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Proud Daughters: पिता के लिए बेटियों ने निभाया बेटे का फ़र्ज़, कहा - इसलिए बेटे का होना ज़रूरी है

Proud Daughters: बिहार के किशनगंज जिले से एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसे देखर आपकी आंखें भी भर आएंगी। ग्रामीण भी गमज़दा हैं, लेकिन गांव की बेटियों पर फख्र महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों ने तोड़े कई मिथक

Daughters performed funeral of their father as like the duty of a son in kishanganj bihar

Proud Daughters: बिहार की बेटियां बेटों से किसी भी काम में कम नहीं है, लेकिन आज ज़माने में भी लोग बेटी होना ज़िल्लत समझते हैं। जबकि परिवार में अगर बेटा नहीं हो तो बेटियां हर वो फ़र्ज़ अदा करती हैं, जो बेटे को करना चाहिए। बिहार के किशनगंज जिले से एक ऐसी मार्मिक तस्वी सामने आई है, जिसकी खबर पढ़ कर आपकी आखों में भी आंसू आ जाएंगे। पिता की अर्थी को कांधा देते हुए जब बेटियां घर से निकली तो ग्रामीणों के भी आंखों में आंसू आ गए। ग्रामीणों ने कहा कि आज बेटा तो बेटियों के दुखों को बांट लेता। पिता के अर्थी को कांधा देकर बहनों के आंसूओं को पोछ लेता, उनके गम के बोझ को हलकर कर लेता। परिवार में बेटे का होना लोग इसलिए भी ज़रूरी समझते हैं।

बेटियों को देख भावुक हुए ग्रामीण

बेटियों को देख भावुक हुए ग्रामीण

बेटियों द्वारा पिता की अर्थी को कांधा देने का नज़ारा देखने के बाद ग्रामीण भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि बेटियों के सिर पर दुखों का पहाड़ टूट गया है, लेकिन तीनों बेटियों ने जिस तरह से बेट की तरह फ़र्ज़ अदा किया है यह फख्र की बात है। बाप की कमी तो हम लोग पूरा नहीं कर सकते लेकिन इन बेटियों को अपनी बच्ची की तरह ही सम्मान देंगे। किशनगंज में जब पिता की अर्थी निकली को बेटियों ने कांधा दिया क्योंकि उनका संसार बेटियां ही थीं। बेटियों के हौसले की ग्रामीण जमकर तारीफ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि बेटियों को किसी भी काम के लिए कम नहीं आंका जाए। इससे समाज में एक अच्छा संदेश गया है।

बेटियों ने निभाई अंतिम संस्कार की परंपरा

बेटियों ने निभाई अंतिम संस्कार की परंपरा

बेटियों ने बेटे की तरह सिर्फ कांधा ही नहीं दिया बल्कि मुखाग्नि की रस्म भी अदा की। परिवार में सिर्फ तीन बेटियां ही थीं, उन्होंने ही क्रिया क्रम किया, छोटी बेटी ने पिता को मुखाग्नि दी। पूरे गांव में लोग तीनों बेटियों की मिसाल दे रहे हैं। किशनगंज के रौलबाग मुहल्ले के निवासी मिथिलेश कुमार कई दिनों से बीमार चल रहे थे। पिता की देखभाल तीनों बेटियां ही करती थी, लेकिन कभी भी भाई की कमी महसूस नहीं हुई। वह तीनों सादगी से अपनी ज़िंदगी गुज़ार रही थीं, लेकिन पिता का साया उठ जाने से परिवार में मायूसी छा गई है।

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    बेटियों ने तोड़े कई समाजिक मिथक- ग्रामीण

    बेटियों ने तोड़े कई समाजिक मिथक- ग्रामीण

    स्व. मिथिलेश कुमार की बड़ी बेटी MGM Bsc नर्सिंग की स्टूडेंट है, मझली बेटी प्रियंका कुमारी MGM में बतौर स्टाफ नर्स काम कर रही हैं। वहीं सबसे छोटी बेटी लक्ष्मी कुमारी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बतौर CHO काम कर रही है। ग्रामीणों ने कहा कि अंतिम संस्कार के रस्मों को लेकर यह परंपरा चली आ रही थी कि महिलाओं क्रिया क्रम से दूर रखा जाए। लेकिन इन बेटियों ने समाज की मानसिकता को बदलने का काम किया है। शव यात्रा में शामिल होकर ग्रामीणों ने बेटियों की हौसला अफजाई की और इसके साथ उन्हें ढांढस भी बंधाया।

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