'मुझे एक ऑब्जेक्ट की तरह देखा', Janhvi Kapoor के ‘पेड्डी’ विवाद पर Jaya Bachchan का छलका घाघरा-चोली वाला दर्द!
Janhvi Kapoor Peddi Controversy Jaya Bachchan Story: तेलुगु फिल्म 'पेड्डी' (Peddi) को लेकर चल रहे विवाद ने एक बार फिर बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में महिलाओं के वस्तुकरण (Objectification) की पुरानी समस्या को सुर्खियों में ला दिया है। राम चरण और जाह्नवी कपूर की इस फिल्म में जाह्नवी के किरदार के चित्रण पर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हो रही है।
इसी विवाद के बीच दिग्गज अभिनेत्री और सांसद जया बच्चन ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं को 'ऑब्जेक्ट' की तरह देखने की संस्कृति की कड़ी निंदा की और अपने करियर का एक अप्रिय अनुभव भी साझा किया। जया बच्चन का यह बयान सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि सिनेमा में महिलाओं की प्रस्तुति पर व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। आइए जानते हैं कि जया बच्चन ने क्या क्या खुलासे किए?

Jaya Bachchan Ghaghra Choli Pain: जया बच्चन का खुलासा, 'मुझे सिर्फ एक ऑब्जेक्ट की तरह देखा गया'
डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जया बच्चन ने कहा कि उनके पूरे करियर में किसी ने उनके साथ हद पार करने की हिम्मत नहीं की, सिवाय एक बार के। उन्होंने बताया कि मुझे निर्देशक द्वारा वस्तु की तरह समझे जाने का केवल एक अप्रिय अनुभव हुआ था। मैंने उसके साथ फिर कभी काम नहीं किया। जया बच्चन इस घटना का जिक्र मनोज कुमार की क्लासिक फिल्म 'शोर' (1972) की शूटिंग के दौरान की घटना से कर रही हैं। फिल्म में उन्होंने एक वेश्या का किरदार निभाया था।

निर्देशक मनोज कुमार चाहते थे कि वह पूरी फिल्म में सिर्फ घाघरा-चोली पहने। जया ने जोर देकर कहा कि वे दुपट्टे से अपना ऊपरी शरीर ढककर ही घाघरा-चोली पहनेंगी। इस असहमति पर काफी विवाद हुआ। जया ने अपना स्टैंड नहीं छोड़ा और बाद में उस निर्देशक के साथ कभी काम नहीं किया।
जया का यह अनुभव दर्शाता है कि 1970 के दशक में भी अभिनेत्रियां सेट पर अपनी गरिमा और सीमाओं के लिए लड़ती थीं। उन्होंने जोर दिया कि ऐसी स्थितियों को सेट पर ही तुरंत रोकना चाहिए, न कि बाद में नुकसान होने के बाद।
What Is Peddi Controversy: 'पेड्डी' विवाद क्या है?

राम चरण और जाह्नवी कपूर अभिनीत 'पेड्डी' एक एक्शन-ड्रामा फिल्म है। फिल्म रिलीज के बाद जाह्नवी के किरदार 'अचियम्मा' के चित्रण पर भारी आलोचना हुई। आलोचकों और दर्शकों का कहना है कि कैमरा बार-बार जाह्नवी की नाभि, क्लीवेज और कमर पर अनावश्यक फोकस करता है। कई सीनों में उन्हें कहानी की जरूरत के बजाय सिर्फ सीन आकर्षण का माध्यम बनाया गया लगता है। सबसे विवादित सीन वह है, जिसमें राम चरण का किरदार जाह्नवी के किरदार को बिना सहमति के चूमता है और बाद में इसे 'प्यार जताने का तरीका' बताकर सही ठहराने की कोशिश की जाती है।

इस सीन ने सहमति (Consent), पुरुषवादी सोच और महिला किरदारों के वस्तुकरण पर जोरदार बहस छेड़ दी। सोशल मीडिया पर PeddiControversy ट्रेंड कर रहा है। कई लोग इसे 'पुरानी सोच' का उदाहरण बता रहे हैं।
Kareena Kapoor Khan On Peddi Controversy: करीना कपूर खान का तीखा जवाब

इस विवाद पर करीना कपूर खान ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पर्दे पर कामुकता का मतलब खुले कपड़े या वस्तुकरण नहीं होता। उन्होंने उदाहरण दिए
- काजोल का 'कभी खुशी कभी गम' का गाना 'सूरज हुआ मद्धम'।
- श्रीदेवी का 'चांदनी' का 'तेरे मेरे होंठों पे'।
- शर्मिला टैगोर का 'आराधना' का 'रूप तेरे मस्ताना', जहां वे पूरी तरह ढकी हुई थीं, फिर भी कामुकता की मिसाल बनीं। करीना का कहना है कि सच्ची कामुकता अभिनय, नजरों और स्क्रीन प्रेजेंस में होती है, न कि सिर्फ बॉडी शो में।
निर्देशक बुची बाबू सना की माफी
आलोचना बढ़ने पर फिल्म के निर्देशक बुची बाबू सना (Buchi Babu Sana) ने 6 जून को माफी मांगी। उन्होंने कहा कि विवादित सीनों को फिल्म से हटा दिया जाएगा और भविष्य में अधिक सावधानी बरतेंगे। हालांकि, माफी के दो दिन बाद भी कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि विवादित संस्करण सिनेमाघरों में अभी भी चल रहा है, जिससे दर्शकों में नाराजगी और बढ़ गई।
बॉलीवुड में महिलाओं का वस्तुकरण: एक पुरानी समस्या
जया बच्चन का बयान इस बहस को नई गहराई देता है। भारतीय सिनेमा में महिलाओं को 'आइटम सॉन्ग', 'ग्लैमर डोल' या 'हीरो की लव इंटरेस्ट' तक सीमित करने की परंपरा लंबी है। 1970-80 के दशक में यह और भी स्पष्ट था, लेकिन आज भी कई बड़े बजट वाली फिल्मों में यही पैटर्न दिखता है। जया बच्चन जैसे दिग्गजों का खुलकर बोलना युवा अभिनेत्रियों के लिए भी मजबूत संदेश है।
जया बच्चन: एक उदाहरण
जया बच्चन हमेशा से अपनी गरिमा और स्टैंड के लिए जानी जाती हैं। अमिताभ बच्चन के साथ उनके रिश्ते, राजनीति और सिनेमा में उनका सफर दिखाता है कि उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। 'शोर' वाली घटना उनके करियर की शुरुआती लड़ाई थी, जिसने उन्हें मजबूत बनाया। आज भी 70 के पार होने के बाद वे खुलकर बोलती हैं, चाहे सिनेमा हो या राजनीति।
बदलाव की जरूरत
'पेड्डी' विवाद अब सिर्फ एक फिल्म का मुद्दा नहीं रह गया है। यह पूरे इंडस्ट्री से सवाल पूछ रहा है कि क्या हम महिलाओं को कहानी का हिस्सा बनाएंगे या सिर्फ सीन सजावट? जया बच्चन का अनुभव याद दिलाता है कि सेट पर 'न' कहना कितना जरूरी है। करीना का उदाहरण बताता है कि बिना वल्गरिटी के भी कामुकता दिखाई जा सकती है।













Click it and Unblock the Notifications