Satabdi Roy: 'मुझे TMC ने नहीं बनाया, मैं खुद स्टार थी', कौन हैं शताब्दी रॉय? ममता की करीबी ने बदले सुर!
Satabdi Roy: चुनावी हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस अब अपने बुरे दिन से गुजर रही है, सोमवार को काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा जताई है, जिसके बाद से बंगाल से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया है।
हालांकि स्पीकर अभी दिल्ली में नहीं हैं इसलिए सभी विधायक अभी शताब्दी रॉय के घर पहुंचे हैं , जिससे कि आगे की रणनीति तय की जा सके। यही नहीं आज दिल्ली में तृणमूल के 10 से अधिक सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र से मुलाकात भी की थी।

इन दस लोगों में काकली घोष दस्तीदार (बारासात), प्रसून बनर्जी (हावड़ा), शताब्दी रॉय (बीरभूम), असित कुमार मल, बापी हलदर (मथुरापुर), जून मालिया (मेदिनपुर), जगदीश बसुनिया (कूच विहार), कालीपद सोरेन (झारग्राम), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), पार्थ और शर्मिला सरकार (बर्दवान पूर्व) शामिल हैं।
'मुझे TMC ने नहीं बनाया, मैं खुद स्टार थी', पुराना बयाव वायरल
मालूम हो इसी बीच शताब्दी रॉय जो कि ममता बनर्जी की काफी करीबी कही जाती रही हैं, उनका सोशल मीडिया पर एक पुराना बयान चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ' कोई इस मुगालते में ना रहे कि आज वो जो भी हैं, वह तृणममूल कांग्रेस की वजह से हैं। बल्कि, शताब्दी रॉय जब राजनीति में आईं तो वो पहले से ही स्टार थी।' गौरतलब है कि ये बयान साल 2021 का है, जब वो गृहमंत्री अमित शाह से मिलने जा रही थीं तो ऐसी खबरें थीं कि ममता बनर्जी उनसे नाराज हो गई थीं, जिसके बाद एक पब्लिक मीटिंग में शताब्दी रॉय ने ये बात कही थी।

जानी मानी अभिनेत्री और फिल्म निर्देशक हैं शताब्दी रॉय
आपको बता दें कि देखने में बेहद ही खूबसूरत शताब्दी रॉय राजनीति में आने से पहले जानी मानी अभिनेत्री और फिल्म निर्देशक थीं। एक अभिनेत्री के रूप में, उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में बंगाली सिनेमा पर राज किया है। उन्होंने तपन सिन्हा की बहुप्रशंसित बंगाली फिल्म अटका (1986) में प्रोसेनजीत चटर्जी के साथ अपनी फिल्मी शुरुआत की, जिसने उन्हें 1987 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए बीएफजेए पुरस्कार जीता था।

नया जहर से बॉलीवुड में रखा था कदम
अमर बंधन (1986), गुरु दक्षिणा (1987), अंतरंगा (1988), अपन अमर अपन (1990), अभिशकार (1990) , अलिंगन (1990), श्रद्धांजलि (1993), लाठी (1996), सखी तुमी कर (1996), चंद्रग्रहण (1997), रणक्षेत्रो (1998), सजनी आमार सोहाग (2000) और त्रिशूल (2000) उनकी काफी चर्चित फिल्में हैं। उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक ज्योति सरूप की नया जहर (1991) से बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की थी और साल 2006 में निर्देशन की दुनिया में कदम रखा।

बीरभूम निर्वाचन क्षेत्र से बनीं सांसद
वह 2009 में पश्चिम बंगाल के बीरभूम निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बनीं। उन्होंने 2014, 2019 और 2024 में भी उसी निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की।2025 में उन्हें तृणमूल कांग्रेस का लोकसभा में उपनेता नियुक्त किया था।
खास बातें
- बंगाली सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री से सफल सांसद बनने का सफर तय किया।
- कई साहित्यिक रचनाएं और कविता संग्रह भी प्रकाशित कर चुकी हैं।
- तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाती हैं।














Click it and Unblock the Notifications