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EC State Icon: कौन हैं ट्रांसजेंडर मोनिका दास, जिन्हें बनाया गया बिहार चुनाव का स्टेट आइकॉन?

EC State Icon: लोकतंत्र में ट्रांसजेंडर की सहभागिता बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने खास पहल की है।

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EC State Icon Bihar: बिहार में चुनाव आयोग ने मोनिका दास को चुनाव स्टेट आईकॉन का दर्जा दिया है। कैनरा बैंक (कंकड़बाग शाखा) में कार्यरत मोनिका दास के बारे में विस्तार से जानते हैं।

मोनिका की शुरुआती पढ़ाई नवोदय विद्यालय से हुई, इसके बाद उन्होंने पटना का रुख किया। वहां उन्होंने पटना लॉ कॉलेज से लॉ ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की है। पढ़ाई के दौरान भी ताने सुनने को मिले, लेकिन लड़कियों ने काफी सहयोग मिला।

पढ़ाई मुकम्मल करने के बाद बैंक पदाधिकरी की परीक्षा में कामयाबी हासिल की और बैंक पदाधिकारी बनी। गौरतलब है कि मोनिका दास बिहार की पहली ट्रांसजेंडर पीठीसीन पदाधिकारी रह चुकी हैं। बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2020 में उन्होंने ट्रांसजेंडर पीठासीन पदाधिकारी के तौर पर चुनाव कराया था।

स्टेट आइकॉन का दर्जा हासिल करने वाली मोनिका दास केनरा बैंक में कलर्क के पोस्ट पर काम कर रही हैं। मोनिका दास ने बताया कि बचपन में पढ़ाई की वजह से लोग ताने देते थे। परिवार के लोगों ने पढ़ाई करने का हौसला दिया।

परिवार के लोगों ने कहा कि पढ़ाई कर अच्छा मुकाम हासिल कर लेने पर सारी परेशानी दूर हो जाएगी। स्कूल से कॉलेज तक परिवार वालों का काफी सपोर्ट मिला। मोनिका को पढ़ाई के बाद नौकरी में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

बैंक में नौकरी मिलने के बाद भी मेल-फीमेल जैसी बातें सुनने को मिली। इन सब को दरकिनार करते हुए वह आगे बढ़ती रही। मोनिका दास ने बिहार चुनाव स्टेट आइकॉन बनाए जाने पर खुशी का इज़हार किया, उन्होंने कहा कि इसमे उनके सीनियर अथॉरिटी का सहयोग मिला है।

मेरे और ट्रासजेंडर समुदाय के लिए यह फख्र की बात है। बिहार को रिप्रेजेंट करना दूसरे ट्रांसजेंडर के लिए भी इंस्पिरेशन है। स्टेट ऑइकॉन का दर्जा मिलने पर मोनिका ने कहा कि बिहार और भारत सरकार ने ट्रांसजेंडर्स को मौका दिया है। अब ट्रांसजेंडर्स हीन भावना से निकलें। उन्होंने कहा चुनाव के दिन लोग छुट्टी समझ कर इंजॉय करने का प्लान करने लगते हैं।

इंसान को एक-एक वोट की कीमत समझना चाहिए क्योंकि उनके एक वोट से वोट से सरकारें बनती, बिगड़ती है। मोनिका दास ने जातीय गणना में ट्रांसजेंडर के जाति कोड पर एतराज़ जताया है। उन्होंने कोडिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए जाति कोड निर्धारित करना सही नहीं है।

ट्रांसजेंडर किसी न किसी जाति, धर्म और समाज में ही पैदा होते हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए जाति कोड निर्धारित करना समझ से बाहर की बात है। इसकी जगह पर फैमिली बैकग्राउंड का कोड होता तो बेहतर था। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।

ये भी पढ़ें: Caste Census In Bihar: Video Call के ज़रिए भी होगी गणना, किसके लिए की गई है ख़ास पहल?

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