चिराग की 'सीट नीति', क्या NDA के लिए बनेंगे नई सिरदर्द? जानिए 30 सीटों पर दावे के पीछे का पूरा गणित
Chirag Paswan Bihar Politics: बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की हलचल अब ज़मीन पर दिखने लगी है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही खेमों में सीट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कम से कम 30 सीटों पर दावेदारी कर सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
चिराग की यह मांग एनडीए के भीतर नई राजनीतिक खींचतान की शुरुआत मानी जा रही है। ये सिर्फ मांग नहीं है, बल्कि एक तरह से अपनी ताकत दिखाने और दबाव बनाने की रणनीति भी है। 2020 के विधानसभा चुनाव में अकेले लड़कर उन्होंने नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती पेश की थी। अब 2025 से पहले एक बार फिर चिराग उसी तेवर में नज़र आ रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि, चिराग आखिर किस आधार पर 30 सीटों की मांग कर रहे हैं? उनकी राजनीतिक गणित क्या कहती है? और इस गणित को वास्तविकता में बदलने वाली केमिस्ट्री कौन सी है?

दिल्ली की कुर्सी छोड़ बिहार की जंग में उतरेंगे चिराग
अब यह स्पष्ट हो चला है कि चिराग पासवान सिर्फ केंद्र की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि बिहार की सियासत में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हाल ही में आयोजित एक चुनावी सभा में उन्होंने एलान किया कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। मंच से हुंकार भरते हुए चिराग ने कहा, हर सीट पर चिराग पासवान खड़ा होगा, यानी पार्टी का हर प्रत्याशी न सिर्फ उनके नेतृत्व और विचारधारा का प्रतिनिधित्व करेगा, बल्कि एक वैकल्पिक राजनीति का संदेश भी देगा। इस घोषणा से यह साफ़ संकेत मिल रहा है कि चिराग गठबंधन में अधिक से अधिक सीटों की मांग को लेकर रणनीतिक दबाव बना रहे हैं।
अकेले चुनाव लड़ने की दे चुके हैं चेतावनी
वहीं चिराग पासवान और उनकी पार्टी के नेता सार्वजनिक मंचों पर जहां 40 से 50 सीटों पर दावा करते नज़र आते हैं, वहीं कई बार अकेले चुनाव लड़ने की चेतावनी भी देते हैं। हालांकि, पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चिराग की वास्तविक मांग कम से कम 30 सीटों की है। इसके पीछे उनकी एक ठोस राजनीतिक गणित है।
30 सीटों की मांग के पीछे चिराग की 'गणित'
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने पिछले दो लोकसभा चुनावों में 100 फीसदी स्ट्राइक रेट के साथ शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी ने बिहार में अपनी सभी 5 में से 5 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। चिराग पासवान की रणनीति के अनुसार, हर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत औसतन 6 विधानसभा सीटें आती हैं - इस आधार पर 5 लोकसभा सीटों से सीधा गणित 6×5 = 30 विधानसभा सीटों पर दावा करने का बनता है।
इसके अलावा 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने अलग राह चुनते हुए जेडीयू के खिलाफ अकेले मोर्चा खोला था। भले ही उन्हें ज़्यादा सीटें नहीं मिलीं, लेकिन उनके प्रत्याशियों ने 30 से अधिक सीटों पर जेडीयू को करारी टक्कर दी और सीटें गंवाने पर मजबूर कर दिया। इसी 'कटिंग वोट' रणनीति के चलते वे 2025 के लिए गंभीर सियासी दावेदार के रूप में देखे जा रहे हैं। इन्हीं ठोस आधारों और पिछली चुनावी चालों के बूते चिराग पासवान अब एनडीए से कम से कम 30 सीटों पर मजबूत दावे के साथ बातचीत की तैयारी में हैं।
चिराग की वोटों की 'केमिस्ट्री'
बिहार की राजनीति में चिराग पासवान सिर्फ एक युवा चेहरा नहीं, बल्कि रणनीति और गणित का संतुलन बिठाने वाले खिलाड़ी बनते जा रहे हैं। लोकसभा चुनावों में 100% स्ट्राइक रेट और जेडीयू को नुकसान पहुंचाने वाली उनकी चालों ने यह साफ कर दिया है कि वे वोटों की 'केमिस्ट्री' को बखूबी समझते हैं।
दलित मतदाता, खासकर पासवान समुदाय पर उनकी मजबूत पकड़ है, जो कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इसके साथ-साथ, युवा वोटर, मोदी समर्थक और एलजेपी की पारंपरिक ताकत को जोड़कर चिराग एक ऐसा वोट बैंक खड़ा कर रहे हैं, जिसे नजरअंदाज करना अब एनडीए के लिए आसान नहीं है। यही वजह है कि वे बार-बार कहते हैं 'हर सीट पर चिराग पासवान खड़ा होगा' यानी यह सिर्फ राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि सोची-समझी केमिस्ट्री का हिस्सा है, जिससे 2025 की लड़ाई को नई दिशा दी जा सके।
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