Bihar News: कृषि रोड मैप पर गरमाई सियासत, प्रदेश में क्या रहे हैं योजना के पिछले रिकॉर्ड?

Krishi Road Map, Bihar News: बिहार में पहली बार सीएम नीतीश कुमार ने साल 2008 में कृषि रोड मैप जारी किया था। उसके बाद दूसरा कृषि रोड मैप साल 2012 जारी किया गया। वहीं साल 2017 में तीसरा कृषि रोड मैप लागू हुआ था। अब 2023 में चौथा कृषि रोड मैप लागू किया गया है।

बिहार में करीब 79.46 लाख हेक्टेयर ज़मीन खेती के लायक है, वही प्रदेश की आबादी के करीब 74 फीसद लोग खेती कर ही अपने परिवार का गुज़ारा करते हैं। प्रदेश के घरेलू उत्पाद के ज़रिए GDP में खेती से 19 से 20 फ़ीसदी योगदान है। पुश पालन से योगदना करीब 6 फ़ीसदी है। सीएम नीतीश कुमार ने इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कृषि रोड मैप लाने का पहल किया।

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17 फरवरी 2008 को प्रदेश के पहले कृषि रोडमैप के लिए किसान पंचायत आयोजित की गई थी। इस दौरान सरकार की तरफ़ से बीज उत्पादन के साथ फ़सल की पैदावार को भी बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया था। इसमें नालंदा ज़िला के किसान ने चावल उत्पादन में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए चीन के रिकॉर्ड को तोड़ा, वहीं आलू उत्पादन में भी नालंदा के किसानों ने दुनिया भर में अलग पहचान बनाई।

बिहार में साल 2012 में दूसरे कृषि रोड मैप की शुरुआत की गई। इस बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2011 में कृषि कैबिनेट का गठन किया था, जिसमें 18 विभागों को शामिल थे। इस कृषि रोड मैप में भी प्रदेश सरकार ने फ़सल की पैदावार बढ़ाने पर ज़ोर दिया था। चावल की अच्छी पैदावार के लिए साल 2012 में सरकार को कृषि कर्मण पुरस्कार दिया गया था। वहीं साल 2013 की फ़सल की अच्छी पैदवार के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार मिला। इसके साल 2016 में मक्का के अच्छे उत्पादन के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार से सरकार को नवाज़ा गया।

प्रदेश में साल 2017 में तीसरे कृषि रोड मैप की शुरुआत हुई, इस दौरान सरकार ने ऑर्गेनिक खेती और खाद पर ख़ास ध्यान दिया। वहीं सरकार ने धान की अच्छी पैदावार का रिकॉर्ड भी कायम किया। खेतों में किसानों को बिजली के लिए अलग से फीडर का इंतज़ाम किया गया।

मत्स्य और दूध उत्पादन पर भी ख़ास ध्यान दिया गया, इस वजह से बिहार में मत्स्य और दुग्ध उत्पादन में इज़ाफ़ा हुआ। यहां तक की अब बिहार में दूसरे प्रदेशों से मछली आयात भी कम हुई। इन सबके अलावा सूखा और बाढ़ ग्रसित क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक खेती पर ज़ोर दिया गया। हर खेत तक पानी पहुंचने के लक्ष्य पर सरकार का काम अभी भी जारी है, उम्मीद है कि 2025 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा।

तीसरे कृषि मैप में हरित पट्टी बढ़ाने पर ख़ास ध्यान दिया गया। यही वजह है कि आज की तारीख में प्रदेशे हरित पट्टी ने 15 फ़ीसद का आंकड़ा छू लिया है। कोरोना काल की वजह से तीसरे कृषि मैप की तय तारीख को 2022 से बढ़ाकर 2023 किया गया है।

तीसरा कृषि रोड मैप के बाद भी किसानों के लिए फ़सल का उचित दाम पाना बड़ी चुनौती है। इसकी सबसे बड़ी वजह तय वक्त पर बीज और खाद हासिल कर दलहन और तेलहन के पैदावार को बढ़ाना है। वहीं कृषि उद्योग में बढ़ावा मिलना भी चुनौती है। इसके अलावा फ़सल के स्टोरेज की भी समस्या है, सरकार वादे तो कर रही है लेकिन अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया गया है।

चौथे कृषि रोड मैप में प्रदेश सरकार को किसानों के कई मसलो को हल करने पर ध्यान देना होगा। जैसे कि किसानों की इनकम, तेलहन और दलहन की पैदवार बढ़ाना, मौसम के मुताबिक खेती, अच्छी क्वालिटी के बीज का उत्पाद, खेती को उद्योग से जोड़ना और किसानों को फ़सल की अच्छी कीमत मिलना। वहीं किसानों की एक और मांग है कि मंडी व्यवस्था लागू की जाए।

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