वक्फ पर बगावत, मोदी का विरोध... फिर भी नीतीश ने दिया बड़ा इनाम! JDU का मास्टरस्ट्रोक या मजबूरी?
Bihar Politics: बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा और राजनीतिक रूप से अहम फैसला लिया है। उन्होंने जेडीयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद गुलाम रसूल बलियावी को बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस कदम को चुनावी साल में डैमेज कंट्रोल की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। बलियावी न सिर्फ वक्फ संशोधन विधेयक का खुलकर विरोध कर चुके हैं, बल्कि कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित बयान भी दे चुके हैं। उन पर मुस्लिम समुदाय को भड़काने के आरोप भी लगे हैं। इसके बावजूद नीतीश कुमार ने बीजेपी की संभावित नाराजगी की परवाह किए बिना उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और सवाल उठ रहे हैं। कौन हैं गुलाम रसूल बलियावी? जेडीयू के फैसलों पर सवाल उठाने के बावजूद उन्हें इतनी अहम भूमिका क्यों दी गई? क्या यह महज़ अल्पसंख्यक वोटबैंक को साधने की कोशिश है? इस रिपोर्ट में जानिए बलियावी की पृष्ठभूमि, उनका राजनीतिक सफर और इस फैसले के पीछे की संभावित रणनीति।

कौन हैं गुलाम रसूल बलियावी?
गुलाम रसूल बलियावी (Ghulam Rasool Balyavi) बिहार में मुस्लिम समुदाय के एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी बलियावी की राजनीतिक सक्रियता मुख्यत बिहार और झारखंड में रही है। वर्तमान में वे जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने यह जिम्मेदारी 21 मार्च 2023 से संभाली है। बलियावी 23 जून 2014 से 7 जुलाई 2016 तक राज्यसभा के सदस्य रहे, जहां उन्होंने बिहार का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें वर्ष 2014 में उपचुनाव के माध्यम से राज्यसभा भेजा गया था। इसके बाद वे 8 जुलाई 2016 से 7 जुलाई 2023 तक बिहार विधान परिषद के नामांकित सदस्य के रूप में सक्रिय रहे। सिर्फ राजनीति ही नहीं, बलियावी सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं। वे 'कौमी इत्तेहाद मोर्चा' नामक एक गैर-सरकारी बरेलवी संगठन के संस्थापक हैं, जो मुस्लिम समाज से जुड़े सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य करता है।
कुछ दिन पहले पार्टी छोड़ने का लिया था फैसला?
कुछ दिनों पहले गुलाम रसूल बलियावी ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) के रुख पर खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने न सिर्फ पार्टी लाइन से हटकर बिहारभर में विरोध प्रदर्शन किया, बल्कि संसद में जेडीयू द्वारा विधेयक के समर्थन में वोटिंग करने के बाद उन्होंने मीडिया के सामने पार्टी छोड़ने तक की बात कह दी थी। उनकी नाराजगी को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद किसी तरह मामला शांत हुआ। माना जा रहा है कि इसी असंतोष को थामने और अल्पसंख्यक समुदाय को साधने के लिए जेडीयू ने बलियावी को बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। बलियावी का सामाजिक संगठन 'कौमी इत्तेहाद मोर्चा' बिहार के मुसलमानों में अच्छी पकड़ रखता है, शायद यही वजह है कि,चुनावी साल में नीतीश कुमार ने गुलाम रसूल बलियावी को बड़ा पद देकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिश की।
नीतीश कुमार ने बदला रुख
दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार को आम तौर पर अपनी पार्टी लाइन से अलग जाने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने के लिए जाना जाता है, उन्होंने इस बार एकदम उल्टा रुख दिखाया। उदाहरण के लिए, प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह जैसे कद्दावर नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। लेकिन बलियावी के मामले में उन्हें सजा नहीं, बल्कि सम्मान दिया गया। इससे साफ होता है कि गुलाम रसूल बलियावी की उपयोगिता और राजनीतिक महत्व को नीतीश कुमार बखूबी समझते हैं। यही वजह है कि उन्होंने बलियावी को एक बड़ा पद देकर न सिर्फ उन्हें साधने की कोशिश की है, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी देने का प्रयास किया है कि जेडीयू मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर है।
अल्पसंख्यक आयोग में कौन-कौन शामिल?
बिहार सरकार ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य अल्पसंख्यक आयोग का पुनर्गठन करते हुए इसकी नई टीम की घोषणा की है। इस बार आयोग को अधिक प्रतिनिधित्व और विविधता देने की कोशिश की गई है।
गुलाम रसूल बलियावी को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
लखविंदर सिंह (पटना सिटी) और मौलाना उमर नूरानी (गया) को उपाध्यक्ष बनाया गया है।
आयोग में कुल 11 सदस्य होंगे, जिनमें 1 अध्यक्ष, 2 उपाध्यक्ष और 8 सदस्य शामिल हैं। इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, जो पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगा।
अन्य सदस्य इस प्रकार हैं
- मुकेश जैन - बेगूसराय
- अफरोजा खातून - नवादा
- अशरफ अली अंसारी - सिवान
- शमशाद आलम - जहानाबाद
- तुफैल अहमद खान - सारण
- शिशिर दास - किशनगंज
- राजेश जैन - मुंगेर
- अजफर शमसी
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