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Bihar: इंसानियत हुई शर्मसार! श्मशान तक को तरस गई अर्थी, बेबस बेटे ने क्यों सजाई सड़क पर मां की चिता?

'कितना है बद-नसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिए, दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में...' बहादुर शाह जफर का लिखा शेर, इसमें जफर कहते हैं कि वो कितने अभागे और बदकिस्मत हैं कि मरने के बाद भी अपने वतन में दफन होने के लिए दो गज (मुश्किल से 6 फीट) जमीन भी मयस्सर नहीं हुई, बिहार के वैशाली की एक दलित महिला की कहानी सुनकर याद आ गई, जिस महिला को मरने के बाद श्मशान तक नसीब ना हुआ।

बिहार के वैशाली (Bihar, Vaishali) जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि आधुनिक समाज की संवेदनाओं पर भी गहरा घाव किया है। गोरौल प्रखंड में एक 91 वर्षीय दलित बुजुर्ग महिला, चमकी देवी के निधन के बाद उनके परिवार को अंतिम विदाई के लिए श्मशान की जमीन तक नसीब नहीं हुई।

Bihar Vaishali

अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके रास्तों और संवेदनहीनता के चलते परिजनों को मजबूरन सड़क के बीचों-बीच चिता सजानी पड़ी। यह घटना उस बिहार की है जहां विकास और सामाजिक न्याय के बड़े-बड़े नारे गूंजते हैं। अंतिम संस्कार जैसे बुनियादी अधिकार के लिए एक गरीब परिवार का घंटों संघर्ष करना और फिर हारकर सड़क पर ही दाह संस्कार करना, व्यवस्था की विफलता की पराकाष्ठा है।

वैशाली का शर्मनाक सच, अतिक्रमण ने रोकी अंतिम यात्रा

वैशाली जिले के गोरौल प्रखंड में मृतका चमकी देवी के अंतिम संस्कार के दौरान जो हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि श्मशान घाट तक जाने वाला पारंपरिक रास्ता अब दुकानों और अवैध निर्माणों के कारण पूरी तरह बंद हो चुका है।

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रास्ता नहीं मिला, तो बीच सड़क बनी चिता

महिला के बेटे संजीत मांझी ने भारी मन से बताया कि जब वे शव लेकर निकले, तो रास्ते में बनी दुकानों और अन्य निर्माणों ने उनका रास्ता रोक दिया। परिवार ने वहां मौजूद लोगों से रास्ता देने के लिए घंटों मिन्नतें कीं, लंबी बहस हुई, लेकिन पत्थर दिल अतिक्रमणकारियों का मन नहीं पसीजा। श्मशान तक पहुंचने का कोई दूसरा विकल्प न देख, मजबूर होकर परिवार ने उसी जगह सड़क पर अंतिम संस्कार कर दिया जहां उन्हें रोका गया था।

सालों पुराना विवाद, निजी जमीन और दुकानों का जाल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या कोई अचानक पैदा हुई विपदा नहीं है। पहले ग्रामीण श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए एक निजी जमीन के रास्ते का उपयोग करते थे। समय के साथ उस रास्ते पर मंदिर और दुकानें बना दी गईं। अतिक्रमण इतना बढ़ गया कि अब वहां से अर्थी ले जाना भी नामुमकिन हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, हर बार किसी की मृत्यु होने पर यही स्थिति पैदा होती है, लेकिन प्रशासन ने कभी स्थायी समाधान निकालने की जहमत नहीं उठाई।

वीडियो वायरल होने पर जागा प्रशासन, डीएम ने किया दौरा

जब सड़क पर जलती चिता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और चौतरफा थू-थू शुरू हुई, तब जाकर प्रशासनिक अमला नींद से जागा। वैशाली की जिलाधिकारी (DM) वर्षा सिंह स्वयं पुलिस बल और अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। डीएम ने स्वीकार किया कि महिला का अंतिम संस्कार सड़क पर ही किया गया है।

जांच में पाया गया कि निजी जमीन पर बनी दुकानों के कारण श्मशान का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है। इस दौरान गांव के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य भी मौजूद रहे। प्रशासन ने अब अतिक्रमण हटाने और रास्ते के विवाद को सुलझाने का आश्वासन दिया है।

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