बिहार चुनाव: वोटों की गिनती को लेकर पटना में चुनाव आयोग के ऑफिस पहुंची RJD और कांग्रेस
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जारी मतगणना के बीच अब राजनीतिक दलों का हाईवोल्टेज ड्रामा भी शुरु हो गया है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का आरोप है कि बिहार की कई सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद उनके प्रत्याशियों को हारा हुआ घोषित किया गया है। इस संबंध में आरजेडी ने ट्विटर पर प्रत्याशियों की एक लिस्ट भी जारी की है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि पार्टीउम्मीदवार उमेश राम व सुबोध कांत सहाय को पहले बताया गया कि वह जीत गए हैं लेकिन फिर जबरन उन्हें हारा हुआ डिक्लेयर कर दिया। इन दावों के बाद अब कांग्रेस और आरजेडी चुनाव आयोग के दरवाजे पर अपनी शिकायत लेकर पहुंच गई है।

बता दें कि आरजेडी का दावा है कि नीतीश सरकार उनके जीते हुए प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट न देने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रही है। इसके अलावा कांग्रेस ने रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा, 'सकरा विधान सभा कांग्रेस उम्मीदवार उमेश राम ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री व कांग्रेस चुनाव प्रभारी श्री सुबोध कांत सहाय को बताया कि वो 600 वोट से जीत गए थे पर उन्हें जबरन क़रीब 1,700 वोट से हार डिक्लेयर कर दिया। क्या यही प्रजातंत्र की कसौटी है? चुनाव आयोग संज्ञान क्यों नही ले रहा?' वोटिंग में गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस और आरजेडी नेताओं ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है।
पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पार्टी के समर्थकों ने मतगणना को प्रभावित करने के लिए सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ पार्टी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो भी सामने आया है। वहीं इस मामले पर मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह ने कहा कि मतगणना में विसंगतियां हैं। हम चुनाव आयोग से न्याय की उम्मीद करते हैं। इस बीच राजद नेता मनोज झा ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए बताया कि 'चुनाव आयोग (ईसी) ने हमें आश्वासन दिया है कि वे हमारी सभी शिकायतों को दूर करने का प्रयास करेंगे। हमें चुनाव आयोग पर भरोसा है, लेकिन जिला प्रशासन पर नहीं।'
उधर, विपक्ष के आरोप के बाद बीजेपी की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई है। RJD द्वारा EVM पर आरोप लगाने पर भाजपा नेता संजय जायसवाल ने कहा, हम पूर्ण बहुमत प्राप्त कर चुके हैं क्योंकि NDA तथा RJD के बीच इतना अंतर है कि इसमें अब कोई परिवर्तन होने की संभावना नहीं है।इनका(RJD)एक ही एजेंडा है जीते तो ठीक और अगर नहीं जीते तो चीटिंग का आरोप लगाते हैं।
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