Khagaria News: चिराग के सांसद को मिली मौत की धमकी का खुलासा, ससुराल से बदले की आग ने रच दी सियासी साजिश
Khagaria MP Life Threat News Update: बिहार चुनाव 2025 से पहले सियासी हलचल के बीच खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा को मिली जान से मारने की धमकी का राज़ खुल गया है। इस धमकी के पीछे कोई राजनीतिक षड्यंत्र नहीं, बल्कि एक शख्स की निजी दुश्मनी और बदले की आग निकली। भागलपुर पुलिस ने धमकी देने वाले आरोपी को समस्तीपुर जिले से गिरफ्तार कर सनसनीखेज खुलासा किया है।
गिरफ्तार आरोपी कुंदन, समस्तीपुर जिले के मोरबा का रहने वाला है। 11 अगस्त की रात भागलपुर एसएसपी के सरकारी नंबर पर एक अज्ञात नंबर से धमकी भरा संदेश आया था- "खगड़िया एमपी राजेश वर्मा की मौत मेरे हाथों से होगी, इलेक्शन 2025 से पहले।" इस धमकी ने पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक खलबली मचा दी थी।

कैसे खुला धमकी का राज़
साइबर थानेदार डीएसपी कनिष्क श्रीवास्तव ने तुरंत केस दर्ज कर इंस्पेक्टर राकेश कुमार को जांच सौंपी। तकनीकी जांच से पता चला कि धमकी वाले मैसेज के लिए जिस सिम का इस्तेमाल हुआ, वह कुंदन के साले दीपक के नाम पर रजिस्टर्ड था। पुलिस ने समस्तीपुर से कुंदन को दबोचा। पूछताछ में उसने चौंकाने वाला खुलासा किया।
पुलिस की तफ्तीश में कुंदन ने बताया कि यह धमकी अपने ससुराल वालों से बदला लेने के लिए रची, क्योंकि उनका आपसी विवाद चल रहा था। धमकी में सांसद का नाम इसलिए जोड़ा, क्योंकि उसके भाई, जो खगड़िया में एक राजनीतिक दल के जिलाध्यक्ष हैं, की बातचीत से उसे पता चला कि राजेश वर्मा खगड़िया के सांसद और मूल रूप से भागलपुर के निवासी हैं। उसी जानकारी का उसने गलत इस्तेमाल कर धमकी का संदेश भेज दिया।
राजनीतिक रंग से लेकर पलटी चाल
गिरफ्तारी के बाद आरोपी का भाई और खगड़िया सांसद के पीए साइबर थाना पहुंचे और कुंदन की रिहाई की सिफारिश करने लगे। लेकिन जैसे ही उन्हें सच्चाई मालूम हुई कि धमकी कुंदन ने ही दी है, उन्होंने फौरन उससे पल्ला झाड़ लिया। सिर्फ भागलपुर एसएसपी ही नहीं, बल्कि बेगूसराय एसपी को भी कुंदन ने धमकी भरे संदेश भेजे थे। बेगूसराय पुलिस ने भी इस मामले में केस दर्ज किया है और अब आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में है।
पुलिस का रुख
डीएसपी कनिष्क श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी कुंदन को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इस पूरे मामले में कोई और भी शामिल है या फिर यह पूरी तरह से निजी दुश्मनी का नतीजा है। धमकी राजनीतिक लग रही थी, लेकिन निकली पारिवारिक दुश्मनी। सांसद का नाम सिर्फ पहचान और डर फैलाने के लिए इस्तेमाल। अब जांच इस ओर बढ़ेगी कि क्या आरोपी ने किसी के कहने पर यह कदम उठाया या अकेले ही यह साजिश रची।












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