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Delhi Blast: दिल्ली धमाके के नाम पर बिहार में महाठगी, डॉक्टर से कैसे लूटे 27 लाख?

Digital Arrest Fraud: बिहार के जहानाबाद में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड डॉक्टर अरुण कुमार को 'दिल्ली धमाके का आरोपी' बताकर 27 लाख 30 हजार रुपये की बड़ी ठगी कर ली है। ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और एटीएस का अधिकारी बताकर डॉक्टर को 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया। डॉक्टर को धमकी दी गई कि जम्मू-कश्मीर के एक बैंक खाते से उनके नाम पर आरडीएक्स खरीद-बिक्री में साढ़े तीन करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।

गिरफ्तारी के डर से भयभीत डॉक्टर ने 25 से 28 नवंबर के बीच तीन बार में यह रकम आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से ठगों के खातों में भेज दी। बाद में रिश्तेदार को कॉल करने पर ठगी का खुलासा हुआ और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई गई। यह घटना साइबर क्राइम के नए और खतरनाक तरीके को उजागर करती है।

Digital Arrest Fraud
(AI image)

Cyber Fraud in Bihar: मुंबई ATS अधिकारी बनकर कॉल

ठगी की शुरुआत एक अज्ञात कॉल से हुई, जिसमें कॉलर ने खुद को मुंबई एटीएस (ATS) का अधिकारी बताया। उसने डॉक्टर अरुण कुमार की पत्नी से बात करने के बाद उन्हें बताया कि जम्मू-कश्मीर के एक बैंक खाते से उनके नाम पर दिल्ली धमाके के लिए आरडीएक्स की खरीद-बिक्री में साढ़े तीन करोड़ का लेनदेन हुआ है। इसके बाद, डॉक्टर की बात एक कथित डीसीपी से कराई गई, जिसने गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें पूरी तरह भयभीत कर दिया।

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डिजिटल अरेस्ट और धमकी का दबाव

ठगों ने डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी, जिसका मतलब था कि जब तक मामला 'क्लियर' नहीं हो जाता, उन्हें किसी से बात नहीं करनी है, बाहर नहीं जाना है और लगातार उनके संपर्क में रहना है। कथित अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत लेनी होगी, जिसके लिए कोर्ट खर्च के नाम पर तुरंत 3 लाख रुपये जमा करने होंगे। इस मनोवैज्ञानिक दबाव और डर के कारण डॉक्टर ठगों के जाल में पूरी तरह फंस गए।

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27 लाख 30 हजार का ट्रांजैक्शन

गिरफ्तारी के डर से डॉक्टर अरुण कुमार ने 25 से 28 नवंबर के बीच तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन किए। पहली बार उन्होंने 2 लाख 30 हजार, दूसरी बार में 22 लाख, और तीसरी बार में 3 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ठगों के खातों में भेजे। कुल मिलाकर 27 लाख 30 हजार रुपये की बड़ी रकम ठगों ने हड़प ली। जब ठगों ने फिर से 3 लाख रुपये मांगे और डॉक्टर के पास पैसे खत्म हो गए, तब उन्होंने एक रिश्तेदार को फोन किया और इस ठगी का खुलासा हुआ।

साइबर पुलिस की अपील और चेतावनी

ठगी का पता चलते ही डॉक्टर ने साइबर सेल टोल फ्री नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। जहानाबाद के साइबर डीएसपी कृष्ण गोपाल ने इस घटना के बाद लोगों से अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकारी विभाग, पुलिस या क्राइम ब्रांच का दावा करने वाले किसी भी धमकी भरे कॉल पर तुरंत 1930 पर सूचना दें। डीएसपी ने जोर देकर कहा कि किसी भी परिस्थिति में, डर या दबाव में आकर अज्ञात खातों में पैसा न भेजें, क्योंकि यह ठगी का एक सामान्य तरीका है।

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