Government Hospital: बिहार का 'बीमार अस्पताल', शहीद भाई की याद में केंद्रीय मंत्री ने कराया था निर्माण

1984 में शहीद कैप्टन गिरीश नंदन सिंह की याद में बनाया गया अस्पताल आज बदहाली के आंसू रो रहा है। 25 लाख रुपये की लागत से बनाए गए अस्पताल में हर सुविधा थी, लेकिन आज अस्पताल को खुद इलाज की ज़रूरत है।

Government Hospital Tulsigarh Village Chandi Block Nalanda News In Hindi

Government Hospital: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं, वहीं बदहाल अस्पताल की खबरे भी पढ़ने को मिल रही है। बिहार के नालंदा ज़िले में भी एक अस्पताल बदहाली के आंसू रो रहा है। अस्पताल का ये आलम है कि बचे खुचे सामान भी चोर उड़ा ले जा रहे हैं। भवन की हालत देखकर आप कह ही नहीं सकते कि ये कभी अस्पताल भी था। खिड़की और दरवाजा तक चोरी हो गई। तुलसीगढ़ गांव (चण्डी प्रखंड) में शहीद की याद में अस्पताल का निर्माण कराया गाया था।

तारकेश्वरी सिन्हा (पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री) ने अपने भाई के शहीद होने पर अस्पताल बनवाया था। चंडी प्रखंड क्षेत्र के तुलसीगढ़ की निवासी कांग्रेसी नेत्री तारकेश्वरी सिन्हा का जन्म 26 दिसंबर 1926 को हुआ था। 14 अगस्त 2007 को 80 साल की उम्र में उनकी मौत हुई थी। 26 साल की उम्र में वह पटना पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार लोकसभा के लिए चुनी गई थीं। 1952 में पहली बार लोकसभा गई थी।

तुलसीगढ़ गांव में साल 1984 में शहीद कैप्टन गिरीश नंदन सिंह की याद में अस्पताल का निर्माण कराया गया था। 25 लाख की लागत से बनाया गया अस्पताल आज जर्जर स्थिति में है। भूतबंगला में तब्दील हो चुका अस्पताल कभी जाने माने अस्पतालों में शुमार किया जाता था। उस वक 25 लाख रुपये की लागत से दो मंजिला अस्पताल बनवाया गया था। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए कई तरह के इंतज़ाम किए गए थे। जिस अस्पताल में हर मर्ज़ का इलाज हो जाता था, आज खुद अस्पताल को ही इलाज की ज़रूरत पड़ गई है।

कैप्टन गिरीश नंदन सिंह एयर इंडिया में पायलट थे। एक विमान हादसे में वह शहीद हो गए थे। उन्हीं की याद में बना अस्पताल अस्तित्व बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। वहीं इउस अस्पताल को लेकर ग्रामीणों ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहेंगे तो अस्पताल फिर से जगमगा उठेगा। वहीं कुछ ग्रामीणों ने कहा कि लोजपा (आर) सुप्रीमो चिराग पासवान के ध्यान देने से भी अस्पताल फिर से बन जायेगा। इस अस्पताल के दोबारा बन जाने से कई गांव के लोगों को फायदा पहुंचेगा।

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