बिहार: जातीय जनगणना के लिए नीतीश कुमार के सामने अब भी है बड़ी चुनौती, जानिए कैसे ?
सबसे पहले जगणना के वक़्त यह ध्यान रखना होगा की जातीय और उप-जातीय गणना की वजह से रोहिंग्या और बांग्लादेशी का नाम ना सूची में शामिल हो जाए।
पटना, 4 जून 2022। बिहार में जातीय जनगणना को लेकर समर्थन तो सभी राजनीतिक दलों ने दे दिया है लेकिन नीतीश कुमार के सामने अभी भी जनगणा कराने के लिए बड़ी चुनौती है। नीतीश कुमार ने जातीय जनगणना पर ज़ोर देते हुए लगभग सभी दलों का समर्थन तो ले लिया लेकिन जनगणना कराते वक्त मुश्किलें आ सकती हैं। सबसे पहले जगणना के वक़्त यह ध्यान रखना होगा की जातीय और उप-जातीय गणना की वजह से रोहिंग्या और बांग्लादेशी का नाम ना सूची में शामिल हो जाए। क्योंकि बाद में वह उसी को आधार बनाते हुए खुद के हिंदुस्तानी नागरिक होने का दावा कर सकता है।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने दूसरी चुनौती यह भी है कि सीमांचल क्षेत्र मुस्लिम बहुल है। गणना के वक्त वहां यह सुनिश्चित करना की कौन अगले वर्ग का है और कौन पिछले वर्ग का है काफ़ी मुश्किल हो सकता है। क्योंकि वहां अपर वर्ग पिछड़ों की गिनती में खुद को लेकर पिछड़े वर्ग की हकमारी कर सकते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना की कौन सही है और कौन ग़लत है काफी मुश्किल हो सकता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनकी वजह से पिछड़ा वर्ग के लोगों की हकमारी हुई है।
बिहार में जातीय जनगणना को लेकर एक और मुश्किल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने है कि केंद्र सरकार जातीय जनगणना में होने वाले ख़र्च वहन नहीं करेगी। राज्य सरकार को ख़ुद अपने राजस्व से जातीय जनगणना के लिए ख़र्च उठाना पड़ेगा। ग़ौरतलब है कि सीएम नीतीश कुमार ने फिर से साफ कर दिया है कि जातीय जनगणना की तैयार शुरू हो चुकी है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि 'जात के आधार पर जनगणना पर फैसला हो चुका है, इसकी तैयारी शुरू की जा चुकी है। एख महीने में विभाग के द्वारा काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बाबत हम दलों को सूचना देने के साथ उनके सुझाव लेते रहेंगे। सभी समुदायों के पक्ष में जनगणना होगा और हर एक परिवार, हर धर्म के लोगों की जानकारी ली जाएगी।
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