Bihar Politics: NDA में कुशवाहा को तो मिला तोहफ़ा, चिराग के चाचा और RCP सिंह का क्या होगा?
Bihar Politics: बिहार में लोकसभा चुनाव के बाद से ही राजनीतिक पार्टियों ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर मंथन शुरू कर दिया है। इसी क्रम में NDA बिहार में अपनी पैठ मज़बूत करने के लिए मास वोट बैंक से लेकर अल्पसंख्यक समुदायओं को भी साधने की कोशिश में जुट गई है।
लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (पूर्व केंद्रीय मंत्री) काराकाट सीट से चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बाद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह बयान दिया कि सभी लोग जानते हैं कि वह हारे नहीं हराये गए हैं। इसके बाद से ही कुशवाहा समुदाय में एनडीए को लेकर नाराज़गी देखने को मिली।

कुशवाहा समुदाय के लोगों ने साफ तौर पर यह मांग रख दी कि एनडीए में उपेंद्र कुशवाहा को उचित सम्मान दिया जाए नहीं तो, विधानसभा चुनाव में इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। कुशवाहा समुदाय के लोगों का आरोप है कि पवन सिंह ने भाजपा में जाने के नाम पर लोगों को भ्रमित किया।
पवन सिंह कहते थे कि जीतेंगे तो भाजपा में ही जाएंगे, इससे मतदाता भ्रमित हो रहे थे। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस पर अपना रुख साफ करना चाहिए था। लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया इससे उपेंद्र कुशवाहा की हार हुई है। ऐसे में एनडीए उन्हें उचित सम्मान दे, नहीं तो खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहे।
भाजपा ने वोट बैंक खिसकता देख आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल किया। एनडीए की तरफ़ से आधिकारिक ऐलान किया कि उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजा जाएगा। अब तो यह तय हो गया कि उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए ने उचित सम्मान दे दिया।
वहीं बिहार की सियायत के दो चेहरे पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस और आरसीपी सिंह के हाथ अभी भी खाली है। लोजपा नेता पशुपति पारस ने लोकसभा चुनाव में तेवर दिखाते हुए पद से इस्तीफ़ा दिया। इधर उधर समीकरण बैठाए, लेकिन कुछ बात नहीं बनी। नतीजा में थक-हार कर वापिस एनडीए में रह गए।
लोकसभा चुनाव में एनडीए ने उन्हें टिकट ही नहीं दिया। वहीं दूसरी तरफ़ पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार से बगावत भाजपा का दामन थामा, लेकिन लोकसभा चुनाव में NDA की तरफ़ से उन्हें टिकट नहीं मिला। इन दोनों के लेकर चर्चा है कि RCP सिंह को नीतीश कुमार के दवाब में टिकट नहीं मिला और पारस को बगावती सुर बुलंद करने की वजह से किनारा किया गया।












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