खान सर का अस्पताल होगा सील? लोगों के साथ हो रहा था खेला, बस 15 दिनों में बंद होगा हॉस्पिटल?

Khan Sir Hospital: हाल के दिनों में लगातार सुर्खियों में रहे खान सर की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। हालिया विवादों और प्रशासनिक जांचों के बीच अब उनके अस्पताल खान हेल्थ केयर पर भी सवाल उठने लगे हैं। फायर सेफ्टी ऑडिट के दौरान अस्पताल में कई ऐसी कमियां सामने आई हैं, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि अस्पताल जैसी जगहों पर सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जांच में दूसरी सीढ़ी की कमी, पर्याप्त स्प्रिंकलर सिस्टम न होना और फायर फ्लोर प्लान का अभाव जैसी खामियां पाई गई हैं। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को इन कमियों को जल्द दूर करने के निर्देश दिए हैं। मामला सामने आने के बाद खान हेल्थ केयर एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है।

Khan Sir Hospital

फायर ऑडिट में क्या मिला?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमंडल पदाधिकारी इंद्रजीत कुमार ने बताया कि खान हेल्थ केयर अस्पताल की फायर सेफ्टी जांच के दौरान कई खामियां सामने आई हैं। अस्पताल की इमारत G+5 श्रेणी की है, लेकिन वहां नियमों के अनुसार दो सीढ़ियों की व्यवस्था नहीं मिली। जांच टीम को भवन में केवल एक सीढ़ी दिखाई दी।

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एक सीढ़ी और लिफ्ट से नहीं चलेगा काम

ऊंची इमारतों और अस्पतालों में सुरक्षा के लिए दो सीढ़ियां होना जरूरी है। यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि एक सीढ़ी के साथ लिफ्ट भी मौजूद है। रिपोर्ट के मुताबिक, आग लगने की स्थिति में लिफ्ट सुरक्षित विकल्प नहीं होती। ज्यादा गर्मी होने पर मेटल फैल सकती है, जिससे लिफ्ट के फंसने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त सीढ़ियां जरूरी होती हैं।

हर फ्लोर पर लगाने को कहा गया फायर प्लान

रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान यह भी पाया गया कि अस्पताल में फायर फ्लोर प्लान की व्यवस्था नहीं है। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को हर मंजिल पर फायर फ्लोर प्लान लगाने का निर्देश दिया है। इस प्लान में भवन का नक्शा होता है, जिसमें यह बताया जाता है कि व्यक्ति इस समय कहां खड़ा है और सबसे नजदीकी निकास मार्ग कौन सा है। किसी भी आपात स्थिति में यह जानकारी लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने में मदद करती है।

स्प्रिंकलर सिस्टम भी मानकों पर खरा नहीं

ऑडिट में यह भी सामने आया कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में स्प्रिंकलर नहीं लगाए गए हैं। फायर सुरक्षा में स्प्रिंकलर सिस्टम को सबसे अहम उपकरणों में गिना जाता है क्योंकि यह आग लगते ही अपने आप सक्रिय हो जाता है।

आग लगते ही कैसे काम करता है स्प्रिंकलर?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, इंद्रजीत कुमार ने बताया कि हर स्प्रिंकलर हेड में एक कांच की नली लगी होती है, जिसमें ग्लिसरीन आधारित तरल भरा रहता है। जब आग की गर्मी बढ़ती है तो यह तरल फैलता है और कांच का बल्ब टूट जाता है। बल्ब टूटने के बाद स्प्रिंकलर का वाल्व अपने आप खुल जाता है और पानी का छिड़काव शुरू हो जाता है। इससे आग को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करने में मदद मिलती है और बड़े हादसे का खतरा कम हो जाता है।

15 दिन में सुधार करने का निर्देश

प्रशासन की ओर से अस्पताल प्रबंधन को सुरक्षा संबंधी कमियां दूर करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि तय समय के भीतर आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो आगे नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल अस्पताल को फायर सेफ्टी मानकों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

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