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बिहार: 2018 में भटक कर बिहार पहुंचा था युवक, Google Map के जरिए हुई परिवार से मुलाकात

बिहार के भागलपुर जिले में एक बच्चा 2018 में भटक कर पहुंच गया था, भागलपुर-दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में जीआरपी की नज़र बच्चे पर पड़ी तो उससे पूछताछ की गई, लेकिन वह कुछ भी बताने में असमर्थ था, जिस वजह से उसे बालगृह....
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भागलपुर, 24 सितंबर 2022। नेट के ज़रिए इंसान की ज़िंदगी आसान हो गई है, इसमे कोई दो राय नहीं है। इंटरनेट की मदद से लोग कई मुश्किल काम को भी आसानी से अंजाम दे पा रहे हैं। चाहे वह घर में लज़ीज भोजन बनाना हो या फिर घूमने कहीं बाहर जाना हो। इंटरनेट ने किस तरह से जिंदगी आसान की है, इसका सटीक उदाहण सालों बाद गूगल मैप के ज़रिए परिवार से मिलने का है। झारखंड के लातेहार जिले का रहने वाला एक बच्चा साल 2018 में अपने परिवार से जुदा हो गया था। अब वह गूगल मैप के ज़रिए अपने परिवार से मिला है। अपने परिवार से मिल कर बच्चा काफी खुश है।

2018 में भटक कर पहुंचा था भागलपुर

2018 में भटक कर पहुंचा था भागलपुर

बिहार के भागलपुर जिले में एक बच्चा 2018 में भटक कर पहुंच गया था, भागलपुर-दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में जीआरपी की नज़र बच्चे पर पड़ी तो उससे पूछताछ की गई, लेकिन वह कुछ भी बताने में असमर्थ था, जिस वजह से उसे बालगृह में रखा गया। बाल गृह में उसे ज़िंदगी तो मिल गई थी लेकिन अपने मां-बाप से मिलने की उम्मीद खो चुका था। बच्चे को ना तो अपने घर का पता मालूम था और ना ही आधार कार्ड बना हुआ था। आधार कार्ड बना रहता तो फिंगर इंडेक्सिंग और आई स्कैनिंग के ज़रिए आधारा कार्ड निकाला जा सकता था। उसके बाद आधार कार्ड के पते पर बच्चे को पहुंचाया जा सकता था।

बच्चे ने बताया था आजमगढ़ का पता

बच्चे ने बताया था आजमगढ़ का पता

बाल गृह प्रबंधन के सदस्य ने बताया कि बच्चे को पता मालूम नहीं था और आधार कार्ड भी नहीं बना था। इस वजह से उसके घर का पता नहीं चल पा रहा था। बच्चे की लगातार काउंसलिंग करने के बाद बच्चे ने बताया कि उसके माता-पिता ईंट भट्ठे में काम करते थे। वह लोग आजमगढ़ उत्तर प्रदेश में रहते थे। बच्चे के इतना बताने के बाद भागलपुर जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने आजमगढ़ जिले के सभी ईंट भट्ठे संचालक की डिटेल्स निकाली। डिटेल्स निकालने के बाद पता चला कि सरोज कुमार नाम के भट्ठा संचालक के पास उनके माता-पिता काम करते थे लेकिन अब काम छोड़ दिया है, सासंग के रहने वाले थे।

गांव की तस्वीर देख चहक उठा बालक

गांव की तस्वीर देख चहक उठा बालक

भटठा संचालक सरोज के बताने पर गूगल मैप में सासंग ढूंढने पर जानकारी मिली यह झारखंड में है। जिसके बाद सासंग का डिटेल्स निकाला गया। बच्चे को वहां की मशहूर जगह और बाज़ारों की तस्वीर दिखाई गई। तस्वीरों को देखने के बाद बच्चे ने एक जगह को देखते हुए कहा कि ये मेरा गांव है। जिसके बाद सासंग थाना अध्यक्ष से संपर्क साधकर उसके परिवार की पुष्टि की गई। जिससे साफ हो गया कि बच्चे का आधार कार्ड नहीं बना है। इसके आधार बच्चे का आधार रजिस्ट्रेशन करवाया गया।

मां-बाप से मिला बिछड़ा बेटा

मां-बाप से मिला बिछड़ा बेटा

सासंग गांव के मुखिया से सपंर्क साधने के बाद बच्चे के माता-पिता से संपर्क हुआ। जिसके बाद बच्चे ने वीडियो कॉल पर अपने माता-पिता और भाई से बात की। माता-पिता ने बिछड़े हुए बेटे को देखा तो वह भावुक हो गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनका बेटा मिल गया है। फिलहाल बच्चे की कानूनी प्रक्रिया पूरा करने के बाद उसे उसके मां-बाप से मिलवाने की कार्रवाई की जा रही है।

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English summary
jharkhand latehar sasang village boy found through google map
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