Ganga Path: 9970 करोड़ की सौगात, भागलपुर से मुंगेर की दूरी कम, सिर्फ होगी रफ्तार! गांव-कस्बों से जुड़ेगा शहर

Ganga Path: बिहार में गंगा नदी के किनारे बसे जिले मुंगेर, सुल्तानगंज और भागलपुर के लिए एक बड़ा बुनियादी ढांचे का सपना अब हकीकत की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 9970 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली गंगा पथ परियोजना को मंजूरी दी गई।

यह परियोजना न केवल इन जिलों को बेहतर यातायात संपर्क प्रदान करेगी, बल्कि निवेश, पर्यटन और रोज़गार के नए अवसर भी खोल सकती है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह परियोजना अपने वादों पर खरी उतरेगी?

Ganga Path

परियोजना का खाका:
कैबिनेट के फैसले के अनुसार गंगा पथ दो खंडों में विकसित किया जाएगा। मुंगेर गंगा पथ,साफियाबाद से शुरू होकर बरियारपुर, घोरघट होते हुए सुल्तानगंज तक पहुंचेगा। वहीं भागलपुर का गंगा पथ, सुल्तानगंज से भागलपुर होते हुए सबौर तक बनेगा।

इस पूरे 83 किमी लंबे कॉरिडोर के निर्माण में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) का उपयोग किया जाएगा - यह एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल है, जिसमें निर्माण का 40% सरकार वहन करती है और 60% निजी कंपनियां निवेश करती हैं। फिर निर्माण के बाद सरकार निर्धारित किस्तों में भुगतान करती है।
क्या होंगे संभावित लाभ?

यातायात का सुगमता: मुंगेर, सुल्तानगंज और भागलपुर में गंगा के समानांतर यातायात व्यवस्था सुदृढ़ होगी, जो लंबे समय से जाम और खराब सड़कों की समस्या से जूझते रहे हैं।

पर्यटन को बढ़ावा: सुल्तानगंज और भागलपुर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण हैं। गंगा पथ से यहां आने-जाने की सुविधा बढ़ेगी, जिससे पर्यटन को नया प्रोत्साहन मिल सकता है।

आर्थिक विकास: निर्माण के दौरान और बाद में व्यापार, लॉजिस्टिक्स, होटलिंग व अन्य सेवा क्षेत्रों में नए रोज़गार सृजित होंगे।

चुनौतियां और सवाल
HAM मॉडल में जोखिम: इस मॉडल में निर्माण के बाद सरकार किस्तों में भुगतान करती है। यदि सरकार भुगतान में देरी करती है, तो निजी कंपनियां कार्य से पीछे हट सकती हैं। इससे अधूरे प्रोजेक्ट्स की आशंका बनी रहती है।

क्या कहते हैं पिछले रिकॉर्ड: बिहार में पहले भी कई बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं, जैसे बख्तियारपुर-ताजपुर पुल परियोजना, जिसके लिए अब 1047 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया गया है। क्या गंगा पथ भी ऐसी ही अड़चनों का शिकार होगा?

पर्यावरणीय प्रभाव: गंगा के किनारे इतने बड़े स्तर का निर्माण कार्य नदी की पारिस्थितिकी और प्रवाह को कैसे प्रभावित करेगा, इस पर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है।

राजनीतिक संदेश क्या है?
इस परियोजना को 2025 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के रूप में भी देखा जा सकता है। नीतीश कुमार पूर्वी बिहार को एक नए विकास मॉडल के रूप में पेश करना चाहते हैं, खासकर ऐसे समय में जब विपक्ष राज्य में 'विकास बनाम बदहाली' की बहस को हवा दे रहा है।

9970 करोड़ रुपये की गंगा पथ परियोजना पूर्वी बिहार के लिए बेशक एक ऐतिहासिक मौका है। यदि समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से यह परियोजना पूरी होती है, तो यह इलाके की आर्थिक और सामाजिक दिशा को बदल सकती है। लेकिन यदि यह भी अन्य परियोजनाओं की तरह लंबी फाइलों और अधूरे वादों में उलझ गई, तो यह महज़ एक और घोषणापत्र बनकर रह जाएगी।

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