Bihar Election: कहां गायब हैं Pappu Yadav? कांग्रेस से किनारा किए जाने पर फिर बिगाड़ेंगे इंडिया अलायंस का गेम!

Pappu Yadav Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों का समय है, लेकिन सभी पार्टियों और प्रदेश के बड़े नेताओं ने तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस की ओर से संगठन को मजबूत बनाने का काम चल रहा है। लालू यादव के परिवार में विवाद के बावजूद तेजस्वी यादव की राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं। बीजेपी और जेडीयू भी सटीक रणनीति के साथ आगे बढ़ती दिख रही है। एनडीए में शामिल चिराग पासवान गठबंधन के साथ चलते रहने की बात कर रहे हैं और चुनाव लड़ने की इच्छा भी जता रहे हैं। इन सबके बीच एक नाम गायब दिख रहा है और वह है पप्पू यादव।

Pappu Yadav की क्या होगी बिहार चुनाव में भूमिका?

तेजस्वी यादव से मतभेदों की वजह से पप्पू यादव को 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिल पाया था। कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन में रहने की वजह से पप्पू यादव की निजी महत्वाकांक्षाएं पूरी होती नहीं दिख रही हैं। हालांकि, वह अपने बगावती तेवर गाहे-बगाहे दिखाते रहे हैं। अहमदाबाद की कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि बिहार में कांग्रेस बड़ी पार्टी है और गठबंधन में राजद के पीछे चलना उसकी मजबूरी नहीं है।

Pappu Yadav Bihar Election

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कांग्रेस में भी किए जा चुके हैं साइडलाइन

पप्पू यादव अभी निर्दलीय सांसद हैं, लेकिन वह कांग्रेस पार्टी के सदस्य भी हैं। एक वक्त में लालू यादव के करीबी लोगों में शुमार पप्पू यादव के लिए आरजेडी में अब गुंजाइश नहीं है। उनके पास ले-देकर कांग्रेस ही विकल्प है, क्योंकि अपनी पार्टी बनाकर भी वह देख चुके हैं। इंडिया गठबंधन को आगे ले जाने की जिम्मेदारी समझते हुए कांग्रेस पार्टी और खुद राहुल गांधी आरजेडी सुप्रीमो और तेजस्वी यादव को असहज करने वाली स्थिति में नहीं डालना चाहते हैं। यही वजह है कि इस बात की गुंजाइश कम ही लगती है कि इस विधानसभा चुनाव में पप्पू यादव को कोई बड़ी भूमिका कांग्रेस देगी। राहुल गांधी के करीबी लोगों में शुमार कन्हैया को भी बिहार में बड़ी भूमिका का अब तक इंतजार ही है।

यादव बहुल क्षेत्र में वोटों का गणित बिगाड़ेंगे पप्पू यादव?

पप्पू यादव के पास अपनी बड़ी पार्टी और गठबंधन भले ही न हो, लेकिन एक कल्ट व्यक्तित्व तो है ही। यही वजह है कि करीबी मुकाबले में भी वह निर्दलीय रहते हुए सांसद का चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। कांग्रेस और आरजेडी दोनों को ही इसकी आशंका है कि पप्पू यादव कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया (सीमांचल) और यादव बहुल इलाके मधेपुरा में यादव वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।

माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में पप्पू यादव खुद खुले तौर पर किसी उम्मीदवार का प्रचार न करें। उनकी नाराजगी की वजह से भी यादवों के वोट बैंक में सेंध लग सकती है। इस बार प्रशांत किशोर भी अपने उम्मीदवार उतारने वाले हैं। सोशल इंजीनियरिंग और जातीय गणित के खेल में पीके माहिर हैं। ऐसे में पप्पू और पीके दोनों कहीं न कहीं इंडिया गठबंधन के लिए ही मुश्किलें बढ़ाएंगे।

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