Dharmendra Pradhan caste: किस जाति से हैं धर्मेंद्र प्रधान? मोदी-नड्डा ने क्यों बनाया इनको बिहार चुनाव प्रभारी
Dharmendra Pradhan Bihar BJP Poll Incharge: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने चुनाव प्रभारियों का ऐलान करके बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार का चुनाव प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ गुजरात बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटिल और उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। यह तिकड़ी साफ संकेत देती है कि बीजेपी जातीय समीकरणों और संगठनात्मक ताकत को ध्यान में रखकर मैदान में उतरने जा रही है।
वनइंडिया हिंदी की खास सीरिज 'जाति की पाति' में आज हम आपको बताएंगे धर्मेंद्र प्रधान की जातीय पहचान और राजनीति में उनकी अहमियत के बारे में। सिर्फ इतना ही नहीं, हम यह भी समझेंगे कि आखिर बीजेपी ने क्यों उन्हें बिहार जैसे बड़े चुनाव का मुख्य चुनाव प्रभारी बनाया है। यह फैसला सिर्फ नाम भर की घोषणा नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपा है बड़ा राजनीतिक समीकरण और गहरी रणनीति।

🟡 धर्मेंद्र प्रधान की जाति क्या है? (Dharmendra Pradhan caste)
56 साल के धर्मेंद्र प्रधान कुर्मी जाति से आते हैं और वे ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। खुद संसद में बोलते हुए उन्होंने यह स्वीकार किया था। बिहार की राजनीति में गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए बीजेपी ने प्रधान और मौर्य दोनों पर दांव लगाया है। जबकि सीआर पाटिल मराठा हैं, जिनकी मौजूदगी से फॉरवर्ड कास्ट को संदेश देने की कोशिश की गई है। यह जातीय समीकरण बीजेपी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है, क्योंकि राज्य में जाति का असर नतीजों पर सीधे पड़ता है।
बिहार की राजनीति में जाति अहम फैक्टर है। नीतीश कुमार खुद को कुर्मी नेता के तौर पर स्थापित कर चुके हैं। ठीक वैसे ही, ओडिशा में धर्मेंद्र प्रधान भी कुर्मी खानदायत जाति के बड़े नेता माने जाते हैं। बीजेपी चाहती है कि प्रधान की नियुक्ति से बिहार के गैर-यादव ओबीसी को सीधा संदेश मिले और नीतीश कुमार से जातीय स्तर पर बैलेंस भी कायम रहे।

🟡 धर्मेंद्र प्रधान का बिहार से पुराना रिश्ता
धर्मेंद्र प्रधान के लिए बिहार नई जिम्मेदारी नहीं है। साल 2010 में जब वे महज 40 साल के थे, उन्हें बिहार का सह प्रभारी बनाया गया था। उस वक्त उनकी टीम में अरुण जेटली और अनंत कुमार जैसे बड़े नेता थे। उसी चुनाव में एनडीए ने 206 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। इसके बाद 2015 में भी उन्हें सह प्रभारी बनाया गया। दिलचस्प है कि तब भी उनके साथ सीआर पाटिल ही चुनाव देख रहे थे। हालांकि, उस चुनाव में आरजेडी-जेडीयू गठबंधन ने बीजेपी को हराया था।
🟡 धर्मेंद्र प्रधान की चुनावी रणनीतिकार के तौर पर पहचान
धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्हें पार्टी लगातार मुश्किल राज्यों में भेजती रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और हाल ही में हरियाणा जैसे राज्यों की चुनावी कमान उन्होंने संभाली। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव में उनकी रणनीति की गूंज पूरे देश ने सुनी। यही कारण है कि उन्हें पार्टी का भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता है।

🟡 नीतीश कुमार और धर्मेंद्र प्रधान से खास रिश्ते
बिहार के सीएम नीतीश कुमार और धर्मेंद्र प्रधान के रिश्ते किसी से छुपे नहीं हैं। नीतीश कुमार का परिचय उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री देबेंद्र प्रधान से वाजपेयी सरकार के समय का है। इसी नजदीकी ने आगे चलकर धर्मेंद्र प्रधान और नीतीश के बीच व्यक्तिगत भरोसे को मजबूत किया।
2012 में जब बीजेपी ने प्रधान को बिहार से राज्यसभा भेजा, तो यह रिश्ता और गहरा हुआ। भले ही बाद में जिम्मेदारियां बदलती रहीं, लेकिन नीतीश और प्रधान के रिश्ते मधुर बने रहे।
🟡 मोदी-नड्डा का मास्टरस्ट्रोक
बीजेपी का यह दांव सिर्फ जातीय गणित तक सीमित नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान संगठन और रणनीति दोनों में महारत रखते हैं। उनकी छवि जमीन से जुड़े नेता की है और विपक्षी दलों के हमलों का करारा जवाब देने में माहिर माने जाते हैं। मोदी-नड्डा की जोड़ी चाहती है कि बिहार चुनाव में जाति के साथ-साथ संगठनात्मक मजबूती और रणनीतिक अनुभव दोनों का फायदा उठाया जाए।
धर्मेंद्र प्रधान की नियुक्ति सिर्फ चुनाव प्रभारी भर की नहीं, बल्कि यह बिहार की जटिल राजनीति में बीजेपी का बड़ा दांव है। कुर्मी समाज से आने वाले प्रधान जातीय संतुलन साधते हैं, जबकि उनकी रणनीतिक समझ पार्टी को चुनावी जमीन पर मजबूती देती है। नीतीश कुमार से उनकी नजदीकी, पिछले अनुभव और संगठन पर पकड़ उन्हें बीजेपी के लिए डबल एडवांटेज वाला चेहरा बनाती है। यही वजह है कि बिहार चुनाव 2025 में उनकी भूमिका सबकी नजरों में है।
🟡 Dharmendra Pradhan Biography: धर्मेंद्र प्रधान का परिचय
🔹 धर्मेंद्र प्रधान काभारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपने काम और रणनीतिक सोच से केंद्र सरकार में लगातार अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। वे जुलाई 2021 से भारत सरकार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री (2017-2021), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री (2014-2021) और इस्पात मंत्री (2019-2021) रह चुके हैं।
🔹धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी शिक्षा तालचेर ऑटोनॉमस कॉलेज और उत्कल विश्वविद्यालय से पूरी की। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र प्रधान आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक माने जाते हैं।
🔹 2014 से लगातार वे केंद्रीय मंत्रीमंडल का हिस्सा रहे हैं। वे 3 अप्रैल 2018 से 2 अप्रैल 2024 तक मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे। इससे पहले वे 14वीं लोकसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने ओडिशा की संबलपुर सीट से जीत हासिल की और लोकसभा में वापसी की।
🔹 उनका राजनीतिक करियर साफ तौर पर बताता है कि वे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि बीजेपी की चुनावी रणनीति के भी मास्टरमाइंड हैं। यही वजह है कि पार्टी बार-बार उन पर भरोसा जताती है और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपती है।
🟡 Dharmendra Pradhan Net Worth: धर्मेंद्र प्रधान की कितनी संपत्ति है?
धर्मेंद्र प्रधान की कुल संपत्ति 3 करोड़ रुपये है। धर्मेंद्र प्रधान के पास देनदारियां 89 लाख रुपये की है। धर्मेंद्र प्रधान के पास एक लाख रुपये कैश है। धर्मेंद्र प्रधान बैंकों, वित्तीय संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में 61 लाख रुपये का निवेश है। कंपनियों में बांड, डिबेंचर और शेयर में 2 लाख का निवेश है। LIC और पोस्टल सेविंग में 38 लाख रुपये का निवेश है। धर्मेंद्र प्रधान के पास 26 लाख के गहने हैं।
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