Dhamdaha Assembly Seat: धमदाहा सीट पर किसका कब्जा? जदयू का गढ़, लेकिन मुस्लिम वोट बदल सकते हैं समीकरण
Dhamdaha Assembly Seat: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं। पूर्णिया जिले की धमदाहा विधानसभा सीट राजनीतिक हलचलों के केंद्र में है। इस सीट पर बीते दो दशकों से जदयू की नेता और मंत्री लेशी सिंह का दबदबा रहा है। लेकिन इस बार मुकाबला आसान नहीं दिख रहा है। मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण और एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर से धमदाहा में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावनाएं बन रही हैं।
लेशी सिंह का राजनीतिक वर्चस्व
धमदाहा सीट पर 2000 में राजनीति में कदम रखने के बाद से लेशी सिंह लगातार प्रभावी रहीं। उन्होंने अब तक छह बार विधानसभा चुनाव जीता है। केवल अक्तूबर 2005 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वे न सिर्फ नीतीश कुमार की करीबी मानी जाती हैं बल्कि इलाके में विकास कार्यों और व्यक्तिगत संपर्क की वजह से अपनी पैठ बनाई है।

साल 2020 में उन्होंने राजद के दिलीप कुमार यादव को 33,594 वोट से हराया था। इसके बाद वे नीतीश सरकार में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री बनीं। लंबे समय से उनके प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ के कारण धमदाहा को जदयू का गढ़ माना जाता है।
मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका
धमदाहा विधानसभा सीट पर लगभग 18% मुस्लिम वोटर हैं। सीमांचल की राजनीति में यह वोट बैंक निर्णायक माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में जदयू और भाजपा के रिश्ते से मुस्लिमों का झुकाव घटा है। 2024 लोकसभा चुनाव में सीमांचल के कई हिस्सों में भाजपा को बढ़त मिली, लेकिन मुस्लिम मतदाता बड़े पैमाने पर राजद-कांग्रेस के पक्ष में गए।
युवाओं में असंतोष और AIMIM जैसी पार्टियों की सक्रियता ने वोट बैंक को और अस्थिर बना दिया है। हालांकि अभी तक धमदाहा में AIMIM को सीधी पकड़ नहीं मिल पाई है, लेकिन मुस्लिम वोटों में सेंधमारी का खतरा बना हुआ है।
संभावित उम्मीदवार
जदयू: लेशी सिंह (वर्तमान विधायक एवं मंत्री)
राजद: दिलीप कुमार यादव (पिछले कई चुनावों से लगातार चुनौती देते रहे हैं)
कांग्रेस: स्थानीय मुस्लिम चेहरा उतारने की तैयारी (संभावना बनी हुई है)
AIMIM / छोटे दल: वोटकटवा प्रभाव डाल सकते हैं
स्थानीय मुद्दे
बाढ़ और जलजमाव: कोसी-सीमांचल बेल्ट का स्थायी संकट।
रोज़गार और पलायन: युवाओं की सबसे बड़ी चिंता।
स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: ग्रामीण इलाकों में अस्पताल व डॉक्टरों की अनुपलब्धता।
सड़क और कनेक्टिविटी: राज्य सरकार ने कुछ काम किया है, लेकिन अभी भी ढांचा कमजोर है।
अपराध और सुरक्षा: छिटपुट घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल।
चुनावी चुनौतियां
लेशी सिंह के लिए: लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण एंटी-इंकम्बेंसी। मुस्लिम वोटों का राजद-कांग्रेस की ओर झुकाव।
राजद के लिए: यादव-मुस्लिम समीकरण को पूरी तरह सक्रिय करना। पिछली बार बड़ी हार की भरपाई करना।
कांग्रेस के लिए: मुस्लिम वोटों पर प्रभाव बढ़ाने के लिए मजबूत उम्मीदवार उतारना।
AIMIM व छोटे दल: यदि मुस्लिम वोटों में सेंधमारी कर पाए, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
दिलचस्प होगा मुकाबला
धमदाहा विधानसभा सीट 2025 में भी बेहद दिलचस्प रहने वाली है। जहां एक ओर लेशी सिंह अपने पुराने काम, संगठन और नीतीश कुमार की छवि के दम पर चुनावी मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर राजद-कांग्रेस मुस्लिम-यादव समीकरण पर दांव लगा रहे हैं। मुकाबला अगर त्रिकोणीय होता है तो छोटे दल भी हार-जीत का अंतर तय कर सकते हैं। यानी इस बार धमदाहा में जीत का रास्ता मुस्लिम मतदाताओं और स्थानीय मुद्दों से होकर ही गुजरेगा।














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