Explainer: पोर्ट, एयरपोर्ट से लेकर नेवल स्टेशन तक! भारत के लिए क्यों इतना अहम है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?
Great Nicobar Mega Project: भारत सरकार हिंद महासागर में स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप को एक बड़े आर्थिक और रणनीतिक हब के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है। करीब 81,000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस मेगा प्रोजेक्ट में पोर्ट, एयरपोर्ट, नेवल स्टेशन, टाउनशिप और पावर प्लांट का निर्माण किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत की समुद्री ताकत, व्यापारिक क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर सरकार का पूरा प्लान क्या है और ग्रेट निकोबार भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट क्या है?
ग्रेट निकोबार अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण द्वीप है। सरकार यहां चार आपस में जुड़े प्रोजेक्ट विकसित करना चाहती है-इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (ICTP), ग्रीनफील्ड एयरफील्ड और नेवल एयर स्टेशन, आधुनिक टाउनशिप तथा पावर प्लांट। इन सभी परियोजनाओं पर कुल 81 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। उद्देश्य सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना नहीं, बल्कि इस द्वीप को एक विकसित आर्थिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र में बदलना है।
सरकार का बड़ा प्लान क्या है?
सरकार की योजना ग्रेट निकोबार को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्रमुख समुद्री गेटवे के रूप में विकसित करने की है। प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बड़े कंटेनर जहाजों को संभाल सकेगा, जबकि एयरफील्ड और नेवल स्टेशन नागरिक और रक्षा दोनों जरूरतों को पूरा करेंगे। टाउनशिप और पावर प्लांट स्थायी आबादी और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देंगे। सरकार का मानना है कि इससे द्वीपों में लंबे समय तक टिकाऊ विकास और भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित होगी।
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ग्रेट निकोबार की लोकेशन इतनी खास क्यों है?
ग्रेट निकोबार दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों के बेहद करीब स्थित है। हिंद महासागर से होकर एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच बड़ी मात्रा में व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र पर कई बड़ी शक्तियों की नजर रहती है। भारत के लिए यह लोकेशन समुद्री निगरानी, व्यापारिक कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है।
भारत को क्या फायदा होगा?
अगर यह परियोजना सफल होती है तो भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर लाभ मिल सकता है। ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के जरिए भारत विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम कर सकता है। इससे शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही एयरफील्ड और नेवल स्टेशन समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और निगरानी क्षमता को मजबूत करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।
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आलोचना क्यों हो रही है और सरकार का जवाब क्या है?
कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों और आलोचकों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट पर्यावरण और स्थानीय इकोसिस्टम पर असर डाल सकता है। वहीं कुछ लोगों का आरोप है कि इसे रणनीतिक परियोजना बताकर कमर्शियल डेवलपमेंट को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, रणनीति का मतलब सिर्फ सैन्य हित नहीं होता, बल्कि आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय उपस्थिति भी उसका हिस्सा है। सरकार का कहना है कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का लक्ष्य द्वीपों में दीर्घकालिक और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।
क्यों माना जा रहा है गेमचेंजर?
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को भारत की समुद्री रणनीति का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह एक साथ व्यापार, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश है। ऐसे समय में जब हिंद महासागर वैश्विक प्रतिस्पर्धा का अहम केंद्र बनता जा रहा है, ग्रेट निकोबार भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर नई ताकत दे सकता है। इसी वजह से इसे सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के समुद्री विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।












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