लंगूर की मौत पर रो पड़े ग्रामीण, शव यात्रा भी निकाली, अब अंतिम संस्कार वाली जगह पर बनेगा मंदिर

बिहार के खगड़िया में शनिवार को एक लंगूर बंदर की मौत हो गई। इसके बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी। गांव वाले उस बंदर के प्रति इतनी श्रद्धा रखते थे कि उन्होंने बकायदा उसकी शव यात्रा निकाली। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गोगरी प्रखंड स्थित फतेहपुर गांव का है। वहां पर शनिवार को एक बंदर छत से गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद गांव के लोग इकट्ठा हुए और ससम्मान उसके शव को दफन करने का फैसला लिया।

Funeral procession of langur

ग्रामीणों ने एक ठेले पर उसके शव को रखा और उसके चारों ओर फूल रख दिए। इसके बाद उसकी शव यात्रा शुरू हुई, जिसमें 100 से ज्यादा लोग शामिल हुए। इसमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे। ग्रामीणों ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

अंतिम संस्कार के दौरान कई लोगों की आंखें नम दिखीं। ऐसा लग रहा था कि जैसे गांव का कोई सदस्य उनसे बिछड़ गया हो। ग्रामीणों ने जहां पर बंदर का अंतिम संस्कार किया, वहां पर हनुमान मंदिर बनाने का निर्णय लिया है।

हजारीबाग में भी ऐसी घटना
वहीं दूसरी ओर झारखंड के हजारीबाग में भी ऐसी घटना सामने आई है। वहां पर एक बंदर के शव को हिंदू-रीति रिवाज के अनुसार दफनाया गया। अब ग्रामीण ब्रह्मभोज कर रहे, जो मृत्यु के 12 दिन बाद होता है।

मामले में एक ग्रामीण ने बताया कि बंदर का शव पीपल के पेड़ के पास पड़ा था। उस पर बच्चों की नजर पड़ी। उन्होंने अपने घर वालों को बताया। इसके बाद सबने एकमत होकर उसका अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि लंगूर भगवान हनुमान के वंशज हैं। ऐसे में उनका सौभाग्य है कि वो उसका क्रिया कर्म कर रहे। सब कुछ हिंदू रीति-रिवाज के हिसाब से हो रहा। इसके लिए सबने पैसा दिया है।

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