Gopalganj News: थावे थाना बना कमाई का अड्डा? पुराने केस में जांच की जगह उगाही, थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप

Gopalganj News: थावे थाना पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि थाना क्षेत्र के एक युवक को 2024 में टोल टैक्स पर हुए हंगामे के पुराने मामले की जांच के नाम पर पुलिस ने दिनदहाड़े उठा लिया। इसके बाद उससे ₹20,000 की रिश्वत की मांग की गई, यह कहकर कि पैसा देने पर ही उसे छोड़ा जाएगा।

पीड़ित युवक के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी लिखित नोटिस या समन के उसे बुलाया और फिर पूछताछ के बहाने घंटों थाने में बिठाए रखा है। आरोप यह भी है कि थानाध्यक्ष खुद इस उगाही के पीछे हैं और पुराने मामलों को हथियार बनाकर निर्दोष लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है।

Gopalganj Thawe Police Accused of Extortion Amid Investigation into Old Case Bihar News

इस पूरे मामले में वन इंडिया हिंदी ने गोपालगंज एसपी के नंबर पर कई फोन किया लेकिन कोई रिसीव नहीं किया। वहीं थाना प्रभारी से बात हुई तो उन्होंने पूरे मामले की सही जानकारी नहीं दी, कहा- 2024 के मामले में उठाया है। इसके बाद गोलमटोल बात कर कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।

झूठ केस में फंसाने की धमकी
ग्रामीणों ने पुलिस की मनमानी पर सवाल उठाए हैं और जांच की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह जताया है। पीड़ित युवक के परिजनों का आरोप है कि युवक सैद ने थाना के अंदर से कॉल किया और बताया कि पुलिस वाले कह रहे हैं कि झूठा चार्ज लगाओ और इसकी सही से मरम्मत करो। युवक ने कहा कि यह झूठ केस में फंसाने और पीटने की बात कर रहे हैं।

टोल टैक्स बवाल केस की हकीकत?
गौरतलब है कि 2024 में गोपालगंज जिले के टोल प्लाजा पर स्थानीय युवाओं और टोलकर्मियों के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद थावे थाना में कई नामजद व अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन अब इस मामले की आड़ में पुलिस कथित तौर पर लोगों से जबरन पैसे वसूल रही है।

परिजन बोले - "हमने गलती की कि थाने गए..."
पीड़ित परिवार ने बताया कि उन्हें लगा था पुलिस जांच कर रही है, लेकिन कुछ ही देर में पुलिस ने सीधा रिश्वत मांगनी शुरू कर दी। "हमसे कहा गया कि ₹20,000 दो, तभी छोड़ा जाएगा, नहीं तो मामला गंभीर बना देंगे।" वहीं थाना के अंदर बंद युवक को अब पिटाई और झूठे केस में फंसाने की धमकी भी पुलिस वाले दे रहे हैं। मामला मीडिया में आने के बाद रात करीब 11.30 पर युवक को पुलिस ने छोड़ दिया।

क्या कहते हैं कानून के जानकार?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार बिना वारंट के किसी को इस तरह उठाना और बिना किसी कोर्ट की प्रक्रिया के थाने में बिठाकर पैसे की मांग करना गंभीर अपराध है। यह न सिर्फ भ्रष्टाचार है, बल्कि मानवाधिकार उल्लंघन भी है। स्थानीय लोगों की मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच DSP स्तर के अधिकारी से करवाई जाए। थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए ताकि जांच निष्पक्ष रूप से हो सके।

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