब न देने पर उनके खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
बीजेपी का हमला - 'जंगलराज की यादें ताजा'
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस वीडियो को शेयर करते हुए राजद और लालू यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा,
''लालू के 15 वर्षों का जंगलराज, बिहार में दलितों के लिए अंधकारमय युग, 1990 से 2005 तक लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में बिहार जंगलराज का प्रतीक बन गया -और सबसे ज्यादा अत्याचार दलितों को सहने पड़े। जिसे "सामाजिक न्याय" बताया गया, वह दरअसल अपराध, जातीय नरसंहार और व्यवस्था की बर्बादी का काल बन गया। दलित समुदायों को निशाना बनाया गया, उनका शोषण हुआ, और उनकी आवाज़ को बेरहमी से दबा दिया गया। 600 से अधिक जातीय नरसंहार दर्ज हुए - जिनमें वीभत्स घटनाएं शामिल हैं, जहां महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों तक को बेरहमी से मार दिया गया। न्याय लगभग कभी नहीं मिला। अपराधी खुलेआम घूमते रहे, और कई तो सत्ता के संरक्षण में थे। पुलिस या तो मिली हुई थी या पूरी तरह असहाय। लालू का शासन उन्हीं लोगों से छल था जिनके नाम पर राजनीति की जाती थी। "एमवाई (मुस्लिम-यादव)" समीकरण के पीछे दलित पूरी तरह हाशिए पर रहे और उन्हें केवल सत्ता की सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया गया। इस सच्चाई को कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए। अगली पीढ़ी को जंगलराज की असली तस्वीर जरूर बतानी होगी।''
तेजस्वी यादव ने सफाई में क्या कहा?
जब विवाद ने तूल पकड़ लिया तो आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मोर्चा संभालते हुए बीजेपी पर पलटवार किया। उन्होंने बीजेपी को "बड़का झूठा पार्टी" करार दिया और कहा कि भाजपा को न तो बाबा साहेब आंबेडकर से कोई मतलब है और न ही संविधान से। तेजस्वी ने दावा किया कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने बिहार भर में अंबेडकर की सैकड़ों मूर्तियां लगवाई हैं। उन्होंने कहा, "हम लोग आंबेडकर की विचारधारा को मानने और आगे बढ़ाने वाले लोग हैं, जबकि बीजेपी सिर्फ झूठ फैलाकर जनता को गुमराह कर रही है।"
क्या लालू के वीडियो का चुनाव में होगा असर?
इस घटना का असर आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में साफ देखने को मिल सकता है। आरजेडी जहां तेजस्वी यादव के नेतृत्व में खुद को युवा और प्रगतिशील पार्टी के तौर पर पेश कर रही है, वहीं यह वीडियो दलित मतदाताओं में असंतोष पैदा कर सकता है।
बिहार की राजनीति में दलित वोटर्स की हिस्सेदारी करीब 19% है, और वे चुनावी नतीजों को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं। एलजेपी (रामविलास), भाजपा और अब प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी दलित वर्ग को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में यह विवाद राजद के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
कांग्रेस, जो राजद के साथ महागठबंधन का हिस्सा है, वह भी दबाव में आ सकती है। अगर दलित समुदाय में नाराजगी बढ़ती है, तो उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ेगी। प्रशांत किशोर पहले ही राहुल गांधी को चुनौती दे चुके हैं कि वे लालू यादव की इस हरकत पर खुलकर आलोचना कर रहे हैं।
कुल मिलाकर इस वीडियो से लालू यादव की एक पुरानी छवि फिर से राजनीतिक मंच पर लौट आई है-एक ऐसी छवि जो दलित हितों की उपेक्षा के आरोपों से घिरी हुई है। अब देखना यह होगा कि इस विवाद का सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ेगा या राजद इसे संभाल पाएगी। लेकिन इतना तय है कि बिहार चुनाव 2025 में अंबेडकर की तस्वीर की यह राजनीति एक अहम मुद्दा बनने जा रही है।












Click it and Unblock the Notifications