Bihar Politics: बेटे का MLC टिकट कटा तो बदल गए उपेंद्र कुशवाहा के तेवर? बोले- सवाल हमसे नहीं, उनसे पूछिए
Bihar Politics: बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन सूबे की सियासत में एक बड़ा दिलचस्प और गर्माहट भरा मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष और सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा (Deepak Prakash Kushwaha) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एमएलसी चुनाव या उपचुनाव का टिकट नहीं दिया।
इसके बाद से एनडीए (NDA) के भीतर अंदरूनी कलह और नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उपेंद्र कुशवाहा ने अपने कड़े तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया है कि उनके बेटे दीपक प्रकाश सम्राट चौधरी सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा बिल्कुल नहीं देंगे।

मीडिया द्वारा दीपक के इस्तीफे और ६ महीने की संवैधानिक समय सीमा को लेकर पूछे गए सवालों पर कुशवाहा बुरी तरह भड़क गए।
Deepak Prakash Kushwaha Cabinet: नामांकन में जुटे दिग्गज, दफ्तर में बैठे रहे कुशवाहा पिता-पुत्र
सोमवार को पटना में एनडीए के सभी घटक दलों के बड़े नेता उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा सहित कई दिग्गज नेता विधान परिषद उम्मीदवारों के नामांकन के लिए विधानसभा पहुंचे थे। इस दौरान एनडीए की एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन इस पूरे शक्ति प्रदर्शन से राष्ट्रीय लोक मोर्चा पूरी तरह गायब रहा।
जहां एक तरफ एनडीए नेता विधानसभा में पर्चा दाखिल करवा रहे थे, वहीं उपेंद्र कुशवाहा और उनके मंत्री बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा पटना स्थित रालोमो (RLM) दफ्तर में ही बैठे रहे। इस दूरी ने सियासी गलियारों में कयासों के बाजार को गर्म कर दिया कि कुशवाहा टिकट न मिलने से बेहद खफा हैं।
'सवाल पूछना है तो बीजेपी से पूछिए' -एयरपोर्ट पर कुशवाहा के तीखे बोल
दोपहर बाद जब उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली में होने वाले अपनी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन (13 जून) में शामिल होने के लिए पटना एयरपोर्ट पहुंचे, तो मीडिया ने उन्हें घेर लिया। दीपक प्रकाश को एमएलसी उम्मीदवार न बनाए जाने के सवाल पर कुशवाहा ने बेहद आक्रामक अंदाज में जवाब दिया।
मीडिया पर भड़के कुशवाहा ने कहा, इसके लिए आप क्यों चिंतित हैं भाई? यह तो आपकी चिंता का विषय नहीं है। कोई और सवाल पूछिए। जब पत्रकारों ने BJP द्वारा MLC सीट को लेकर किए गए पुराने वादे की याद दिलाई, तो उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, "सवाल पूछना है तो उनसे (भाजपा) पूछिए। हमसे तो यह सवाल बनता ही नहीं है।"
क्या है 6 महीने का संवैधानिक खेल? इस्तीफा क्यों नहीं?
दीपक प्रकाश कुशवाहा 7 मई को सम्राट चौधरी कैबिनेट के विस्तार में दूसरी बार मंत्री बने थे। बिना किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य रहे कितने दिनों तक मंत्री रहा जा सकता है, इस कानूनी पेंच पर उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया को विचित्र बताया।
कुशवाहा ने दलील दी -आप दीपक को हटाने वाले कौन होते हैं? वह क्यों इस्तीफा देगा? जिस दिन उसने मंत्री पद की शपथ ली थी, उस दिन भी वह किसी सदन का सदस्य नहीं था और आज भी नहीं है। स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। रही बात 6 महीने के नियम की, तो अभी मंत्री बने केवल एक महीना ही हुआ है। अभी हमारे पास 5 महीने का समय और बाकी है।
नीतीश सरकार से लेकर सम्राट कैबिनेट तक का सफर
दीपक प्रकाश इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में भी बिना सदस्य रहे मंत्री बने थे। लेकिन 6 महीने की मियाद पूरी होने से ठीक पहले नीतीश कुमार ने इस्तीफा देकर पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया था। अब सम्राट चौधरी कैबिनेट में 7 मई को दोबारा शपथ लेने के बाद दीपक प्रकाश को तकनीकी रूप से नए सिरे से 6 महीने का समय मिल गया है। संविधान के अनुसार यदि कोई व्यक्ति विधायक या विधान पार्षद नहीं है, तो वह मंत्री बनने के बाद छह महीने तक पद पर रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक होता है।
NDA में सब ठीक है या नहीं?
फिलहाल, इस खींचतान ने बिहार एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग और वादों को लेकर चल रही अंदरूनी जंग को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। फिलहाल इतना साफ है कि दीपक प्रकाश कुशवाहा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले नहीं हैं, और उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उनके बेटे की राजनीतिक भूमिका को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है।














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