Bihar Politics: बाहुबली आनंद मोहन के JDU में शामिल होने के बाद क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?
Bihar Politics, Patna News: चुनावी मौसम आते ही राजनेताओं के दल बदलने की ख़बर भी सामने आने लगती है। इसी कड़ी में अब पूर्व सांसद बाहुबली आनंद सिंह के सपरिवार दल बदलने की चर्चाओं ने ज़ोर पकड़ लिया है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही पूर्व सांसद बाहूबली आनंद मोहन अपने परिवार (पत्नी लवली आनंद और पुत्र चेतन आनंद) के साथ जदयू का दामन थाम सकते हैं।
आपको बता दें कि आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद राजद से विधायक हैं। ठाकुर विवाद पर चेतन आनंद ने ही अपनी पार्टी के ही राज्यसभा सांसद मनोज झा पर तल्ख टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद बाहुबली आनंद मोहन ने भी कहा था कि अगर मैं होता तो ज़ुबान खींचकर उछाल देता।

पिता और पुत्र द्वारा पार्टी नेता ही के खिलाफ बयान देने पर लालू और तेजस्वी ने बाहुबली परिवार को बयानबाज़ी करने से परहेज़ करने की हिदायत दी थी। वहीं लालू और तेजस्वी राज्यसभा सांसद मनोज झा की वक़ालत करते हुए उन्हें सही ठहराया था।
यादव परिवार के इस स्टैंड के बाद से ही आनंद मोहन और उनका परिवार ख़फ़ा चल रहा है। चर्चा यह भी है कि आनंद मोहन सपरिवार लालू यादव से मुलाक़ात करने गए थे लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया था। इसके बाद से आनंद मोहन ने राजद से किनारा करने का मन बना लिया था।
बाहुबली आनंद मोहन ने हाल ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाक़ात की थी, ग़ौरतलब है कि जेल नियमावली में बदलाव कर इसी साल नीतीश कुमार ने आनंद मोहन को जेल से रिहाई की राह आसान की थी। इन्हीं सब मामलों को देखते हुए यह क़यास लगाई जा रही है कि, आनंद मोहन राजद को अलविदा कह सकते हैं।
आनंद मोहन अगर जदयू में शामिल होते हैं तो प्रदेश का सियासी समीकरण कैसा रहेगा। आनंद मोहन अगर जदयू में शामिल होते हैं तो राजपूत वोट बैंक में नीतीश कुमार सेंधमारी करने में कामयाब हो सकते हैं। बिहार की 8 लोकसभा सीटों पर राजपूतों का वर्चस्व देखने को मिलता है।
2024 के लोकसभा चुनाव में राजपूत वोट बैंक के सहारे जीत का परचम लहराने के लिए जदयू के पास आनंद मोहन अच्छा मोहरा हो सकते हैं। जाति आधारित गणना रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में राजपूत समुदाय 3.45 फीसदी है। यही वजह है कि सभी सियासी दल राजपूत समुदाय के रहनुमा को अपने पाले में लाकर चुनावी दांव आज़माना चाह रही है।












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