बिहार में बेटा-बेटी से लेकर बहनोई तक को टिकट, इन 5 कैंडिडेट्स को मिला पॉलिटिकल बैकग्राउंड का फायदा

Bihar Politics: लोकसभा चुनाव नजदीक है और ऐसे में सभी पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर रही हैं। राजनीति हो या फिल्म इंडस्ट्री 'नेपोटिज्म' यानी परिवारवाद का आरोप अक्सर लोगों पर लगता रहता है। खास कर राजनीति में अक्सर ऐसा देखा गया है कि एक दल के नेता दूसरे दल पर भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहते हैं।

दिलचस्प बात ये है कि एक-दूसरे पर परिवारवाद को लेकर हमलावर ये नेता खुद कभी भाई-भतीजावाद करने से पीछे नहीं हटते। चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद कैंडिडेट के जो नाम सामने आये हैं उसमें भी परिवारवाद की कुछ झलक देखने को मिल रही है। हालांकि, पक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर इसको लेकर सवाल तो खड़े कर रही है लेकिन जब बात अपने पर आती है फिर उनकी सुई जातीय समीकरण पर आकर अटक जाती है।
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बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और राष्ट्रिय जनता दल (आरजेडी) ने प्रत्याशी के नामों की घोषणा कर दी है। ऐसे में बिहार की राजनीति के 5 बड़े राजनीतिक परिवार के नये सदस्य 2024 के लोकसभा चुनाव में मैदान में नजर आएंगे। हालांकि, इसमें से दो चेहरे पहले से ही राजनीति में एंट्री कर चुके हैं लेकिन, लोकसभा चुनाव में ये पहली दफा अपना भाग्य आजमाएंगे।

इस बार बिहार की सियासत में लालू परिवार के एक नए सदस्य की एंट्री होने जा रही है। पूरी तरह राजनीति में शामिल इस परिवार की दूसरी बेटी, यानी लालू यादव की बिटिया रोहिणी आचार्य इस बार मैदान में होंगी। राजद ने रोहिणी को सारण सीट से टिकट दिया है। पहली बार सक्रीय राजनीति में एंट्री कर रहीं रोहिणी को अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपने पिता और भाई को सपोर्ट करते देखा गया है।

इस लिस्ट में अगला नाम है चिराग पासवान के बहनोई, अरुण भारती का। अरुण इस बार पहली दफा चुनाव मैदान में होंगे। चिराग के जीजा को सीधा लोकसभा चुनाव का टिकट मिला है। हालांकि, अरुण भारती चिराग के साथ राजनीतिक सलाहकार के रूप में पहले से काम कर रहे हैं। लेकिन, ये पहली दफा होगा जब सक्रिय राजनीति में उनकी खुलकर भागीदारी होगी।
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सूची में तीसरा नाम नवादा से सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर का है। वैसे तो ये राजनीति में पहले से एक्टिव हैं, लेकिन अभी वो राज्यसभा के सांसद है। अस बार उन्हें लोकसभा का टिकट मिला है । पहली दफा वो सीधे जनता के बीच जाकर अपने पक्ष में वोट की अपील करते नजर आएंगे। हालांकि, उन्होंने इससे पहले दूसरों के लिए चुनाव प्रचार जरूर किया है।

लिस्ट में चौथा नाम है सासाराम (सु) से पूर्व मंत्री मुनी लाल के बेटे शिवेश राम का है। भाजपा ने इन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा पांचवे नंबर पर हैं आरजेडी के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह का नाम है। राजद ने बक्सर सीट से इन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। सुधाकर सिंह भी लोकसभा चुनाव के लिए पहली दफा चुनाव मैदान में होंगे।

ऐसे में ये सवाल उठना शुरू हो गया है कि बीजेपी, जो लगातार परिवारवाद के मुद्दे पर विपक्षी दलों को घेरती आई है। वो खुद चुनाव आते ही कई जगहों पर अपने पुराने नेताओं के परिजन को टिकट देने से पीछे नहीं हटी। 2024 के चुनाव में विवेक ठाकुर और शिवेश राम को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

बिहार में सबसे ज्यादा परिवारवाद के छिटें किसी पर पड़े है तो वो थे रामविलास पासवान। इस बार लोकसभा चुनाव में उनके बेटे चिराग ने जीजा, अरुण भारती को टिकट दिया है।
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रामविलास पासवान पहले खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस प्रदेश के अध्यक्ष और विधायक थे, बाद में हाजीपुर से वह सांसद भी बने। सबसे छोटे भाई रामचंद्र पासवान समस्तीपुर से सांसद थे। उनके निधन के बाद उनके बेटे प्रिंस राज समस्तीपुर से सांसद बने। इसके साथ ही रामविलास पासवान के सुपुत्र चिराग पासवान सांसद है और वर्तमान में लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इस बार जमुई सुरक्षित सीट से चिराग पासवान ने अपने बहनोई अरुण भारती को प्रत्याशी बनाया है।

आरजेडी पर भी हमेशा से परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है। लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी में सभी बड़े पदों पर उनके परिवार के लोग ही दिखाई देते हैं। लालू प्रसाद यादव खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। छोटे बेटे तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में विरोधी दल के नेता हैं जबकि बड़े बेटे तेज प्रताप यादव विधायक हैं। विधान परिषद में विधायक दल की नेता लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी हैं। बड़ी बेटी मीसा भारती राज्यसभा की सदस्य हैं और इस बार लालू प्रसाद की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य सारण से चुनाव लड़ेंगी। जबकि, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के पुत्र सुधाकर सिंह बक्सर से चुनाव लड़ेंगे।

इन तमाम डेटा पर नजर डालने के बाद यह कहा जा सकता है कि परिवारवाद से कोई भी राजनीतिक दल अछूता नहीं रहा है। अपने नेता के परिवार के लोगों को टिकट देने से पार्टी कभी पीछे नहीं रहती है।
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