क्या है मां जानकी की जन्म स्थली पुनौरा धाम का इतिहास, जिस पर CM नीतीश ने खेला ‘चुनावी दांव’

Punaura Dham, Sitamarhi: बिहार में आगामी चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है, राजनीतिक पार्टियां चुनावी रणनीतियां बनाने में जुट चुकी हैं। इसी क्रम में बिहार में भाजपा मंदिर निर्माण के मुद्दे पर सियासी माइलेज नहीं ले सके, इसलिए सीएम नीतीश कुमार ने मां जानकी की जन्म स्थली को भव्यमंदिर बनाने के लिए 72 करोड़ की राशि मंज़ूर कर मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। आइए जानते हैं पुनौरधाम का इतिहास, जिस पर सीएम नीतीश कुमार ने चुनावी दांव खेला है।

बिहार की राजधानी पटना से करीब 135 KM की दूरी पर सीतामढ़ी में ये ऐतिहासिक स्थल मौजूद है। जिला मुख्यालाय से 3 किलोमीटर की दूरी पर पुनौरा धाम है। मां जानकी की जन्म स्थली की ज़मीन 12 एकड़ 96 डिसमिल है, लेकिन बाउंड्री वाल तक नहीं है। मां जानकी का प्राचीन मंदिर और कुंड के पास कई मंदिर तो है लेकिन, अच्छी व्यवस्था नहीं है।

history of Punaura Dham

महंत कौशल किशोर दास (मां जानकी के सेवादार) ने बताया कि विकास के नाम पर सिर्फ सियासत हो रही है, ज़मीन पर विकास दिखाई नहीं देगा। चुनाव के वक्त मतदाताओं को लुभाने के लिए फ़ैसले लिए जाते हैं, लेकिन अमलीजामा नहीं पहनाया जाता है।

महंत कौशल किशोर ने बताया कि जगत जननी मां जहां निकलीं, वहां आज की तारीख़ में कुंड है, लेकिन इसका विकास नहीं हो पाया। घोषणाएं तो सिर्फ़ राजनीतिक स्टंट है। नीतीश कुमार ने साल 2018 में भी सीता नवमी पर विकास की घोषणाएं की थीं, लेकिन काम नहीं हुआ।

अयोध्या में हो रहे राम मंदिर की तरह ही मां के मंदिर का निर्माण होना चाहिए था, जो कि आज तक नहीं हुआ है। श्रवण (व्यवस्थापक, पुनौरा धाम जानकी मंदिर) ने कहा कि बस पार्किंग और तीन कमरों से आने वाले पैसों से ही मंदिर की व्यवस्था चल रही है। मां जानकी के जन्म स्थली का हाल तो आप जान गए, अब इतिहास जानते हैं।

पुनौरा धाम (मां जानकी जन्म स्थली) के बारे में जानकारी देते हुए महंत कौशल किशोर ने कहा कि यह पुंडरीक ऋषि की तपोभूमि रही है। राजा जनक ने यह ज़मीन पुंडरीक ऋषि को दान में दी थी। ऋषियों की इस तपोभूमि को लंकापति रावण तबाह करना चाहता था।

रावण के तंत्र से इस इलाके में अकाल पड़ गया। सूखा से अकाल पड़ने के बाद यह फ़ैसला लिया गया कि यहां राजा और रानी हल चलाने से बारिश होगी। राजा जनक के लिए सीतामढ़ी में कैंप बना, इसके बाद वह 3 किलोमीटर की दूरी तय कर पुनौरा धाम पहुंचे और हल चलाया। वहीं बाल अवस्था में मां जानकी एक कलश में में प्रकट हुईं। इसके बाद क्षेत्र में ज़ोरदार बारिश हुई।

राजा जनक मां जानकारी को लेकर सीतामढ़ी में बने कैंप मे चले गए। वहां मां जानकी को फूस के घर (मड़ई) में रखा गया। इसी वजह से यह इलाका सीता मड़ई के नाम से जाना जाने लगा। बाद में सीती मड़ई से नाम सीतामढ़ी हो गया।

मड़ई जहां मां रखी गई, वहां भी मां जानकी का मंदिर मौजूद है। उसी जगह पर मां का छठियारा हुआ औक इसके बाद ही पुनौरा धाम को मां जानकी की की जन्म स्थली के नाम से ख्याति मिली। मां जानकी जिस जगह पर मिली थी, उसे आज भी सीता कुंड के नाम से लोग जानते हैं।

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