East Champaran लोकसभा सीट पर कभी था कांग्रेस का वर्चस्व, अब है BJP का दबदबा, जानिए इतिहास
East Champaran Seat, Lok Sabha Election 2024: बिहार में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सभी 40 सीटों पर चुनावी मंथन शुरू हो चुका है। राजनीतिक पार्टियों ने रणनीतियां बनानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में आज हम आपको बिहार की पूर्वी चंपारण सीट का सियासी समीकरण और इतिहास बताने जा रहे हैं।
पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण लोकसभा सीट नए परिसीमन के बाद 2009 में अस्तित्व में आया। ग़ौरतलब है कि दोनों सीटों पर भाजपा (2009, 2014 और 2019 लोकसभा) जीत की हैट्रिक लगा चुकी है। 6 विधानसभा सीट (गोविंदगंज, केसरिया, हरसिद्धि, पिपरा, कल्याणपुर और मोतिहारी) वाली सीट पहले मोतिहारी लोकसभा सीट के नाम से जानी जाती था।

अब इस सीट को पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट की संज्ञा दी जाती है, भाजपा के वरिष्ठ नेता राधा मोहन सिंह जीत की हैट्रिक लगाते हुए यहां के मौजूदा सांसद हैं। पूर्वी चंपारण ही वह क्षेत्र है, जहां से नील की खेती के ख़िलाफ़ नील की खेती के विरोध में किसानों आंदोलन किया था। बापू गांधी भी इसके गवाह थे।
मोतिहारी लोकसभा सीट पर कांग्रेस 1952 से 1972 तक लगातार जीत दर्ज करती आई थी। 1977 में जनता पार्टी ने पहली बार कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी की थी। इसके बाद से ही इस सीट पर सियासी समीकरण बदलते चले गए। कभी भाकपा ने तो कभी राजद प्रत्याशी ने पार्टी का परचम बुलंद किया।
मतदाताओं के तादाद की बात की जाए तो इस लोकसभा सीट पर 8.5 लाख के करीब पुरुष मतदाताओं की तादा है, वहीं 7.5 लाख के करीब महिला वोटर्स शामिल हैं। इस सीट पर महिला वोटर्स भी सियासी फ़िज़ा बदलने का हुनर रखती हैं।
2008 में हुए परिसीमन के बाद मोतिहारी से ही पश्चमिमी और पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट अस्तित्व में आया। इसके बाद से ही भाजपा के दिग्गज नेता राधा मोहन सिंह पार्टी के खाते में सीट डालते आ रहे हैं। ग़ौरतलब है कि वह परिसीमन के पहले भी वह तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। वहीं परिसीमन के बाद भी जीत की हैट्रिक लगाते हुए 6 बार सांसद की कुर्सी पर क़ब्ज़ा जमा चुके हैं।












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